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BRICS में किसानों के लिए 4 बड़ी पहल! Digital Agriculture से Climate-Resilient खेती तक बदलेगा कृषि सहयोग

BRICS की इन 4 पहलों से किसानों की आमदनी और फसल दोनों सुधरेंगी
BRICS की इन 4 पहलों से किसानों की आमदनी और फसल दोनों सुधरेंगी

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों को वैश्विक सहयोग के एजेंडे में अहम जगह मिली है। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और टिकाऊ खेती को मजबूत करने के साथ कृषि क्षेत्र में सहयोग की 4 नई पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इनमें BRICS AGRIN, Seed Systems में Farmers’ Rights के लिए Global Forum, Agroecology एवं Regenerative Agriculture के Centres of Excellence का नेटवर्क और Digital Agriculture का BRICS Network शामिल हैं।

BRICS घोषणा-पत्र में कृषि को क्यों मिली अहम जगह?

BRICS देशों की खाद्य उत्पादन और कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में सदस्य देशों ने कृषि उत्पादकता और sustainability बढ़ाने तथा global food security और nutrition सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है। घोषणा-पत्र में खाद्य कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, आपूर्ति में अचानक आने वाली बाधाओं और उर्वरकों की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। साथ ही drought-resilient और climate-adaptive seed systems, कृषि inputs की उपलब्धता तथा कृषि उत्पादों की supply chains को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

1. BRICS AGRIN: कृषि इनपुट, Genetic Resources और Information Network:

BRICS AGRIN (Agro-Inputs, Genetic Resources, and Information Network) को एक collaborative, non-binding और farmer-centric नेटवर्क के रूप में स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसके माध्यम से सदस्य देशों में कृषि inputs, genetic resources और कृषि संबंधी जानकारी एवं बेहतर practices के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के अनुभवों और उपलब्ध ज्ञान को साझा करके कृषि क्षेत्र की साझा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाना है।

2. Seed Systems में Farmers’ Rights के लिए Global Forum:

घोषणा-पत्र में Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems शुरू करने का भी स्वागत किया गया है। इस मंच का उद्देश्य seed systems से जुड़ी साझा चुनौतियों पर चर्चा, प्रभावी नीतियों को बढ़ावा और कृषि एवं बीजों से जुड़े traditional knowledge के documentation और exchange को प्रोत्साहित करना है। किसानों के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि बेहतर बीज प्रणाली, स्थानीय ज्ञान और genetic resources से जुड़ा सहयोग भविष्य में कृषि विविधता और climate resilience से संबंधित प्रयासों को मजबूत कर सकता है।

3. Agro ecology और Regenerative Agriculture के लिए Centers of Excellence:

BRICS देशों ने Agro ecology और Regenerative Agriculture for Climate Resilience and Productivity के लिए Centres of Excellence का नेटवर्क स्थापित करने की दिशा में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसका फोकस ऐसी कृषि पद्धतियों पर होगा जो जलवायु परिस्थितियों के प्रति अधिक अनुकूलन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ कृषि उत्पादकता से जुड़ी हों। कृषि के लिए यह सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब सूखा, अनियमित बारिश, तापमान में बदलाव और भूमि एवं जल संसाधनों पर दबाव जैसी चुनौतियां कई देशों में खेती को प्रभावित कर रही हैं।

4. Digital Agriculture के लिए BRICS Network:

घोषणा-पत्र में Digital Agriculture के लिए BRICS Network को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसमें agro forestry, fisheries और aquaculture जैसे क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। Digital Agriculture के तहत data, digital tools और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कृषि निर्णयों, संसाधन प्रबंधन और उत्पादन प्रणालियों को अधिक efficient बनाने में मदद कर सकता है। भविष्य में इस तरह के सहयोग से सदस्य देशों के बीच कृषि से जुड़े digital solutions और experiences साझा करने के अवसर बढ़ सकते हैं।

Climate-Resilient Agriculture पर बढ़ा फोकस:

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि और खाद्य सुरक्षा को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के साथ देखा गया है। इसमें drought-resilient और climate-adaptive seed systems को मजबूत करने तथा sustainable agricultural practices को बढ़ावा देने की बात कही गई है। किसानों के लिए इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मौसम की अनिश्चितता का असर उत्पादन, पानी की उपलब्धता और कृषि लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में climate-resilient varieties और resource-efficient farming practices पर सहयोग भविष्य की कृषि रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

WTO में कृषि व्यापार पर भी BRICS का फोकस:

घोषणा-पत्र में BRICS देशों ने WTO में कृषि वार्ताओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसमें WTO Agreement on Agriculture के अनुरूप लंबे समय से लंबित मुद्दों पर प्रगति और एक fair, balanced and development-oriented agricultural trading system की दिशा में काम करने की बात कही गई है। घोषणा में यह भी माना गया है कि बदलती नीतियां और regulatory developments कृषि उत्पादन, व्यापार, खाद्य सुरक्षा तथा छोटे और पारिवारिक किसानों की आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं।

BRICS Grain Exchange पर भी चर्चा:

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में BRICS के भीतर grain trading platform यानी BRICS Grain Exchange स्थापित करने की पहल पर आगे चर्चा का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि और खाद्य उत्पादों तथा संबंधित inputs की उपलब्धता और व्यापार को लेकर सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करना है। घोषणा-पत्र में resilient और non-discriminatory supply chains, बेहतर value chains और sustainable agricultural practices को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।

किसानों के लिए इन पहलों का क्या मतलब?

BRICS New Delhi Declaration में घोषित ये पहल किसानों के लिए सीधे नकद लाभ, सब्सिडी या नई सरकारी योजना नहीं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग का ढांचा मजबूत करना है। यदि इन पहलों को आगे व्यावहारिक स्तर पर लागू किया जाता है, तो कृषि inputs, genetic resources, बीजों से जुड़े ज्ञान, climate-resilient farming, regenerative agriculture और digital technologies जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है। इससे भविष्य में किसानों और कृषि संस्थानों के लिए नई तकनीक, ज्ञान और बेहतर agricultural practices तक पहुंच के अवसर विकसित हो सकते हैं।

FAQs:

1. BRICS Agriculture से किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
BRICS agriculture initiatives का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच agricultural cooperation बढ़ाना है। इससे future में agricultural inputs, seeds, technology, genetic resources और farming knowledge के exchange के अवसर बढ़ सकते हैं।

2. BRICS AGRIN क्या है?
BRICS AGRIN यानी Agro-Inputs, Genetic Resources, and Information Network एक collaborative और farmer-centric network है, जिसका उद्देश्य agricultural inputs, genetic resources और farming information के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

3. Digital Agriculture BRICS Network क्या करेगा?
Digital Agriculture BRICS Network के जरिए agriculture से जुड़ी digital technologies, data और solutions के अनुभव साझा करने में सहयोग बढ़ सकता है। इसमें agroforestry, fisheries और aquaculture भी शामिल हैं।

4. BRICS Grain Exchange क्या है?
BRICS Grain Exchange कृषि और खाद्य उत्पादों तथा संबंधित inputs के trade और availability को लेकर सहयोग बढ़ाने की प्रस्तावित पहल है। घोषणा-पत्र में इस पहल पर आगे चर्चा का उल्लेख किया गया है।

5. क्या BRICS Agriculture initiatives किसानों को सीधे subsidy देंगी?
नहीं। ये पहल सीधे cash benefit या subsidy scheme नहीं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच agriculture cooperation, knowledge sharing, technology और sustainable farming practices को बढ़ावा देना है।

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