भारत खाद्य तेल और दलहन की बढ़ती घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आधुनिक कृषि सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने 2030-31 तक तिलहन उत्पादन को 6.97 करोड़ टन और दलहन उत्पादन को 3.50 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उन्नत बीज, मुफ्त बीज वितरण, वैज्ञानिक खेती, फसल प्रदर्शन, भंडारण और बाजार से जुड़ी सुविधाओं को एक साथ मजबूत किया जा रहा है।
देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर बनाए गए हैं, जबकि दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत तूर, उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दालों के उत्पादन और सुनिश्चित खरीद पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (NMEO-OS) को 3 अक्टूबर 2024 को मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना है। मिशन के तहत प्राथमिक तिलहन उत्पादन को वर्ष 2022-23 के 390 लाख टन से बढ़ाकर वर्ष 2030-31 तक 697 लाख टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसानों को उन्नत किस्मों के बीज, वैज्ञानिक खेती की जानकारी, प्रदर्शन कार्यक्रम और फसल कटाई के बाद की सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
NMEO-OS को क्लस्टर आधारित मॉडल के माध्यम से लागू किया जा रहा है। देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर संचालित किए जा चुके हैं। इनका प्रबंधन किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), सहकारी समितियों और अन्य वैल्यू चेन भागीदारों के माध्यम से किया जा रहा है। इन क्लस्टरों में किसानों को उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही किसानों को वैज्ञानिक खेती और बेहतर कृषि प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
वर्ष 2025-26 के दौरान वैल्यू चेन क्लस्टरों में 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मुफ्त बीज वितरण के दायरे में लाया गया। वहीं खरीफ 2026 में अब तक 4.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मुफ्त बीज उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा नई जारी की गई उन्नत किस्मों के ब्रीडर सीड उत्पादन के लिए 60 सीड हब और 50 विशेष बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इससे गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और भंडारण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (FLD), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (CFLD) और ब्लॉक स्तर के प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को नई उच्च उत्पादक किस्मों, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और बेहतर फसल प्रबंधन तकनीकों से परिचित कराना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तिलहन उत्पादन 2022-23 में 413.55 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 430.59 लाख टन हो गया है। यह आंकड़ा 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान पर आधारित है।
खाद्य तेल की घरेलू उपलब्धता बढ़ी, आयात में आई कमी:
तिलहन उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों का असर खाद्य तेल की घरेलू उपलब्धता पर भी दिखाई दे रहा है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अंतर्गत चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय के अनुसार, घरेलू खाद्य तेल की उपलब्धता 2022-23 में 124.23 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 126.30 लाख टन हो गई। इसी अवधि में खाद्य तेलों का आयात 165 लाख टन से घटकर 160.72 लाख टन रह गया। सरकार का प्रयास है कि घरेलू उत्पादन को और बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को लगातार कम किया जाए।
दालों के उत्पादन को 3.5 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य:
दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 11 अक्टूबर 2025 को 'दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन' शुरू किया। इस मिशन के तहत दलहन उत्पादन को वर्ष 2023-24 के 242 लाख टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है। मिशन के तहत किसानों को उच्च उत्पादक और जलवायु-अनुकूल किस्मों के प्रमाणित बीज, बीज उत्पादन, बीज किट, आधुनिक फसल तकनीक और क्षमता निर्माण से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
तूर, उड़द और मसूर की MSP पर सुनिश्चित खरीद:
किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मिशन के तहत तूर, उड़द और मसूर की खरीद को भी समर्थन दिया जा रहा है। पंजीकृत और इच्छुक किसानों से इन दलहनों की सुनिश्चित खरीद NAFED और NCCF के माध्यम से प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत की जाती है। राज्यों की मांग के आधार पर खरीद की व्यवस्था की जाती है। इससे किसानों को बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम से राहत देने और दलहन उत्पादन के प्रति उनका भरोसा बढ़ाने में मदद मिलती है।
2025-26 में लाखों हेक्टेयर में हुए फसल प्रदर्शन:
दलहन मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में आधुनिक फसल उत्पादन एवं संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 4.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शन आयोजित किए गए। इसी अवधि में 4.33 लाख क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज का उत्पादन, 3.10 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण और किसानों को 9.25 लाख बीज किट मुफ्त वितरित किए गए। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को बेहतर बीज और वैज्ञानिक तकनीक उपलब्ध कराकर प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना है।
दलहन उत्पादन बढ़ा, आयात में भी आई गिरावट:
सरकारी तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में दलहन उत्पादन 2023-24 के 242.46 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख टन हो गया। इसी अवधि में दलहन आयात भी 2024-25 के 72.56 लाख टन से घटकर 2025-26 में 59.64 लाख टन रह गया। घरेलू उत्पादन और उपलब्धता में सुधार को आयात में आई इस कमी का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
FAQs:
1. भारत ने 2030-31 तक तिलहन उत्पादन का कितना लक्ष्य रखा है?
केंद्र सरकार ने 2030-31 तक तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर 6.97 करोड़ टन यानी 697 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है।
2. 2030-31 तक दलहन उत्पादन का लक्ष्य कितना है?
सरकार ने दलहन उत्पादन को 2023-24 के 242 लाख टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 3.50 करोड़ टन यानी 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है।
3. राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (NMEO-OS) क्या है?
राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (NMEO-OS) घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने की सरकारी पहल है। इसे 3 अक्टूबर 2024 को मंजूरी दी गई थी।
4. भारत में दलहन उत्पादन कितना बढ़ा है?
तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार दलहन उत्पादन 2023-24 में 242.46 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख टन हो गया।