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35 दिन बारिश नहीं हुई, फिर भी लहलहाती रही मोठ की फसल! CAZRI की 4 किस्मों ने El Niño वर्ष में दिखाई जबरदस्त सहनशीलता

कम पानी और रेतीली जमीन में भी रिकॉर्ड उत्पादन देने वाली काजरी की 4 नई मोठ किस्में।
कम पानी और रेतीली जमीन में भी रिकॉर्ड उत्पादन देने वाली काजरी की 4 नई मोठ किस्में।

पश्चिमी राजस्थान की कम और अनिश्चित बारिश वाली जलवायु में मोठ की खेती हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। करीब 10 लाख हेक्टेयर में उगाई जाने वाली इस प्रमुख दलहनी फसल की औसत उत्पादकता लगभग 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। ऐसे में 35 दिनों के लंबे dry spell के दौरान भी हरी-भरी बढ़वार और अच्छी फली बनने वाली CAZRI की चार किस्मों CAZRI Moth-4, Moth-5, Moth-6 और Moth-7 का प्रदर्शन किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। समय पर बुवाई, नमी संरक्षण और बेहतर crop management के साथ इन किस्मों ने कम मिट्टी की नमी में भी अपनी अनुकूलन क्षमता दिखाई।

पश्चिमी राजस्थान में मोठ की खेती क्यों है चुनौतीपूर्ण?

मोठ पश्चिमी राजस्थान की गर्म और शुष्क जलवायु में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है। यहां करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है, लेकिन औसत उत्पादकता लगभग 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ही है। इसकी प्रमुख वजह सालाना 150–250 मिमी की कम, अनियमित और अनिश्चित वर्षा, 20–30 दिनों तक चलने वाले सूखे दौर और मिट्टी में सीमित नमी की उपलब्धता है। ऐसे वातावरण में ऐसी किस्मों की जरूरत होती है जो पानी की कमी के दौरान भी तेजी से बढ़ सकें और फूल एवं फली बनने की प्रक्रिया जारी रख सकें।

CAZRI की चार किस्मों ने सूखे में दिखाई मजबूती:

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए CAZRI लंबे समय से मोठ की breeding और genetic improvement पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी किस्में विकसित करना है जो moisture stress को सहन कर सकें, बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी विकास गति को समायोजित कर सकें और बेहतर उत्पादन क्षमता बनाए रखें। पिछले तीन वर्षों में CAZRI ने चार किस्में जारी की हैं—CAZRI Moth-4, CAZRI Moth-5, CAZRI Moth-6 और CAZRI Moth-7। खरीफ 2026 में इनका खेत स्तर पर प्रदर्शन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि फसल को करीब 35 दिनों तक लगातार बारिश की कमी का सामना करना पड़ा।

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35 दिन के सूखे के बावजूद फसल में बनी रही हरियाली:

10 जुलाई से 2 सितंबर 2026 के बीच कुल pan evaporation करीब 317 मिमी दर्ज की गई। 3 अगस्त की बारिश के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं हुई। 3 अगस्त से 7 सितंबर तक करीब 35 दिनों के dry spell के दौरान cumulative pan evaporation लगभग 180 मिमी रही। इस दौरान शुरुआती बारिश ने फसल की स्थापना और शुरुआती बढ़वार में मदद की। फसल का जल्दी canopy development, मिट्टी को बांधे रखना और जड़ों के आसपास नमी को बनाए रखने की क्षमता भी इसके लिए सहायक रही।

बेहतर फसल प्रबंधन ने भी निभाई अहम भूमिका:

CAZRI की किस्मों के प्रदर्शन में उचित crop management का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। मानसून शुरू होते ही जुलाई में समय पर बुवाई की गई और पौधों के बीच 45 × 10 सेंटीमीटर की उपयुक्त दूरी रखी गई। बुवाई के करीब 20 दिन बाद moisture conservation के लिए mechanical intercultural किया गया। इसके साथ mechanical weed management और जरूरत के अनुसार manual spot weeding की गई। विकसित canopy ने उपलब्ध मिट्टी की नमी का बेहतर इस्तेमाल करने में भी मदद की। इनका परीक्षण जिन खेतों में किया गया, वहां मिट्टी की उर्वरता भी कम थी। वहां organic carbon 0.13–0.18%, pH 7.9–8.1, उपलब्ध nitrogen 90–100 किलोग्राम/हेक्टेयर, phosphorus 10–15 किलोग्राम/हेक्टेयर और potassium 250–260 किलोग्राम/हेक्टेयर पाया गया।

फूल और फली बनने के समय भी नहीं रुकी फसल:

इन किस्मों का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि लंबा moisture stress फसल के flowering, pod formation और reproductive development के चरण में आया। इसके बावजूद लगभग 55 दिन की फसल में पौधे हरे, अच्छी बढ़वार वाले और पर्याप्त मात्रा में फलियों से युक्त दिखाई दिए। यह प्रदर्शन पश्चिमी राजस्थान की कठिन और अनिश्चित जलवायु के लिए इन किस्मों की अनुकूलन क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

चारों किस्मों के बीज उत्पादन पर भी जोर:

CAZRI इन चारों नई किस्मों के seed multiplication पर भी काम कर रहा है। 2026 की Saathi Portal की मांग के अनुसार 23.32 क्विंटल बीज की जरूरत पूरी करने के लिए CAZRI Research Farm में फिलहाल 7 हेक्टेयर क्षेत्र में seed production किया जा रहा है। 2025 में इन चारों किस्मों के लिए Saathi Portal के माध्यम से 63.2 क्विंटल बीज की मांग दर्ज की गई थी। एक क्विंटल breeder seed से लगभग 1,000–1,400 क्विंटल certified seed तैयार किया जा सकता है। उचित multiplication और certified seed के रूप में marketing होने पर इससे करीब 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती संभव हो सकती है।

यदि इसकी केवल 50% क्षमता भी हासिल होती है, तो राजस्थान में इन किस्मों का विस्तार राज्य के कुल मोठ क्षेत्र के लगभग 25% हिस्से तक किया जा सकता है। बीज multiplication में Rajasthan State Seeds Corporation, National Seeds Corporation और चयनित निजी कंपनियां भी शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

1. पश्चिमी राजस्थान में मोठ की खेती क्यों की जाती है?

मोठ गर्म और शुष्क जलवायु में उगने वाली प्रमुख दलहनी फसल है। यह कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

2. CAZRI की कौन-कौन सी मोठ की किस्में हैं?

CAZRI Moth-4, CAZRI Moth-5, CAZRI Moth-6 और CAZRI Moth-7 प्रमुख नई किस्में हैं।

3. मोठ की फसल कितने दिन के सूखे में प्रदर्शन कर सकी?

खरीफ 2026 में इन किस्मों ने करीब 35 दिनों के dry spell के दौरान भी अच्छी हरियाली और बढ़वार दिखाई।

4. मोठ की खेती में नमी संरक्षण क्यों जरूरी है?

कम बारिश वाले क्षेत्रों में मिट्टी की उपलब्ध नमी को लंबे समय तक बनाए रखना फसल की बढ़वार, flowering और pod formation के लिए महत्वपूर्ण है।

5. CAZRI मोठ किस्मों के बीज उत्पादन पर क्या काम हो रहा है?

CAZRI इन चारों किस्मों के seed multiplication पर काम कर रहा है। 2026 में 7 हेक्टेयर क्षेत्र में seed production किया जा रहा है।

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