धान की खेती में बेहतर उत्पादन, उच्च गुणवत्ता और रोगों से सुरक्षा किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) द्वारा विकसित पूसा राइस हाइब्रिड 10 और पूसा बासमती 1637 किसानों के लिए उपयोगी उन्नत किस्मों के रूप में जानी जाती हैं। एक ओर पूसा राइस हाइब्रिड 10 खुशबूदार और बारीक दाने वाली हाइब्रिड किस्म है, वहीं पूसा बासमती 1637 को ब्लास्ट रोग के प्रति बेहतर प्रतिरोध के लिए विकसित किया गया है।
पूसा राइस हाइब्रिड 10 को भारतीय धान अनुसंधान में महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया जाता है। वर्ष 2001 में केंद्रीय किस्म विमोचन समिति (CVRC) ने इसे हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के सिंचित क्षेत्रों में व्यावसायिक खेती के लिए मंजूरी दी थी। इस किस्म की प्रमुख विशेषता इसका बारीक और सुगंधित दाना है। वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड धान की अधिक उत्पादन क्षमता को लंबे, पतले और खुशबूदार दानों की गुणवत्ता के साथ जोड़कर इसे विकसित किया।
पूसा राइस हाइब्रिड 10 की अवधि लगभग 110 से 115 दिन बताई जाती है और अनुकूल परिस्थितियों में इसकी उपज क्षमता करीब 7 टन प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। कम अवधि में तैयार होने के कारण किसानों को खेत खाली करने और अगली फसल की तैयारी के लिए अपेक्षाकृत अधिक समय मिल सकता है। इसके बारीक और सुगंधित दाने बाजार में बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की मांग को पूरा करने में भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, वास्तविक उत्पादन मिट्टी, मौसम, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और खेती की तकनीक पर निर्भर करता है।
पूसा बासमती 1637 बासमती धान की ऐसी उन्नत किस्म है, जिसे ब्लास्ट रोग के प्रति बेहतर प्रतिरोध को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यह पूसा बासमती 1 की उन्नत किस्म के रूप में विकसित की गई है। इसमें Pi9 जीन को मार्कर-असिस्टेड सिलेक्शन (MAS) तकनीक की मदद से शामिल किया गया है। यह जीन धान में लीफ ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोध प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ब्लास्ट रोग की समस्या वाले क्षेत्रों में यह विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। हालांकि, रोग प्रबंधन के लिए खेत की नियमित निगरानी और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना भी जरूरी है।
4.2 टन प्रति हेक्टेयर तक औसत उपज:
पूसा बासमती 1637 की औसत उपज करीब 4.2 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है और यह लगभग 130 दिनों में पककर तैयार होती है। इसके चावल के दाने लंबे और पतले होते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कच्चे चावल के दाने की लंबाई लगभग 7.3 मिलीमीटर और पकने के बाद करीब 13.8 मिलीमीटर तक हो सकती है। इसमें बासमती चावल की विशिष्ट सुगंध भी पाई जाती है, जो इसे प्रीमियम बाजार के लिए उपयुक्त बनाती है।
दोनों किस्मों में क्या है खास?
सही किस्म का चुनाव क्यों जरूरी?
धान की किस्म का चयन केवल उपज क्षमता देखकर नहीं करना चाहिए। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधा, फसल अवधि, रोग की समस्या और स्थानीय बाजार की मांग को ध्यान में रखना चाहिए। पूसा राइस हाइब्रिड 10 और पूसा बासमती 1637 जैसी उन्नत किस्मों के साथ यदि किसान प्रमाणित बीज, संतुलित पोषण, उचित सिंचाई और समय पर कीट-रोग प्रबंधन अपनाते हैं, तो उत्पादन की गुणवत्ता और खेती की आर्थिक दक्षता में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
(FAQs):
1. पूसा राइस हाइब्रिड 10 कितने दिनों में तैयार होती है?
पूसा राइस हाइब्रिड 10 लगभग 110 से 115 दिनों में पककर तैयार हो सकती है। वास्तविक अवधि मौसम और खेती की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
2. पूसा राइस हाइब्रिड 10 की उपज कितनी हो सकती है?
अनुकूल परिस्थितियों में इसकी उपज क्षमता करीब 7 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई जाती है। वास्तविक उपज खेत की स्थिति और प्रबंधन पर निर्भर करती है।
3. पूसा बासमती 1637 किस रोग के लिए उपयोगी है?
पूसा बासमती 1637 को धान के ब्लास्ट रोग के प्रति बेहतर प्रतिरोध को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें Pi9 जीन शामिल किया गया है।
4. पूसा बासमती 1637 की औसत उपज कितनी है?
इसकी औसत उपज करीब 4.2 टन प्रति हेक्टेयर बताई जाती है और यह लगभग 130 दिनों में तैयार होती है।
5. किसानों को पूसा राइस हाइब्रिड 10 या पूसा बासमती 1637 में से कौन सी किस्म चुननी चाहिए?
इसका फैसला खेत की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधा, फसल अवधि, रोग की स्थिति और स्थानीय बाजार की मांग को देखकर करना चाहिए। बड़े स्तर पर खेती से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।