भारत की कृषि व्यवस्था तेजी से डिजिटल और डेटा आधारित बदलाव की ओर बढ़ रही है। एक ओर 10.41 करोड़ Farmer ID तैयार होने से किसानों तक सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं की पहुंच को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश तेज हुई है, तो दूसरी ओर Digital Crop Survey, गांवों की जियो-रेफरेंसिंग और भूमि डेटा को मजबूत किया जा रहा है। इसी के साथ दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकता में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सम्मेलन में AgriStack और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की प्रगति को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया। अब तक 10.41 करोड़ Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं और 26 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को इसमें शामिल किया गया है। यह कवरेज PM-KISAN के लाभार्थियों का करीब 84.68% और अनुमानित ऑपरेशनल कृषि होल्डिंग्स का लगभग 77% है।
Farmer ID को किसानों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं की डिलीवरी का महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान की पहचान के आधार पर सही लाभ, सही किसान और सही समय पर पहुंच सके। चौहान ने राज्यों से Farmer ID निर्माण के लिए शिविरों को प्रभावी ढंग से संचालित करने और उपलब्ध संसाधनों का पारदर्शी इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
डिजिटल कृषि की सफलता के लिए केवल किसान की डिजिटल पहचान पर्याप्त नहीं है। जमीन और फसल से जुड़ा सटीक डेटा भी जरूरी है। सम्मेलन में लैंड मैपिंग, जियो-रेफरेंसिंग और डेटा वेरिफिकेशन को डिजिटल कृषि मिशन की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया। अब तक करीब 5.9 लाख गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी हो चुकी है, जो चिन्हित गांवों का लगभग 93.05% है। इससे भविष्य में भूमि के वास्तविक रिकॉर्ड, फसल सर्वे और किसान की डिजिटल पहचान को जोड़कर अधिक सटीक कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
डिजिटल फसल सर्वे भी तेजी से विस्तार कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इसका कवरेज 2024-25 में 290 जिलों से बढ़कर रबी 2025-26 में 650 जिलों तक पहुंच गया। अब खरीफ 2026-27 में 692 जिलों को इसके दायरे में लाने की योजना है। क्षेत्रफल के लिहाज से भी बड़ा विस्तार हुआ है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत कवरेज 2024-25 के 3.87 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 9.18 करोड़ हेक्टेयर हो गया। खरीफ 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 13.4 करोड़ हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।
दलहन उत्पादन 274.09 लाख टन पहुंचा:
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत देश में उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 2024-25 में 256.83 लाख मीट्रिक टन रहा दलहन उत्पादन बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख मीट्रिक टन हो गया। इसी अवधि में दलहन की खेती का क्षेत्रफल 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हुआ। वहीं उत्पादकता भी 926 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकता—तीनों में वृद्धि इस बात का संकेत है कि दलहन क्षेत्र में किए जा रहे तकनीकी, नीतिगत और उत्पादन संबंधी हस्तक्षेपों का असर दिखाई देने लगा है।
घटी आयात निर्भरता, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा देश:
घरेलू उत्पादन बढ़ने का असर दलहन आयात पर भी दिखाई दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दलहन आयात 2024-25 के 72.56 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2025-26 में 59.64 लाख मीट्रिक टन रह गया। सरकार का जोर अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है।
2026-27 में 528 Processing Units का लक्ष्य:
दलहन की खेती बढ़ने के साथ उसकी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। सरकार ने 2026-27 में राज्यों में 528 दलहन प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। चौहान ने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किए बिना उत्पादन वृद्धि का पूरा आर्थिक लाभ किसान तक नहीं पहुंच सकता। इसलिए सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रोसेसिंग यूनिट, भंडारण सुविधाओं और बाजार से जुड़ाव को गति देने की आवश्यकता है।
FAQs:
1. Farmer ID क्या है?
Farmer ID किसानों की डिजिटल पहचान है, जिसका इस्तेमाल कृषि योजनाओं और सेवाओं की बेहतर डिलीवरी के लिए किया जा रहा है।
2. अब तक कितनी Farmer ID बनी हैं?
अब तक करीब 10.41 करोड़ Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं।
3. Digital Crop Survey क्यों महत्वपूर्ण है?
इससे फसल और क्षेत्रफल से जुड़ा डिजिटल डेटा तैयार करने में मदद मिलती है, जिससे कृषि योजनाओं और सेवाओं की निगरानी बेहतर हो सकती है।
4. 2025-26 में दलहन उत्पादन कितना रहा?
2025-26 में दलहन उत्पादन बढ़कर 274.09 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया।
5. 2026-27 में कितनी दलहन Processing Units का लक्ष्य है?
सरकार ने 2026-27 में 528 दलहन प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।