देश में खरीफ फसलों की बुवाई का सीजन तेजी से आगे बढ़ रहा है। (07 अगस्त, 2026) तक कुल 985.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई दर्ज की गई है। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 17.96 लाख हेक्टेयर कम है। कृषि क्षेत्र में इस दौरान फसलवार रकबे में अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं। जहां तिलहन का क्षेत्र बढ़ा है, वहीं धान, दलहन, मोटे अनाज और कपास के रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई है। कृषि आंकड़ों के अनुसार, तिलहन क्षेत्र में बढ़ोतरी के साथ मूंगफली और तिल जैसी फसलों ने भी पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, धान और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा घटा है।
07 अगस्त तक देश में धान की बुवाई 360.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में धान का क्षेत्र 344.78 लाख हेक्टेयर था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अंतिम 2025 क्षेत्रफल 446.70 लाख हेक्टेयर रहा था, जबकि सामान्य क्षेत्र 412 लाख हेक्टेयर है। धान के मौजूदा क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 15.90 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। बारिश और जल उपलब्धता की स्थिति का खरीफ धान की बुवाई पर क्षेत्रवार प्रभाव देखने को मिल रहा है।
दलहन का कुल क्षेत्र 7 अगस्त तक 103.78 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 105.73 लाख हेक्टेयर था। यानी दलहन के रकबे में 1.95 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। प्रमुख दलहनों में अरहर का क्षेत्र 37.53 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 40.14 लाख हेक्टेयर से कम है। वहीं उड़द का रकबा 22.86 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 20.29 लाख हेक्टेयर से अधिक है। मूंग का क्षेत्र 31.37 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह 33.21 लाख हेक्टेयर था। कुल मिलाकर दलहन क्षेत्र में मिश्रित रुझान देखने को मिला है।
श्री अन्न और मोटे अनाज की कुल बोवनी 168.50 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष यह 173.21 लाख हेक्टेयर थी। इस श्रेणी में कुल 4.71 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई। मक्का का क्षेत्र 87.15 लाख हेक्टेयर से घटकर 2026 में 83.67 लाख हेक्टेयर के आसपास रहा, जबकि ज्वार का रकबा मामूली रूप से बढ़कर 12.82 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ। बाजरा और छोटे मिलेट्स के क्षेत्र में भी पिछले वर्ष की तुलना में कमी रही।
खरीफ सीजन के आंकड़ों में सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी तिलहन के क्षेत्र में देखने को मिली है। 7 अगस्त तक तिलहन की बुवाई 180.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले वर्ष के 175.01 लाख हेक्टेयर से 5.19 लाख हेक्टेयर अधिक है।
प्रमुख तिलहनों में मूंगफली का रकबा 46.82 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 43.11 लाख हेक्टेयर था। यानी मूंगफली क्षेत्र में 3.71 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। सोयाबीन की बुवाई 119.92 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 119.66 लाख हेक्टेयर से मामूली अधिक है। वहीं तिल का क्षेत्र भी बढ़कर 9.96 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 8.52 लाख हेक्टेयर था।
सूरजमुखी और अन्य तिलहनों में भी बदलाव:
सूरजमुखी का क्षेत्र 2026 में 1.01 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 0.59 लाख हेक्टेयर से अधिक है। अरंडी का क्षेत्र हालांकि घटकर 2.27 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 2.95 लाख हेक्टेयर था। नाइजर सीड का क्षेत्र भी मामूली रूप से घटकर 0.12 लाख हेक्टेयर रहा। कुल मिलाकर तिलहन क्षेत्र में बढ़ोतरी खरीफ सीजन के प्रमुख सकारात्मक संकेतों में शामिल है।
गन्ने का रकबा लगभग स्थिर:
गन्ने की बुवाई 7 अगस्त तक 58.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 58.62 लाख हेक्टेयर थी। यानी इसमें केवल 0.31 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है। सामान्य क्षेत्र 54.20 लाख हेक्टेयर की तुलना में मौजूदा क्षेत्र अभी भी अधिक है।
कपास की बोवनी में 0.41 लाख हेक्टेयर की कमी:
कपास का क्षेत्र 7 अगस्त 2026 तक 106.01 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह 106.42 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कपास के रकबे में 0.41 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी आई है। हालांकि, कपास का मौजूदा क्षेत्र सामान्य क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर की तुलना में अभी भी कम है।
जूट और मेस्ता का रकबा मामूली बढ़ा:
जूट और मेस्ता की बुवाई 6.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 6.22 लाख हेक्टेयर थी। इस प्रकार इस श्रेणी में 0.12 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कुल खरीफ क्षेत्र पिछले साल से पीछे:
सभी प्रमुख खरीफ फसलों को मिलाकर 07 अगस्त, 2026 तक कुल 985.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है। पिछले वर्ष इसी समय कुल क्षेत्र 967.92 लाख हेक्टेयर था। उपलब्ध तालिका में वर्ष-दर-वर्ष अंतर 17.96 लाख हेक्टेयर दर्शाया गया है।
कुल मिलाकर इस खरीफ सीजन में फसलवार रकबे का रुझान मिश्रित रहा है। तिलहन क्षेत्र में बढ़ोतरी, विशेषकर मूंगफली और तिल के रकबे में विस्तार, सकारात्मक संकेत है। वहीं धान, दलहन, मोटे अनाज और कपास के क्षेत्र में कमी दर्ज होने से आगे की बुवाई और मौसम की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।
(07 अगस्त, 2026) तक प्रमुख खरीफ फसलों की स्थिति:
|
फसल |
2025 क्षेत्र (लाख हेक्टेयर) |
2026 क्षेत्र (लाख हेक्टेयर) |
बदलाव |
|
धान |
360.67 |
344.78 |
-15.90 |
|
दलहन |
105.73 |
103.78 |
-1.95 |
|
मोटे अनाज |
173.21 |
168.50 |
-4.71 |
|
तिलहन |
175.01 |
180.20 |
+5.19 |
|
गन्ना |
58.62 |
58.31 |
-0.31 |
|
जूट एवं मेस्ता |
6.22 |
6.34 |
+0.12 |
|
कपास |
106.42 |
106.01 |
-0.41 |
|
कुल |
967.92 |
985.89 |
-17.96 |
नोट: आंकड़े 7 अगस्त 2026 तक की उपलब्ध बोवनी स्थिति पर आधारित हैं और क्षेत्र लाख हेक्टेयर में है।
FAQs:
1. 2026 में खरीफ फसलों की बुवाई कितनी हुई है?
07 अगस्त 2026 तक कुल 985.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई दर्ज की गई है।
2. किस खरीफ फसल का रकबा सबसे ज्यादा बढ़ा है?
तिलहन क्षेत्र में 5.19 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
3. मूंगफली की बुवाई कितने क्षेत्र में हुई है?
मूंगफली का क्षेत्र 46.82 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
4. धान की बुवाई का क्षेत्र कितना है?
7 अगस्त 2026 तक धान की बुवाई 360.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है।
5. खरीफ फसलों की बुवाई पर किसका प्रभाव पड़ता है?
बारिश, मिट्टी में नमी, जल उपलब्धता और मौसम की स्थिति खरीफ फसलों की बुवाई के रकबे को प्रभावित करती है।