खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक सिंचाई, मृदा परीक्षण और आधुनिक कृषि मशीनरी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बायोफोर्टिफाइड गेहूं की HI 1650, HI 1636, HI 1633 और HI 1655 जैसी किस्मों के साथ अधिक उत्पादन क्षमता वाली Pusa Arhar 16 को बढ़ावा देने पर जोर है। वहीं दूसरी ओर, सोयाबीन की फसल में इस समय पॉड ब्लाइट, कॉलर रॉट, चारकोल रॉट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे रोगों को लेकर किसानों को सतर्क रहने और अनुशंसित उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
किसानों को बेहतर गुणवत्ता और पोषण वाली फसलों की ओर बढ़ाने के लिए बायोफोर्टिफाइड गेहूं की उन्नत किस्मों की बुवाई के लिए प्रेरित करने की सलाह दी गई है। इन किस्मों में आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। किसानों को गेहूं की HI 1650, HI 1636, HI 1633 और HI 1655 किस्मों की बुवाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी तरह अधिक उत्पादन क्षमता वाली Pusa Arhar 16 किस्म को भी अपनाने की सलाह दी गई है।
पानी की बचत और सिंचाई की दक्षता बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेशराइज्ड पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया है। खेत में पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकार की ओर से अनुदान की सुविधा भी उपलब्ध है। सभी जिलों में संचालित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का अधिक उपयोग करने और ज्यादा से ज्यादा खेतों की मिट्टी की जांच कराने की सलाह दी गई है।
किसानों को केवल DAP पर निर्भर रहने के बजाय NPK उर्वरक के उपयोग के लिए जागरूक करने की सलाह दी गई है। NPK में फसल के लिए आवश्यक प्रमुख पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं और संतुलित पोषण के लिए इसका उचित उपयोग किया जा सकता है। उर्वरक वितरण व्यवस्था को भी बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। डबल लॉक केंद्रों के आधुनिकीकरण के साथ यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि किसानों को लंबे समय तक कतार में खड़ा न रहना पड़े और उनके लिए बैठने की उचित व्यवस्था उपलब्ध हो।
फसल अवशेष यानी नरवाई जलाने से मिट्टी को होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है। इसके विकल्प के रूप में हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों से बुवाई करने की सलाह दी गई है। इन तकनीकों से फसल अवशेष खेत में ही बने रहते हैं, जिससे मिट्टी के पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद मिलती है। जिन किसानों ने हैप्पी सीडर के जरिए बुवाई की है, वहां अच्छे परिणाम मिलने की जानकारी भी दी गई है।
ई-मंडी और फार्म गेट ऐप से फसल बिक्री को आसान बनाने की तैयारी:
किसानों को अपनी उपज बेचने में कम से कम समय लगे, इसके लिए ई-मंडी व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा मंडियों को हाईटेक करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा सरकार की ओर से शुरू किए गए फार्म गेट ऐप के माध्यम से किसान पंजीयन कराकर घर से ही अपनी फसल बेच सकते हैं। इससे मंडी तक पहुंचने की जरूरत कम हो सकती है और उपज की बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
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सोयाबीन में रोगों से बचाव के लिए सतर्क रहें किसान:
इस समय सोयाबीन की फसल फलन और फली निर्माण के चरण में है। इस दौरान फसल पर पॉड ब्लाइट, कॉलर रॉट और चारकोल रॉट जैसे रोगों का खतरा बना रह सकता है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और रोग की पहचान होने पर अनुशंसित फफूंदनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
चारकोल रॉट:
चारकोल रॉट से प्रभावित पौधों में पत्तियां छोटी और पीली होकर बाद में भूरी पड़ सकती हैं। इसके नियंत्रण के लिए पायरोक्लोस्टोबिन 333 g/L SC की 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा को पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
गर्दन सड़न / कॉलर रॉट:
गर्म और नम परिस्थितियों में यह रोग तेजी से फैल सकता है। प्रभावित पौधों के तने पर लाल-भूरे रंग के छोटे, गोल स्क्लेरेशिया दिखाई दे सकते हैं। गंभीर संक्रमण में पौधे मुरझाकर गिरने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए पायरोक्लोस्टोबिन 163 g/L + एपॉक्सीकोनाजोल 50 g/L SE की 750 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% की 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
पॉड ब्लाइट:
पॉड ब्लाइट फफूंद, बीज और मिट्टी से संबंधित संक्रमण के साथ लगातार बारिश तथा अत्यधिक नमी की स्थिति में बढ़ सकता है। रोग नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 25.9% EC की 625 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा टेब्यूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% की 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा में छिड़काव की सलाह दी गई है।
राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट:
गर्म और नम मौसम में यह रोग बीज और मिट्टी जनित फफूंद के कारण फैल सकता है। इसके प्रकोप में पत्तियों की निचली सतह पर छोटे या बड़े भूरे-लाल अंडाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं। इसके नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% की 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा पायरोक्लोस्टोबिन 20% WG की 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
FAQs:
1. बायोफोर्टिफाइड गेहूं की कौन-कौन सी किस्में हैं?
HI 1650, HI 1636, HI 1633 और HI 1655 जैसी बायोफोर्टिफाइड गेहूं की किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
2. Pusa Arhar 16 की खासियत क्या है?
Pusa Arhar 16 अधिक उत्पादन क्षमता वाली अरहर की उन्नत किस्म के रूप में किसानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
3. सोयाबीन में कौन-कौन से रोग का खतरा है?
सोयाबीन में पॉड ब्लाइट, कॉलर रॉट, चारकोल रॉट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे रोगों का खतरा हो सकता है।
4. नरवाई जलाने के बजाय क्या करना चाहिए?
नरवाई जलाने के बजाय हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों से बुवाई करने की सलाह दी जाती है।
5. सोयाबीन में रोग दिखाई देने पर क्या करें?
फसल की नियमित निगरानी करें और रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।