उत्तर प्रदेश के आलू किसानों के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में तीन महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। इनका उद्देश्य आलू की कीमतों में गिरावट, शीतगृह में भंडारण की लागत और उन्नत बीज की बढ़ती कीमत से किसानों को राहत देना है। सरकार ने योजनाओं के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जिसके जरिए किसान आवेदन कर सकेंगे। खास बात यह है कि ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू उत्पादकों को उत्पादन से लेकर बिक्री और भंडारण तक आर्थिक राहत देने के लिए तीन योजनाएं शुरू की हैं। इनमें भाव स्थिरता सहायता, शीतगृह भंडारण शुल्क में राहत और गुणवत्तापूर्ण आलू बीज पर बिक्री मूल्य में छूट शामिल है। इन योजनाओं का संचालन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। किसान आवेदन, पात्रता और योजना से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक आलू योजना पोर्टल पर जा सकते हैं।
आलू की बंपर पैदावार के समय बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने ₹1,000 करोड़ के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की है। इसके लिए फिलहाल ₹100 करोड़ की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति आलू की उत्पादन लागत निर्धारित करेगी। इसके बाद निर्धारित उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत या उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर, इनमें जो राशि कम होगी, उसके आधार पर किसान को सहायता दी जाएगी।
कितना मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। योजना की निर्धारित अवधि 1 जनवरी से 15 अप्रैल और 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक रखी गई है। लाभ लेने के लिए क्रेता-विक्रेता सौदा प्रपत्र भी आवश्यक होगा। किसान मंडी, उपमंडी, शीतगृह परिसर या अपने खेत से आलू बेचने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत योजना का लाभ ले सकेंगे।
निजी शीतगृह में रखे आलू पर भी राहत:
आलू किसानों के लिए दूसरी बड़ी राहत शीतगृह भंडारण शुल्क से जुड़ी है। राज्य में बड़ी मात्रा में आलू निजी शीतगृहों में रखा जाता है। सरकार ने भंडारण प्रभार में राहत देने के लिए ₹1,000 करोड़ की योजना लागू की है, जिसके तहत ₹100 करोड़ की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है। इस योजना में किसानों को ₹100 प्रति क्विंटल की दर से सहायता दी जाएगी। हालांकि, एक किसान को अधिकतम ₹20,000 तक का लाभ मिलेगा। सरकार के अनुसार, इस योजना से 15 लाख से अधिक किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
उन्नत आलू बीज पर ₹1,000 प्रति क्विंटल तक छूट:
तीसरी योजना किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले और नई प्रजातियों के आलू बीज उपलब्ध कराने से संबंधित है। इसके लिए ₹5 करोड़ की बीज विक्रय दर छूट योजना लागू की गई है। विभागीय आधारीय आलू बीज खरीदने पर किसानों को अधिकतम ₹1,000 प्रति क्विंटल तक की छूट दी जाएगी। इससे किसानों की प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी। इस योजना से 15 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलने का अनुमान है।
किसानों को तीन स्तर पर मिलेगी आर्थिक राहत:
तीनों योजनाओं को मिलाकर सरकार ने आलू किसानों की प्रमुख समस्याओं कम बाजार भाव, शीतगृह का खर्च और गुणवत्तापूर्ण बीज की लागत—को संबोधित करने का प्रयास किया है। भाव स्थिरता योजना किसानों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में राहत देगी, जबकि शीतगृह सहायता से भंडारण लागत का बोझ कम होगा। वहीं, उन्नत बीज पर छूट किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज कम लागत में उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
किसान कैसे करें आवेदन?
आलू किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल potato.uphorticulture.in के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन से पहले किसान संबंधित योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, बिक्री संबंधी शर्तें और आवेदन की समयसीमा जरूर जांच लें।
FAQs:
1. उत्तर प्रदेश में आलू किसानों के लिए कितनी योजनाएं शुरू की गई हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में आलू किसानों के लिए तीन प्रमुख योजनाएं शुरू की हैं।
2. शीतगृह में आलू रखने पर कितनी सहायता मिलेगी?
किसानों को ₹100 प्रति क्विंटल की दर से सहायता मिलेगी, जबकि अधिकतम लाभ ₹20,000 प्रति किसान निर्धारित है।
3. आलू बीज पर कितनी छूट मिलेगी?
विभागीय आधारीय आलू बीज खरीदने पर अधिकतम ₹1,000 प्रति क्विंटल तक छूट मिल सकती है।
4. आलू योजना के लिए आवेदन कैसे करना होगा?
किसानों को ऑनलाइन पोर्टल potato.uphorticulture.in के माध्यम से आवेदन करना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
5. भाव स्थिरता योजना में कितने क्षेत्र तक लाभ मिलेगा?
एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक योजना का लाभ दिया जाएगा।