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UP Kharif Season 2026: धान समेत खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए बड़े निर्देश: कम वर्षा वाले जिलों में विशेष व्यवस्था

उत्तर प्रदेश खरीफ सीजन 2026
उत्तर प्रदेश खरीफ सीजन 2026

खरीफ सीजन के दौरान कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों के हितों की रक्षा और फसलों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मौसम विज्ञान विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर मानसून की स्थिति, वर्षा के पूर्वानुमान, खरीफ फसलों की प्रगति तथा सिंचाई व्यवस्थाओं का विस्तृत आकलन किया।

राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय पर सिंचाई, पर्याप्त जल उपलब्धता और आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन सुनिश्चित करना है। निर्देश दिए कि जिन जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां विशेष निगरानी रखते हुए सिंचाई विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि धान सहित खरीफ की अन्य फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

17-18 जुलाई के बाद मानसून के फिर सक्रिय होने के संकेत:

मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि आगामी कुछ दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। हालांकि 17-18 जुलाई के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। मौसम से जुड़ी प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी तत्काल कृषि विभाग और जिला प्रशासन तक पहुंचाई जाए, ताकि किसानों को समय रहते आवश्यक सलाह और कृषि परामर्श उपलब्ध कराया जा सके।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में नहरों और पंप कैनाल से होगी सिंचाई:

कृषि मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी है, वहां नहरों, पंप कैनालों तथा अन्य उपलब्ध सिंचाई स्रोतों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया कि नहरों का संचालन प्रभावी ढंग से किया जाए और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आने दी जाए।

खरीफ फसलों की निगरानी के लिए अधिकारी रहेंगे मैदान में:

बैठक में खरीफ अभियान-2026 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों में धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई और रोपाई में तेजी लाई जाए। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से खेतों का दौरा करने तथा किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन और मौसम के अनुसार आवश्यक सलाह देने के निर्देश दिए। साथ ही किसी क्षेत्र में वर्षा सामान्य से कम रहती है तो वहां किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने और वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन के बारे में समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।

मनरेगा के माध्यम से बढ़ेंगे जल संरक्षण कार्य:

भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत खेत तालाब, मेड़बंदी और जल संरक्षण संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सिंचाई क्षमता बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को जलवायु संबंधी चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बनाना है।

FAQs:

Q1. उत्तर प्रदेश सरकार ने कम वर्षा को लेकर क्या तैयारी की है?
उत्तर: सरकार ने सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने, नहरों का संचालन बढ़ाने और किसानों को समय पर तकनीकी सलाह देने के निर्देश दिए हैं।

Q2. 17-18 जुलाई के बाद मौसम को लेकर क्या संभावना है?
उत्तर: मौसम विभाग के अनुसार 17-18 जुलाई के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून दोबारा सक्रिय होने के संकेत हैं।

Q3. कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को कैसे मदद मिलेगी?
उत्तर: नहरों, पंप कैनालों और अन्य सिंचाई स्रोतों से पानी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि खरीफ फसलों को नुकसान न हो।

Q4. कृषि अधिकारियों को क्या जिम्मेदारी दी गई है?
उत्तर: अधिकारियों को खेतों का नियमित दौरा कर किसानों को फसल प्रबंधन, मौसम आधारित सलाह और वैकल्पिक खेती की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

Q5. जल संरक्षण के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
उत्तर: मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत खेत तालाब, मेड़बंदी और जल संरक्षण कार्यों को तेज किया जा रहा है ताकि भविष्य में सिंचाई क्षमता बढ़ाई जा सके।

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