बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती खेती लागत के बीच महाराष्ट्र के सब्जी किसानों के लिए राहत की खबर है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी और महाराष्ट्र राज्य बीज निगम लिमिटेड (महाबीज) ने जलवायु-अनुकूल और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली सब्जी किस्मों एवं हाइब्रिड बीजों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने की पहल की है। खासकर विदर्भ जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में ऐसी किस्में किसानों की उत्पादन लागत और मौसम से जुड़े जोखिम को कम करने में मददगार हो सकती हैं।
IIVR के प्रभारी निदेशक डॉ. अनंत बहादुर ने संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 60 से अधिक उन्नत सब्जी किस्में विकसित की जा चुकी हैं। इन किस्मों को देश के अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। संस्थान अब उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा, कम रासायनिक उपयोग और सुरक्षित सब्जी उत्पादन पर भी ध्यान दे रहा है। इसके लिए जीनोम एडिटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी शोध किया जा रहा है।
महाराष्ट्र में किसान टमाटर, मिर्च, बैंगन, प्याज और विभिन्न पत्तेदार सब्जियों की बड़े स्तर पर खेती करते हैं। इनमें से कई फसलों को घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार से भी अच्छा मूल्य मिलता है। हालांकि, कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल, बढ़ती लागत और फसल में रासायनिक अवशेषों की समस्या किसानों के लिए चुनौती बन रही है। इसका असर मिट्टी की सेहत, जल संसाधनों और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और लंबे समय तक सूखे जैसी परिस्थितियां सब्जी उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के किसानों के लिए ऐसी किस्मों की जरूरत बढ़ गई है जो गर्मी सहन कर सकें, कम पानी में अच्छी उपज दें और प्रमुख रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों।
महाबीज ने विशेष रूप से विदर्भ जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्मों की आवश्यकता पर जोर दिया है। ऐसी किस्में किसानों को सिंचाई पर निर्भरता और उत्पादन जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं। महाबीज राज्य की प्रमुख सरकारी बीज संस्थाओं में शामिल है और 40,000 से अधिक किसानों के साथ बीज उत्पादन एवं वितरण से जुड़ा है।
किसानों तक पहुंचेगी जलवायु-अनुकूल तकनीक:
महाबीज ने IIVR के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर महाराष्ट्र की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त जलवायु-अनुकूल, पोषण-समृद्ध और कम रसायन वाली सब्जी किस्मों को अपनी सीड चेन के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य केवल नई किस्मों को विकसित करना नहीं, बल्कि अनुसंधान संस्थानों की तकनीक को खेत तक पहुंचाकर किसानों को व्यावहारिक लाभ देना है।
FAQs:
1. IIVR ने कितनी सब्जी किस्में विकसित की हैं?
IIVR ने अब तक 60 से अधिक उन्नत सब्जी किस्में विकसित की हैं।
2. जलवायु-अनुकूल सब्जी किस्में क्या होती हैं?
ऐसी किस्में जो गर्मी, कम पानी, अनियमित मौसम या प्रमुख रोगों जैसी परिस्थितियों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकें, उन्हें जलवायु-अनुकूल किस्में कहा जाता है।
3. विदर्भ के किसानों को इन किस्मों से क्या फायदा होगा?
कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्में सिंचाई लागत और मौसम से जुड़े उत्पादन जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
4. महाराष्ट्र में किन सब्जियों की बड़े स्तर पर खेती होती है?
महाराष्ट्र में टमाटर, मिर्च, बैंगन, प्याज और विभिन्न पत्तेदार सब्जियों की बड़े पैमाने पर खेती होती है।
5. महाबीज की इस पहल में क्या भूमिका है?
महाबीज IIVR के साथ मिलकर महाराष्ट्र की कृषि परिस्थितियों के लिए उपयुक्त सब्जी किस्मों और हाइब्रिड बीजों को अपनी सीड चेन के जरिए किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगा।