किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज अनुदान योजना किसानों को सस्ती दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारतीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज (ISEC) द्वारा देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में स्वतंत्र अध्ययन कराया गया।
अध्ययन के अनुसार, KCC-MISS के तहत किया गया प्रत्येक ₹1 का निवेश कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में ₹2.30 का शुद्ध मूल्य संवर्धन (Net Value Addition) उत्पन्न करता है। रिपोर्ट में योजना को किसानों की आय, कृषि निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली प्रभावी पहल बताया गया है। अध्ययन के अनुसार, योजना लागू होने से लेकर वर्ष 2024-25 तक किसानों को ब्याज राहत उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगभग ₹1.87 लाख करोड़ की ब्याज सब्सिडी प्रदान की गई।
योजना के तहत पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध होने से किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि आदानों का समय पर उपयोग करने में सुविधा मिली। अध्ययन में यह भी पाया गया कि समय पर ऋण चुकाने पर मिलने वाला लाभ लेने वाले किसानों में बेहतर ऋण अनुशासन देखने को मिला, जिससे बैंकों का भरोसा बढ़ा और भविष्य में ऋण उपलब्ध कराना आसान हुआ।
KCC-MISS ने केवल फसल उत्पादन तक ही सीमित न रहकर डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने में मदद मिली और केवल मौसमी खेती पर निर्भरता कम हुई। विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fisheries) के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।
कृषि ऋण वितरण को अधिक पारदर्शी, तेज और आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं। इनमें किसान ऋण पोर्टल (Kisan Rin Portal), जन समर्थ पोर्टल (Jan Samarth Portal), ई-केसीसी (e-KCC) और KRISHIKA जैसे डिजिटल समाधान शामिल हैं। इनका उद्देश्य किसानों, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों, को संस्थागत ऋण तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।
किसानों को अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2025 से किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बिना गारंटी मिलने वाली ऋण सीमा ₹1.60 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी है। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष बैंकों के लिए कृषि ऋण लक्ष्य और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं, ताकि कृषि क्षेत्र में पर्याप्त वित्तीय प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
जागरूकता अभियान से बढ़ रहा योजना का दायरा:
योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड (NABARD), राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) तथा विभिन्न बैंक नियमित रूप से जागरूकता अभियान, सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) कार्यक्रम और किसान संपर्क गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसान क्रेडिट कार्ड योजना की पहुंच बढ़ाना और किसानों को सस्ती एवं समय पर संस्थागत ऋण सुविधा उपलब्ध कराना है.
कृषि निवेश और आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल:
विशेषज्ञों का मानना है कि KCC-MISS किसानों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि निवेश, उत्पादकता, फसल विविधीकरण और संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डिजिटल ऋण प्रणाली, बढ़ी हुई ऋण सीमा और ब्याज सहायता जैसे कदम भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ एवं प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक साबित हो सकते हैं।
FAQs:
Q1. KCC-MISS क्या है?
उत्तर: KCC-MISS (किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज अनुदान योजना) किसानों को कम ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने वाली केंद्र सरकार की योजना है।
Q2. KCC-MISS के तहत ₹1 के निवेश पर कितना लाभ मिलता है?
उत्तर: ISEC के अध्ययन के अनुसार, योजना के तहत प्रत्येक ₹1 के निवेश पर लगभग ₹2.30 का शुद्ध मूल्य संवर्धन होता है।
Q3. बिना गारंटी किसान क्रेडिट कार्ड ऋण सीमा कितनी है?
उत्तर: 1 जनवरी 2025 से बिना गारंटी ऋण सीमा बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है।
Q4. KCC-MISS का लाभ किन गतिविधियों के लिए मिलता है?
उत्तर: फसल उत्पादन के अलावा डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी कृषि संबद्ध गतिविधियों के लिए भी योजना का लाभ मिलता है।
Q5. कृषि ऋण के लिए कौन-कौन से डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं?
उत्तर: किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, e-KCC और KRISHIKA जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को आसान और तेज कृषि ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं।