मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल इस समय फलन और पॉड निर्माण की अवस्था में पहुंच रही है। बारिश और खेतों में बनी अधिक नमी के बीच इस चरण में फसल पर कई फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।
विशेष रूप से चारकोल रॉट, गर्दन सड़न, पॉड ब्लाइट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट पर नजर रखना जरूरी बताया गया है। इन रोगों की समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
सोयाबीन में पॉड ब्लाइट का खतरा लगातार बारिश और खेत में अधिक नमी की स्थिति में बढ़ सकता है। यह फफूंद से संबंधित बीज एवं भूमि जनित रोग है। पॉड निर्माण के दौरान किसानों को फसल की विशेष निगरानी करने की सलाह दी गई है।
इसके नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 25.9 EC - 625 मिली प्रति हेक्टेयर, टेब्यूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% - 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा से छिड़काव किया जा सकता है।
गर्म और नम मौसम राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट के लिए अनुकूल हो सकता है। यह भूमि एवं बीज जनित फफूंद से संबंधित रोग है। इसके प्रकोप में पत्तियों की निचली सतह पर भूरे-लाल रंग के छोटे या बड़े अंडाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% - 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, पायरोक्लोस्त्रोबिन 20% WG - 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा से छिड़काव शामिल है।
चारकोल रॉट से प्रभावित सोयाबीन पौधों में सबसे पहले पत्तियां छोटी और पीली दिखाई दे सकती हैं। संक्रमण बढ़ने पर पत्तियों का रंग भूरा होने लगता है और पौधे कमजोर पड़ सकते हैं। इसके नियंत्रण के लिए दी गई अनुशंसा के अनुसार पायरोक्लोस्त्रोबिन 333 ग्राम/लीटर SC का 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है।
गर्म और नम परिस्थितियों में गर्दन सड़न का खतरा बढ़ सकता है। इस रोग में पौधों के तने और प्रभावित हिस्सों पर सड़न तथा विल्ट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में पौधे मुरझाकर गिर सकते हैं। प्रभावित हिस्सों पर लाल-भूरे रंग के छोटे, गोल स्क्लेरेशिया भी दिखाई दे सकते हैं।
इसके नियंत्रण के लिए पायरोक्लोस्त्रोबिन 163 ग्राम/लीटर + इपॉक्सीकोनाजोल 50 ग्राम/लीटर SE - 750 मिली प्रति हेक्टेयर या कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% - 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा से छिड़काव की अनुशंसा शामिल है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह:
सोयाबीन की इस अवस्था में खेत की नियमित निगरानी करना बेहद जरूरी है। किसान पत्तियों, तनों और पॉड में होने वाले असामान्य बदलावों पर नजर रखें। किसी भी रोग के लक्षण दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करें और उसके बाद ही संबंधित फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।
ध्यान दें - खेत में अनावश्यक नमी जमा न होने दें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार रोग प्रबंधन के उपाय अपनाएं।
FAQs:
1. सोयाबीन में इस समय कौन-कौन से रोग का खतरा है?
पॉड ब्लाइट, राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट, चारकोल रॉट और गर्दन सड़न का खतरा बढ़ सकता है।
2. सोयाबीन में पॉड ब्लाइट कब बढ़ सकता है?
लगातार बारिश और खेत में अधिक नमी की स्थिति में पॉड ब्लाइट का प्रकोप बढ़ सकता है।
3. चारकोल रॉट की शुरुआती पहचान कैसे करें?
इस रोग में पत्तियां छोटी और पीली दिखाई दे सकती हैं। संक्रमण बढ़ने पर पत्तियां भूरी पड़ने लगती हैं।
4. राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट के क्या लक्षण हैं?
पत्तियों की निचली सतह पर भूरे-लाल रंग के छोटे या बड़े अंडाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
5. सोयाबीन की फसल को रोगों से कैसे बचाएं?
खेत की नियमित निगरानी करें, पानी जमा न होने दें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।