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त्योहारी सीजन से पहले प्याज की कीमतों में उछाल: पूरा बफर स्टॉक खुदरा बाजार में उतारने की तैयारी

प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार की नजर
प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार की नजर

देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट और उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में प्याज का भाव करीब ₹50 प्रति किलो तक पहुंचने के बीच केंद्र सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए अपने प्राइस स्टेबिलाइजेशन बफर का पूरा स्टॉक खुदरा बाजार में उतारने पर विचार कर रही है। इस साल सरकारी एजेंसियों की प्याज खरीद लक्ष्य से कम रहने, मानसून की अनिश्चितता और खरीफ फसल की संभावित देरी ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में सरकार की नजर अब त्योहारी सीजन से पहले प्याज की उपलब्धता और खुदरा कीमतों पर है।

लक्ष्य से कम हुई प्याज की सरकारी खरीद:

सरकार ने इस साल बफर स्टॉक के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक करीब 1.20 लाख टन ही खरीदा जा सका है। NAFED और NCCF के माध्यम से की जा रही खरीद अपेक्षा से कम रहने की एक बड़ी वजह किसानों को निजी कारोबारियों से मिलने वाला बेहतर भाव बताया जा रहा है। सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाए जाने के बावजूद कई किसान अपनी उपज निजी व्यापारियों को बेच रहे हैं। इससे सरकारी बफर में प्याज का स्टॉक अपेक्षाकृत कम रह गया है।

सरकार ने बढ़ाया खरीद मूल्य:

प्याज की खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने जुलाई 2026 में प्राइस स्टेबिलाइजेशन बफर के तहत खरीद मूल्य में करीब 13% की बढ़ोतरी की। खरीद कीमत ₹1,875 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल कर दी गई, जो 4 जुलाई 2026 से लागू है। इसके बावजूद सरकारी खरीद लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में अब सरकार के सामने सीमित बफर स्टॉक का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने की चुनौती है।

प्याज की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश में प्याज उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 307.67 लाख मीट्रिक टन था। यानी उत्पादन में बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन बाजार में कीमतों पर कई अन्य कारकों का असर पड़ रहा है। मानसून की अनिश्चितता, खरीफ प्याज की आवक में संभावित देरी और मौसमी मांग ने बाजार में कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में प्याज की कुल उपलब्धता चिंता का विषय नहीं है और कीमतों में कुछ वृद्धि सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव का हिस्सा हो सकती है।

महाराष्ट्र, MP और गुजरात में स्टॉक पर्याप्त:

सरकार के अनुसार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का उपलब्ध स्टॉक फिलहाल पर्याप्त है। देशभर की मंडियों में रोजाना प्याज की आवक 50,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है। अकेले महाराष्ट्र में आवक 30,000 मीट्रिक टन से ज्यादा बताई गई है। महाराष्ट्र में प्याज की औसत मोडल कीमत करीब ₹18 प्रति किलो बताई गई है। सरकार का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता वाला स्टॉक अभी भंडारण में मौजूद है, जिसे कम आवक वाले समय में बाजार में उतारा जा सकता है।

क्यों खुदरा बाजार में उतारा जा सकता है पूरा बफर स्टॉक?

सरकार के पास इस बार बफर स्टॉक अपेक्षाकृत सीमित है। ऐसे में यदि इसे बड़े पैमाने पर थोक बाजार में उतारा जाता है, तो खुदरा उपभोक्ताओं तक इसका लाभ पूरी तरह पहुंचना सुनिश्चित नहीं हो सकता। इसलिए सरकार सीधे खुदरा बाजार में प्याज उपलब्ध कराकर कीमतों पर दबाव कम करने की रणनीति पर विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य खासतौर पर उन शहरों और उपभोक्ता बाजारों में राहत पहुंचाना है, जहां प्याज के खुदरा भाव तेजी से बढ़े हैं। सरकार प्रमुख खपत वाले क्षेत्रों में कीमतों और उपलब्धता की लगातार निगरानी कर रही है।

अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में मिल सकती है राहत:

बाजार में तेजी को देखते हुए सरकार अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में बफर स्टॉक को खुदरा बाजार में उतारने का फैसला ले सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय बाजार की स्थिति, उपलब्ध स्टॉक और कीमतों के रुझान को देखते हुए लिया जाएगा। अगर सरकार खुदरा बाजार में बफर प्याज की आपूर्ति बढ़ाती है, तो इसका तत्काल उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देना और कीमतों में तेज उछाल को रोकना होगा। वहीं किसानों के लिए चुनौती यह रहेगी कि सरकारी हस्तक्षेप के साथ-साथ उन्हें उनकी उपज का उचित बाजार मूल्य भी मिलता रहे।

FAQs:

1. प्याज का भाव क्यों बढ़ रहा है?

मानसून की अनिश्चितता, खरीफ प्याज की आवक में देरी की आशंका और मौसमी मांग के कारण प्याज की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

2. सरकार ने कितनी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था?

सरकार ने बफर स्टॉक के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, जबकि करीब 1.20 लाख टन खरीद हो सकी है।

3. सरकार ने प्याज का खरीद मूल्य कितना किया?

सरकार ने खरीद मूल्य ₹1,875 से बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल कर दिया है।

4. क्या सरकार खुदरा बाजार में प्याज बेचेगी?

सरकार सीमित बफर स्टॉक को खुदरा बाजार में उतारने पर विचार कर रही है, ताकि बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके।

5. प्याज की कीमत में राहत कब मिल सकती है?

बाजार की स्थिति के अनुसार अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में बफर स्टॉक की बिक्री बढ़ाकर उपभोक्ताओं को राहत देने का फैसला लिया जा सकता है।

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