खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 से संचालित केंद्रीय क्षेत्र की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) देश में खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह मांग-आधारित योजना है, जिसके तहत उपलब्ध निधि के अनुसार समय-समय पर एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी कर देशभर से परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं।
जनवरी 2025 से अब तक झारखंड और ओडिशा में कोई नई परियोजना स्वीकृत नहीं हुई है। हालांकि योजना शुरू होने के बाद से झारखंड में 2 परियोजनाओं तथा ओडिशा के नबरंगपुर क्षेत्र में 6 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनके लिए क्रमशः ₹0.93 करोड़ और ₹23.62 करोड़ की अनुदान सहायता स्वीकृत की गई।
31 दिसंबर 2025 तक योजना के विभिन्न घटकों के अंतर्गत कुल 1,607 परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें से 1,196 परियोजनाएं पूरी होकर संचालन में आ चुकी हैं। इन परियोजनाओं से देशभर के 36,10,782 किसानों को लाभ मिला है। लाभार्थियों में ओडिशा के नबरंगपुर क्षेत्र के 7,150 किसान, राजस्थान के 1,37,852 किसान और जम्मू-कश्मीर के 53,203 किसान शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने योजना के तहत 50 मल्टी-प्रोडक्ट फूड इर्रेडिएशन यूनिट और 100 फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने के लिए ₹1,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जिसमें दोनों मदों के लिए ₹500-₹500 करोड़ निर्धारित हैं। साथ ही मूल बजट ₹4,600 करोड़ में 20% वृद्धि करते हुए ₹920 करोड़ अतिरिक्त स्वीकृत किए गए हैं।
50 फूड इर्रेडिएशन यूनिट्स के लिए 27 मई 2025 को जारी EOI 28 फरवरी 2026 तक खुला है, जिसके तहत अब तक 14 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि इनमें झारखंड और ओडिशा की कोई परियोजना शामिल नहीं है। इसी तरह 100 फूड टेस्टिंग लैब के लिए 21 नवंबर 2025 को जारी EOI 27 फरवरी 2026 तक खुला रहेगा, परंतु अभी तक इन दोनों राज्यों में कोई लैब परियोजना स्वीकृत नहीं हुई है।
किसानों की आय और रोजगार में बढ़ोतरी:
इस योजना के तहत विकसित खाद्य प्रसंस्करण ढांचा कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाता है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है और खेत-स्तर पर लाभप्रदता बढ़ती है। 31 दिसंबर 2025 तक योजना से 36 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला तथा देश में 4,69,403 रोजगार अवसर सृजित हुए हैं। इनमें ओडिशा के नबरंगपुर क्षेत्र में 4,249 रोजगार शामिल हैं।
कुछ जिलों में अभी भी प्रतीक्षा:
झारखंड के हजारीबाग और रामगढ़ जिलों में अब तक इस योजना के अंतर्गत कोई परियोजना स्वीकृत नहीं हुई है, जिससे इन क्षेत्रों में भविष्य में निवेश और परियोजना विस्तार की संभावनाएं बनी हुई हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के बीच मजबूत कड़ी बनकर किसानों की आय वृद्धि, रोजगार सृजन और ग्रामीण औद्योगिक विकास को गति दे रही है।
FAQs – प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना:
Q1. PMKSY योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A1. योजना का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को सुदृढ़ करना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है।
Q2. झारखंड और ओडिशा में कितनी परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं?
A2. झारखंड में 2 परियोजनाएं और ओडिशा के नबरंगपुर में 6 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं।
Q3. योजना से कितने किसानों को लाभ मिला है?
A3. अब तक कुल 36,10,782 किसानों को इस योजना से लाभ मिला है।
Q4. फूड टेस्टिंग लैब और इर्रेडिएशन यूनिट्स के लिए क्या बजट स्वीकृत हुआ?
A4. केंद्र सरकार ने 50 फूड इर्रेडिएशन यूनिट और 100 फूड टेस्टिंग लैब के लिए ₹1,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया है।
Q5. PMKSY में Khetivyapar का क्या योगदान है?
A5. Khetivyapar किसानों को योजना से जुड़ी जानकारी प्रदान करता है और उन्हें निवेश व परियोजनाओं के लाभ के बारे में मार्गदर्शन करता है।