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भारत–अमेरिका ट्रेड डील ऐतिहासिक: किसानों और भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा | Khetivyapar

भारत अमेरिका व्यापार समझौता
भारत अमेरिका व्यापार समझौता

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत–अमेरिका के बीच हुई हालिया ट्रेड डील को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा और नई रफ्तार देगा। भोपाल स्थित निवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि यह डील केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश देता है कि भारत की नीति कमिटमेंट की है, समझौते के नाम पर समझौता (कॉम्प्रोमाइज) की नहीं। भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ आत्मविश्वास से निर्णय करता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित, सकारात्मक और भरोसेमंद रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। यही कारण है कि आज भारत एक मजबूत और विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का प्रतीक:

केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह ट्रेड डील डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी तीनों का उत्कृष्ट उदाहरण है। डिप्लोमेसी का अर्थ है ‘राष्ट्र प्रथम’, और इस समझौते में भारत के राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रखे गए हैं। डेवलपमेंट के दृष्टिकोण से यह डील विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करती है। वहीं डिग्निटी यानी किसान की गरिमा जिसका इस समझौते में पूरा सम्मान किया गया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि और किसानों को लेकर जो भी आशंकाएं थीं, इस ट्रेड डील में उनका पूरी तरह समाधान किया गया है। यह समझौता न केवल किसानों को सुरक्षित रखता है, बल्कि उनके लिए नए वैश्विक अवसरों के द्वार भी खोलता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अमेरिकी बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों को शून्य शुल्क:

कृषि मंत्री ने बताया कि भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क (Zero Tariff) पर बाजार मिलेगा, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है। इससे भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की है। जिन उत्पादों पर पहले 50 प्रतिशत तक शुल्क लगता था, उन्हें घटाकर शून्य कर दिया गया है। इनमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति वैक्स, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम और कुछ अनाज शामिल हैं।

श्री चौहान ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात बढ़कर 4.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें मसाला निर्यात में 88 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस ट्रेड डील के बाद भारतीय मसालों को अमेरिकी बाजार में और व्यापक अवसर मिलेंगे। भारत पहले से ही करीब 200 देशों में मसाले और मसाला उत्पादों का निर्यात करता है और यह समझौता इस क्षेत्र को और मजबूती देगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय बाजार की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है। यदि कोई विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश करता है, तो उसे निर्धारित टैरिफ देना होगा। किसानों को पूरी सुरक्षा और संरक्षण प्राप्त है—यही इस ट्रेड डील की सबसे बड़ी ताकत है।

सभी संवेदनशील कृषि उत्पाद समझौते से बाहर:

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील में ऐसा कोई भी कृषि या खाद्य उत्पाद शामिल नहीं किया गया है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी प्रकार की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। देश के प्रमुख अनाज, फल और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनके लिए अमेरिकी बाजार को कोई प्रवेश नहीं दिया गया है।

इसके अलावा, अमेरिका से कई कृषि और खाद्य उत्पादों जैसे छिलका रहित अनाज, आटा, आलू, प्याज, दालें, फ्रोजन सब्जियां, डेयरी उत्पाद, मसाले और मसाला पाउडर भारत नहीं मंगवाए जाएंगे। इससे यह स्पष्ट है कि भारतीय किसान और घरेलू बाजार पूरी तरह सुरक्षित हैं।

किसान, महिलाएं और युवाओं के लिए नए अवसर:

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस ट्रेड डील से भारतीय किसानों, महिलाओं और विशेष रूप से युवाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। टेक्सटाइल सेक्टर में भारत का टैरिफ अब प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में घटकर करीब 18 प्रतिशत रह गया है, जिससे टेक्सटाइल निर्यात को नई गति मिलेगी। इसका सीधा लाभ कपास उत्पादक किसानों को भी मिलेगा।

इसके साथ ही जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट, इंजीनियरिंग गुड्स और एमएसएमई सेक्टर में भी नए व्यापारिक अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी इस समझौते से लाभ होगा, क्योंकि उनके उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक नौ एफटीए किए जा चुके हैं, जिनमें यूएई, ओमान, न्यूजीलैंड, यूके सहित कई देश शामिल हैं और अन्य देशों से बातचीत जारी है। इन सभी समझौतों का लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था, किसानों, श्रमिकों, निर्यातकों और उद्यमियों को मिलेगा।

FAQs:

Q1. India–US Trade Deal से किसानों को क्या फायदा होगा?
किसानों को Zero Tariff के जरिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर मिलेंगे।

Q2. क्या भारतीय बाजार को नुकसान होगा?
नहीं, सभी संवेदनशील कृषि उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं।

Q3. किन कृषि उत्पादों पर Zero Tariff मिलेगा?
मसाले, फल, चाय, कॉफी, नारियल, काजू सहित कई उत्पादों पर।

Q4. क्या डेयरी और अनाज शामिल हैं?
नहीं, डेयरी, गेहूं, चावल, मक्का जैसे उत्पाद समझौते से बाहर हैं।

Q5. यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत करेगी?
कृषि निर्यात, रोजगार और वैश्विक निवेश को बढ़ावा देकर।

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