मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन से जुड़ी दो अहम जानकारियां सामने आई हैं। समर्थन मूल्य (MSP) पर धान, ज्वार और बाजरा बेचने के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से शुरू होगा, जबकि सीहोर जिले में कृषि विभाग ने सोयाबीन फसल में बढ़ रही रोग की आशंका को देखते हुए किसानों को समय पर फसल निरीक्षण और अनुशंसित फफूंदनाशकों के उपयोग की सलाह दी है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे पंजीयन की अंतिम तारीख और फसल सुरक्षा संबंधी कृषि सलाह को ध्यान में रखते हुए समय पर कार्रवाई करें।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 15 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित अवधि के भीतर अपना पंजीयन अवश्य पूरा कराएं, ताकि समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का लाभ प्राप्त कर सकें। पंजीयन, उपार्जन और भुगतान से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
कंट्रोल रूम में किसानों से प्राप्त शिकायतों और आवेदनों को दर्ज कर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उनका जल्द से जल्द निराकरण किया जा सके। इसके अलावा बारिश और प्राकृतिक आपदा से संबंधित जानकारी को तत्काल संबंधित विभागों और उपार्जन केंद्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण किसानों को होने वाली समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
सोयाबीन किसानों को रोग नियंत्रण की सलाह:
सीहोर जिले में सोयाबीन की फसल इस समय फलन और फली बनने की अवस्था में है। इस चरण में लगातार बारिश, अधिक नमी और अनुकूल मौसम परिस्थितियों के कारण कुछ फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार उपयुक्त फफूंदनाशक का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
चारकोल रॉट से सावधान:
चारकोल रॉट के प्रकोप में सोयाबीन की पत्तियां छोटी और पीली पड़ सकती हैं तथा बाद में पौधे भूरे दिखाई देने लगते हैं। रोग की स्थिति में कृषि विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित फफूंदनाशक का निर्धारित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी गई है।
कॉलर रॉट और गर्दन सड़न पर रखें नजर:
गर्म और नम वातावरण में कॉलर रॉट तथा अन्य सड़न संबंधी रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। संक्रमित पौधों में तने के निचले हिस्से में सड़न, विल्ट और बाद में पौधों के मुरझाने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि रोग की पहचान होने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार ही फफूंदनाशक का चयन और उपयोग करें।
पॉड ब्लाइट में लगातार बारिश बन सकती है वजह:
सोयाबीन में पॉड ब्लाइट का खतरा लगातार बारिश और अत्यधिक नमी की स्थिति में बढ़ सकता है। यह फफूंदजनित रोग बीज और मिट्टी से भी जुड़ा हो सकता है। किसानों को फसल की फलियों और पौधों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित टेब्यूकोनाजोल आधारित या अन्य स्वीकृत फफूंदनाशक का निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
Rhizoctonia Aerial Blight की भी निगरानी जरूरी:
गर्म और नम परिस्थितियों में Rhizoctonia Aerial Blight का प्रकोप भी बढ़ सकता है। इसमें पत्तियों की निचली सतह पर भूरे या लाल-भूरे अंडाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर किसान फसल को तुरंत जांचें और किसी भी दवा का छिड़काव कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा, उत्पाद के लेबल और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करें।
किसानों के लिए दो जरूरी काम:
खरीफ सीजन में किसानों को एक साथ बाजार और फसल सुरक्षा दोनों पर ध्यान देने की जरूरत है। धान, ज्वार और बाजरा उत्पादक किसान 15 सितंबर से 10 अक्टूबर तक MSP पंजीयन जरूर कराएं। वहीं सोयाबीन किसान खेत में रोग के शुरुआती लक्षणों की लगातार निगरानी करें और समस्या दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लें।
FAQs:
1.मध्य प्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा के MSP पंजीयन कब शुरू होंगे?
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान, ज्वार और बाजरा की MSP पर बिक्री हेतु किसान पंजीयन 15 सितंबर 2026 से शुरू होगा।
2. MSP पंजीयन की अंतिम तारीख क्या है?
धान, ज्वार और बाजरा के लिए MSP पंजीयन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 है। किसानों को निर्धारित अवधि के भीतर पंजीयन पूरा कराने की सलाह दी गई है।
3.MSP पंजीयन किन फसलों के लिए होगा?
मध्य प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर उपार्जन हेतु धान, ज्वार और बाजरा के लिए किसान पंजीयन किया जाएगा।