Chia seeds farming: सुपरफूड के रूप में पहचान बना चुके चिया सीड्स अब किसानों के लिए “सफेद सोना” साबित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, चना और अन्य अनाजों की तुलना में कम लागत में बेहतर उत्पादन देने वाली चिया की खेती तेजी से किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बन रही है।
जिले में पाटन अनुविभाग से नवाचार के रूप में 5 एकड़ में शुरू हुई चिया की खेती का रकबा अब बढ़कर करीब 250 एकड़ तक पहुंच गया है। वर्तमान में पाटन, शहपुरा, सिहोरा, मझौली, जबलपुर और कुंडम विकासखंड के लगभग 100 किसान चिया की खेती कर रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने को शहपुरा विकासखंड के ग्राम भड़पुरा में किसान-इंजीनियर अभिषेक मुखर्जी के खेत का भ्रमण कर चिया की फसल का अवलोकन किया। इस दौरान संयुक्त संचालक कृषि के.एस. नेताम, उप संचालक कृषि डॉ. एस.के. निगम और अनुविभागीय कृषि अधिकारी (पाटन) डॉ. इंदिरा त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
कृषि अधिकारियों के अनुसार चिया की खेती में उर्वरक और कीटनाशकों पर खर्च लगभग न के बराबर होता है। इसकी पत्तियों में मौजूद विशेष गंध के कारण पशु भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते। चिया सीड्स में ओमेगा-3, फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। यह फसल 90 से 120 दिन में तैयार हो जाती है और इसे रबी मौसम में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी एक और खासियत यह है कि इसमें पानी की जरूरत बहुत कम होती है। चिया की खेती में बीज की मात्रा भी कम लगती है, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 1.5 से 2 किलो बीज पर्याप्त होता है।
किसान अभिषेक मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने काफी अध्ययन के बाद चिया की खेती शुरू की। वे अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन के संपर्क में आए और जिले में सबसे पहले चिया की खेती अपनाने वाले किसान कैलाश यादव की मदद से 15 एकड़ क्षेत्र में चिया की खेती की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि अब तक उन्होंने किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं किया है। केवल एक बार गोबर की खाद डाली गई और नीम तेल का छिड़काव किया गया। पूरी फसल जैविक पद्धति से तैयार की जा रही है।
बाजार खुद तैयार करने की सलाह: भ्रमण के दौरान संयुक्त संचालक कृषि के.एस. नेताम ने किसानों को सुझाव दिया कि चिया सीड्स की बिक्री के लिए केवल नीमच मंडी पर निर्भर न रहें, बल्कि अपना खुद का बाजार विकसित करें, क्योंकि इस समय चिया सीड्स की मांग काफी अधिक है।
लागत कम, मुनाफा ज्यादा: उप संचालक कृषि डॉ. एस.के. निगम के अनुसार चिया की खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक लागत लगभग 6,000 से 7,000 रुपये प्रति एकड़ आती है। वहीं उत्पादन 4 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकता है। गुणवत्ता के आधार पर बाजार में इसकी कीमत 14,000 से 18,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल सकती है।
FAQs:
Q1. चिया की खेती में लागत कितनी आती है?
A1. लगभग 6,000 से 7,000 रुपये प्रति एकड़।
Q2. चिया की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
A2. 90 से 120 दिन।
Q3. चिया सीड्स की प्रमुख पौष्टिकता क्या है?
A3. ओमेगा-3, फाइबर और प्रोटीन की अच्छी मात्रा।
Q4. चिया की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मौसम कौन सा है?
A4. रबी मौसम में इसे आसानी से उगाया जा सकता है।
Q5. चिया सीड्स की बिक्री के लिए किसानों को क्या सलाह दी जाती है?
A5. केवल मंडी पर निर्भर न रहें, बल्कि खुद का बाजार विकसित करें।