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प्राकृतिक खेती से किसानों की बढ़ेगी कमाई! 24 लाख किसान जुड़े, 2030 तक 85 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य
2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य

भारत में प्राकृतिक खेती अब सिर्फ खेती का वैकल्पिक तरीका नहीं रह गई है, बल्कि इसे कम लागत, बेहतर आय और बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। देश में 24 लाख से अधिक किसान पहले ही प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और वर्ष 2030 तक यह संख्या 85 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार अब प्रमाणन, मृदा स्वास्थ्य, एफपीओ, मॉडल फार्म और बाजार संपर्क को मजबूत कर किसानों को घरेलू के साथ-साथ वैश्विक प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग का लाभ दिलाने पर जोर दे रही है। 

24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े:

समीक्षा बैठक में बताया गया कि देशभर में अब तक 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का फोकस अब केवल किसानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और बाजार से जुड़ी कृषि प्रणाली के रूप में विकसित करने पर भी है।

वैश्विक बाजार की मांग किसानों के लिए नया अवसर:

दुनिया में प्राकृतिक और कम-रसायन वाले कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से भारतीय किसानों के लिए नए बाजारों की संभावनाएं बन रही हैं। समीक्षा में प्राकृतिक खेती के उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, विपणन और निर्यात पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। मजबूत वैल्यू चेन तैयार होने से प्राकृतिक खेती के उत्पादों को बेहतर बाजार और किसानों को अधिक लाभकारी मूल्य दिलाने में मदद मिल सकती है।

मृदा स्वास्थ्य के आंकड़ों पर बढ़ेगा फोकस:

प्राकृतिक खेती के प्रभाव को वैज्ञानिक तरीके से समझने के लिए मृदा स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना गया है। बैठक में Soil Health Card कार्यक्रम के तहत मृदा नमूना संग्रह, परीक्षण और कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा की गई। निर्देश दिए गए कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के खेतों की मृदा स्थिति का नियमित आकलन किया जाए और इन आंकड़ों को भविष्य की कृषि योजनाओं तथा पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी सलाह में उपयोग किया जाए।

80 हजार से अधिक किसानों का प्राकृतिक खेती प्रमाणन:

PGS-India Natural Certification System के तहत अब तक 80,034 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा प्रमाणन व्यवस्था से जुड़े एफपीओ में 100 प्राकृतिक खेती आधारित एफपीओ, 162 जैविक खेती आधारित एफपीओ, कुल 262 एफपीओ शामिल हैं। सरकार प्रमाणन प्रक्रिया को मजबूत करने के साथ एफपीओ के माध्यम से प्राकृतिक खेती के उत्पादों की बिक्री और किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

नमामि गंगे क्षेत्र में 97 हजार से अधिक किसान जुड़े:

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी समीक्षा की गई। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 45 जिलों में 777 क्लस्टरों के माध्यम से 97,125 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है। इस पहल के तहत लगभग 38,850 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है। किसानों के प्रशिक्षण और सफल मॉडलों को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मॉडल फार्म से किसानों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण:

प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों को किसानों तक पहुंचाने के लिए मॉडल फार्म और फील्ड विजिट को महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है। कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों के लिए नियमित अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाएं, ताकि वे सफल प्राकृतिक खेती मॉडल को खेत पर देखकर उसकी तकनीक और परिणामों को समझ सकें। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के मॉडल फार्मों को प्रशिक्षण और ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

कृषि शिक्षा में प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा:

कृषि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में प्राकृतिक खेती को कृषि शिक्षा का अधिक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इससे भविष्य के कृषि विशेषज्ञ किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ी तकनीकों और अवसरों के बारे में बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे।

किसानों के लिए क्या बदलेगा?

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति अब केवल खेती की पद्धति बदलने तक सीमित नहीं है। इसका फोकस कम लागत, बेहतर उत्पादकता, प्रमाणित उत्पाद, मजबूत बाजार संपर्क और किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर है। यदि मॉडल फार्म, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रमाणन, एफपीओ और बाजार व्यवस्था को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो प्राकृतिक खेती किसानों के लिए घरेलू बाजार के साथ-साथ तेजी से बढ़ते वैश्विक प्राकृतिक उत्पाद बाजार में भी नई संभावनाएं खोल सकती है।

FAQs:

1. भारत में कितने किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं?
देश में अब तक 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।

2. 2030 तक प्राकृतिक खेती का क्या लक्ष्य है?
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना है।

3. प्राकृतिक खेती में प्रमाणन क्यों जरूरी है?
प्रमाणन से प्राकृतिक खेती के उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ती है और किसानों को बेहतर बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

4. नमामि गंगे क्षेत्र में कितने किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं?
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 97,125 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।

5. किसान प्राकृतिक खेती की जानकारी कहां से ले सकते हैं?
किसान कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और मॉडल फार्मों के माध्यम से प्राकृतिक खेती की तकनीक और प्रशिक्षण की जानकारी ले सकते हैं।

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