खरीफ सीजन में बारिश, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि और कीट-रोग जैसी समस्याओं से फसलों को नुकसान होने का जोखिम बना रहता है। ऐसे में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसल बीमा कराना महत्वपूर्ण हो जाता है। उत्तर प्रदेश में खरीफ फसलों के लिए बीमा और प्रीमियम जमा करने की समय सीमा बढ़ाई गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी फसल का बीमा करा लें।
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों के लिए बीमा प्रक्रिया की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, गैर-ऋणी किसानों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 14 अगस्त 2026 बताई गई है। किसानों को अपनी श्रेणी और संबंधित फसल के अनुसार लागू समय सीमा की पुष्टि कर समय पर बीमा प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और अन्य निर्धारित जोखिमों से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में पात्र किसानों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। खरीफ सीजन में अधिक बारिश, कम बारिश, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, चक्रवात, प्राकृतिक आग, कीट और रोग जैसी परिस्थितियां फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र जोखिमों के कारण होने वाले नुकसान पर किसानों को बीमा लाभ मिल सकता है।
फसल बीमा का दायरा केवल खेत में खड़ी फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है। कुछ निर्धारित परिस्थितियों में Prevented Sowing (बुवाई न हो पाना) का जोखिम भी योजना के तहत कवर किया जा सकता है। यदि प्रतिकूल मौसम या अपर्याप्त वर्षा जैसी परिस्थितियों के कारण किसान निर्धारित फसल की बुवाई नहीं कर पाता है, तो योजना के नियमों के अनुसार बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकता है।
फसल कटाई के बाद खेत में रखी उपज को भी कुछ निर्धारित परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा मिल सकती है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक खेत में रखी फसल को चक्रवात और बेमौसम बारिश जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान के लिए कवर किया जा सकता है। इस प्रावधान से किसानों को कटाई के बाद अचानक होने वाली प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाले नुकसान से आर्थिक राहत मिल सकती है।
फसल बर्बाद हुई? 72 घंटे के अंदर करें ये जरूरी काम:
बीमित फसल को प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर किसान के लिए समय पर सूचना देना बेहद जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी, Crop Insurance App, हेल्पलाइन 14447 या कृषि विभाग को दी जानी चाहिए। समय पर सूचना मिलने से फसल नुकसान से संबंधित प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए किसान नुकसान होने की स्थिति में सूचना देने में देरी न करें।
किसान अंतिम तारीख का इंतजार न करें:
खरीफ फसलों को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए किसानों के लिए समय पर फसल बीमा कराना महत्वपूर्ण है। खासकर बारिश, बाढ़, जलभराव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका को देखते हुए किसान अपनी पात्रता और फसल के अनुसार बीमा प्रक्रिया समय रहते पूरी करें।
FAQs:
1. उत्तर प्रदेश में खरीफ फसल बीमा की अंतिम तारीख क्या है?
उत्तर प्रदेश में खरीफ फसलों के लिए बीमा और प्रीमियम जमा करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 बताई गई है।
2. गैर-ऋणी किसानों के लिए अंतिम तारीख क्या थी?
गैर-ऋणी किसानों के नामांकन की अंतिम तारीख 14 अगस्त 2026 बताई गई है।
3. फसल खराब होने पर कितने घंटे में सूचना देनी चाहिए?
प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होने पर किसान को सामान्यतः 72 घंटे के भीतर सूचना देनी चाहिए।
4. क्या कटाई के बाद भी फसल बीमा कवर मिलता है?
हां, निर्धारित परिस्थितियों में कटाई के बाद खेत में रखी फसल को अधिकतम 14 दिनों तक कुछ जोखिमों के लिए कवर मिल सकता है।
5. फसल बीमा में कौन-कौन से जोखिम शामिल हो सकते हैं?
योजना के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, बारिश, चक्रवात, कीट और रोग सहित कई जोखिमों से होने वाले नुकसान को कवर किया जा सकता है।