क्या आपके जिले की मिट्टी, बारिश और पानी के हिसाब से सही फसल बोई जा रही है? यही सवाल अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने वैज्ञानिक तरीके से हल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ICAR ने देश की 14 प्रमुख फसलों के लिए जिला-विशिष्ट कृषि मॉडल तैयार किए हैं, जिनमें मिट्टी की गुणवत्ता, जल उपलब्धता, वर्षा, जलवायु और स्थानीय संसाधनों के आधार पर सबसे उपयुक्त फसल चुनने की वैज्ञानिक सिफारिशें दी गई हैं। कम वर्षा वाले कई जिलों में अब भी बड़े पैमाने पर धान और गन्ने जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे जल संकट और बढ़ सकता है।
वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ICAR ने देश की 14 प्रमुख फसलों धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, चना, सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, कपास, गन्ना, आलू और प्याज—के लिए कृषि-पारिस्थितिकी आधारित जिला-विशिष्ट फसल योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं में उत्पादन क्षमता, जल उपलब्धता, मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु परिस्थितियों और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त फसल चयन की वैज्ञानिक सिफारिशें की गई हैं।
अध्ययन के अनुसार, भारत में धान, गन्ना, कपास और जूट जैसी जल-गहन फसलें लगभग 6.27 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती हैं, जो देश के कुल सकल फसल क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 28.9 लाख हेक्टेयर धान ऐसे 68 जिलों में उगाया जा रहा है जहां औसत वार्षिक वर्षा 650 मिमी से कम है। इसी प्रकार लगभग 7.21 लाख हेक्टेयर गन्ना ऐसे 91 जिलों में लगाया जाता है जहां वार्षिक वर्षा 700 मिमी से कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में फसल विविधीकरण जल संरक्षण और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सरकार जल की अधिक मांग वाली फसलों के स्थान पर दलहन, तिलहन, मोटे अनाज (श्री अन्न) और बागवानी फसलों को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में ICAR ने 47 चयनित जिलों में स्थान-विशिष्ट फसल विविधीकरण परियोजनाएं लागू की हैं। जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न फसलों हेतु ड्रिप सिंचाई, ड्रिप फर्टिगेशन और वैज्ञानिक सिंचाई समय निर्धारण की तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण से किसानों को मिल रही नई तकनीकों की जानकारी:
फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रसार के लिए वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान ICAR ने 457 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में 8,749 किसानों तथा 4,592 कृषि विस्तार अधिकारियों को आधुनिक कृषि तकनीकों और जल संरक्षण उपायों का प्रशिक्षण दिया गया।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई राष्ट्रीय योजनाएं सक्रिय:
भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवाचार कार्यक्रम (NICRA) के तहत सूखा, बाढ़, लवणीयता और गर्मी सहन करने वाली फसल किस्मों का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा 151 संवेदनशील जिलों में जलवायु अनुकूल गांव विकसित किए गए हैं तथा 651 जिलों के लिए कृषि आकस्मिक कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। मौसम आधारित कृषि सलाह, किसान प्रशिक्षण और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीकों का विस्तार किया जा रहा है।
FAQs:
Q1. ICAR District-Specific Crop Model क्या है?
यह ICAR द्वारा तैयार किया गया वैज्ञानिक मॉडल है, जो जिले की मिट्टी, वर्षा और जल उपलब्धता के आधार पर उपयुक्त फसल की सिफारिश करता है।
Q2. इस मॉडल में कितनी फसलें शामिल हैं?
इस मॉडल में 14 प्रमुख फसलें शामिल हैं, जिनमें धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, चना, अरहर, सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, कपास, गन्ना, आलू और प्याज शामिल हैं।
Q3. फसल विविधीकरण क्यों जरूरी है?
फसल विविधीकरण से पानी की बचत होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसानों को बेहतर आय के अवसर मिलते हैं।
Q4. ICAR किसानों को कौन-सी नई तकनीकें दे रहा है?
ICAR ड्रिप सिंचाई, ड्रिप फर्टिगेशन, वैज्ञानिक सिंचाई प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है।
Q5. Khetivyapar पर किसानों को क्या जानकारी मिलती है?
Khetivyapar पर कृषि योजनाएं, मौसम अपडेट, मंडी भाव, खेती की नई तकनीकें और किसानों के लिए उपयोगी कृषि समाचार उपलब्ध कराए जाते हैं।