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मध्य प्रदेश में डेयरी सेक्टर को बड़ा बूस्ट! ₹2,973 करोड़ की योजना मंजूर, 26 हजार गांवों तक पहुंचेगी दुग्ध सहकारी व्यवस्था

मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मध्य प्रदेश में किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने की तैयारी है। प्रदेश मंत्रि-परिषद ने ₹2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत गांवों में दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार, दूध संग्रहण और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के साथ सांची ब्रांड के बाजार को मजबूत किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में अधिक से अधिक गांवों को सहकारी डेयरी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे दूध उत्पादकों को संगठित बाजार और बेहतर बिक्री व्यवस्था मिल सके।

7,331 से बढ़कर 26,000 गांवों तक पहुंचेंगी समितियां:

वर्तमान में प्रदेश के 7,331 गांव दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े हैं। योजना के तहत इनकी पहुंच बढ़ाकर 26,000 गांवों तक की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रहण और किसानों को स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

रोजाना 52 लाख किलो दूध संग्रहण का लक्ष्य:

प्रदेश में फिलहाल करीब 12 लाख किलोग्राम दूध प्रतिदिन एकत्र किया जाता है। इसे अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य है। इससे अधिक किसानों और पशुपालकों से दूध खरीदने की क्षमता बढ़ेगी।

दूध प्रोसेसिंग क्षमता 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन होगी:

वर्तमान दूध प्रसंस्करण क्षमता करीब 17.8 लाख लीटर प्रतिदिन है। इसे बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। इससे अतिरिक्त दूध से विभिन्न मूल्यवर्धित डेयरी उत्पाद तैयार करने और बाजार का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

सांची दूध की बिक्री 35 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य:

सांची दूध की मौजूदा पैकेट बिक्री करीब 7 लाख लीटर प्रतिदिन है। योजना के तहत इसे बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। बाजार विस्तार से दूध की मांग बढ़ाने और उत्पादकों को बेहतर बाजार से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

कृत्रिम गर्भाधान का कवरेज 50% करने की तैयारी:

डेयरी विकास योजना में पशुओं की नस्ल सुधार और उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर है। वर्तमान में कृत्रिम गर्भाधान का कवरेज करीब 15% है, जिसे बढ़ाकर 50% करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या और भविष्य में दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

NDDB के साथ समझौते से मिलेगा सहयोग:

डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, संबंधित दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच 13 अप्रैल 2025 को सहकार्यता अनुबंध हुआ था। इसी के तहत NDDB ने ₹2,973 करोड़ की योजना को सैद्धांतिक सहमति दी है। राज्य सरकार डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹500 करोड़ का अनुदान देगी। इसके अलावा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत करीब ₹241 करोड़ के राज्यांश और योजना के अन्य घटकों को लागू करने की मंजूरी दी गई है।

किसानों और पशुपालकों को क्या होगा फायदा?

योजना से 26 हजार गांवों तक दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार, दूध संग्रहण और प्रोसेसिंग क्षमता में वृद्धि तथा सांची के बाजार विस्तार की उम्मीद है। इससे किसानों और पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर दूध बेचने की बेहतर सुविधा और संगठित बाजार मिल सकता है। वहीं, पशुओं की नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान के विस्तार से लंबे समय में दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, योजना का फोकस दूध उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण और बिक्री तक पूरी डेयरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर है।

FAQs:

1. मध्य प्रदेश की डेयरी विकास योजना कितने करोड़ रुपये की है?
मध्य प्रदेश सरकार ने ₹2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी है।

2. दुग्ध सहकारी समितियां कितने गांवों तक पहुंचेंगी?
योजना के तहत दुग्ध सहकारी समितियों की पहुंच 7,331 से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक करने का लक्ष्य है।

3. दूध संग्रहण का नया लक्ष्य कितना है?
दूध संग्रहण को करीब 12 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य है।

4. सांची दूध की बिक्री कितनी करने का लक्ष्य है?
सांची दूध की पैकेट बिक्री को 7 लाख लीटर से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।

5. किसानों और पशुपालकों को क्या फायदा मिलेगा?
योजना से दूध बेचने के लिए बेहतर बाजार, संग्रहण सुविधाएं, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर और पशुओं की नस्ल सुधार से जुड़े अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

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