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MP में मूंग खरीदी ने पकड़ी रफ्तार, 3.5 लाख टन खरीद पूरी; कम बारिश के बीच किसानों के लिए सरकार का बड़ा प्लान

मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी जारी, कम बारिश से सरकार की बढ़ी नजर
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी जारी, कम बारिश से सरकार की बढ़ी नजर

राज्य में अब तक करीब 3.5 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद पूरी हो चुकी है, जबकि केंद्र सरकार ने 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। दूसरी ओर, 1 जून से 10 अगस्त 2026 के बीच प्रदेश में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार ने किसानों को कम सिंचाई वाली फसलों को प्राथमिकता देने, खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और फसल नुकसान की स्थिति में त्वरित सर्वे व राहत व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

मूंग खरीदी का लक्ष्य 4.54 लाख टन:

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से मध्य प्रदेश के लिए 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मुकाबले राज्य में खरीदी का कार्य लगातार जारी है। मूंग बिक्री के लिए प्रदेश में करीब 3.47 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 3.42 लाख किसानों का सत्यापन पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए और लंबित मामलों का तेजी से निराकरण किया जाए।

गुणवत्ता या कालाबाजारी की शिकायत पर तुरंत एक्शन:

मुख्यमंत्री ने अब तक हुई मूंग खरीदी में सामने आने वाली गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी किसी प्रकार की गड़बड़ी या अड़चन सामने आए, वहां विशेष टीम गठित कर समस्या का तत्काल समाधान किया जाए। इसके साथ ही कालाबाजारी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने और किसानों तथा किसान संगठनों के साथ संबंधित विभागों को नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

प्रदेश में सामान्य से 15% कम बारिश:

बैठक में प्रदेश में मानसून की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, 1 जून से 10 अगस्त 2026 के बीच मध्य प्रदेश में सामान्य 571 मिमी बारिश के मुकाबले करीब 483 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम है। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में करीब 513.20 मिमी, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगभग 459.80 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है। प्रदेश की दीर्घकालिक औसत वार्षिक वर्षा करीब 949.50 मिमी बताई गई है।

धान की 84% बोवनी पूरी:

कम बारिश के बावजूद प्रदेश में खरीफ फसलों की बोवनी जारी है। बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक धान की करीब 84 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्षा की स्थिति और उपलब्ध जल संसाधनों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि किसानों को मौसम और पानी की स्थिति के अनुसार समय पर आवश्यक सलाह दी जा सके। कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए आगामी रबी सीजन के लिए अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। किसानों को ऐसी फसलों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिनमें अपेक्षाकृत कम सिंचाई की जरूरत होती है। 

खाद, बीज और बिजली की उपलब्धता पर भी फोकस:

किसानों को आगामी फसल सीजन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। सिंचाई के दौरान किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए भी आवश्यक व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिक से अधिक किसानों को फसल बीमा योजना से जोड़ने और बारिश के बाद सड़कों के रखरखाव का काम सुचारू रूप से करने पर भी जोर दिया गया।

फसल नुकसान का पारदर्शी सर्वे और राहत पर जोर:

अतिवृष्टि या जलभराव से फसलों को नुकसान होने की स्थिति में राजस्व विभाग की टीमों को पारदर्शी तरीके से सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित किसानों को नियमानुसार आपदा राहत कोष से सहायता दिलाने की प्रक्रिया पर भी ध्यान देने को कहा गया है। यह भी निर्देश दिया कि वर्षा के कारण होने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए प्रत्येक जिले में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

FAQs:

1. मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी का लक्ष्य कितना है?

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है।

2. मध्य प्रदेश में अब तक कितनी मूंग खरीदी हुई है?

प्रदेश में अब तक करीब 3.5 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद पूरी हो चुकी है।

3. मध्य प्रदेश में बारिश कितनी कम हुई है?

1 जून से (10 अगस्त, 2026) के बीच प्रदेश में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

4. कम बारिश में किसानों को क्या सलाह दी गई है?

किसानों को कम सिंचाई की जरूरत वाली फसलों को प्राथमिकता देने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की सलाह दी गई है।

5. फसल खराब होने पर किसानों को क्या मिलेगा?

फसल नुकसान की स्थिति में पारदर्शी सर्वे के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार आपदा राहत कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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