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कृषि सुधारों में राज्यों की बढ़त: एमएसपी खरीद, जल संरक्षण और तकनीक से किसानों को सीधा लाभ

आर्थिक समीक्षा 2025-26
आर्थिक समीक्षा 2025-26

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों ने बीते कुछ वर्षों में भूमि शासन, कृषि बाजार, जल प्रबंधन, तकनीक और फसल विविधीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार आधारित सुधार किए हैं। इन पहलों का सीधा असर राज्यों के कृषि उत्पादन, पारदर्शिता और संसाधन प्रबंधन पर देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए योजना आधारित नवाचार और सुशासन मॉडल कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे रहे हैं।

राज्यों की प्रमुख पहलें और उनके सकारात्मक परिणाम:

भूमि और संसाधन शासन में सुधार:

आंध्र प्रदेश ने पुनः समीक्षा योजना-2021 के तहत ड्रोन आधारित कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) और GIS तकनीक का उपयोग करते हुए छेड़छाड़-रहित डिजिटल भूमि पट्टे जारी किए।
वर्ष 2025 में अब तक 6,901 गांवों में 81 लाख भूमि आवंटनों की पुनः समीक्षा की गई, वहीं करीब 86,000 बाड़ विवादों का समाधान भी किया गया।
वहीं बिहार ने वर्ष 2025 में कृषि के लिए चौड़ भूमि के विकास को बढ़ावा देने हेतु मुख्यमंत्री समेकित चौड़ विकास योजना शुरू की। इसके तहत 22 जिलों में 1,933 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर मछली आधारित उत्पादन की शुरुआत की गई।

बाजार सुधार: किसानों को सीधे लाभ देने की पहल:

मध्य प्रदेश में वर्ष 2021 में शुरू की गई “सौदा पत्रक” पहल के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों से सीधे एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद की गई। इस पहल से किसानों की मंडी पर निर्भरता कम हुई और भुगतान में पारदर्शिता बढ़ी। दिसंबर 2025 तक इस माध्यम से 1,03,000 से अधिक सौदे किए जा चुके हैं।

जल प्रबंधन, सिंचाई और भूजल संरक्षण पर फोकस:

असम राज्य सिंचाई योजना (2022) का उद्देश्य नई योजना के जरिए सिंचाई क्षेत्र बढ़ाना और सोलर पंपों को बढ़ावा देना रहा। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2024-25 में सकल कृषि सिंचित भूमि में 24.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं उत्तर प्रदेश भू-जल स्तर नियम-2020 ने जल निकासी से जुड़े कानून को मजबूत किया। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जल दोहन बढ़ने के बावजूद भू-जल स्तर में मामूली सुधार देखने को मिला है।

तकनीक और डिजिटल कृषि: डेटा आधारित खेती की ओर बढ़ता भारत:

कर्नाटक के FRUITS प्लेटफॉर्म (2020) ने DBT, एमएसपी आधारित खरीद और फसल सर्वेक्षण को जोड़कर एक एकीकृत किसान डेटाबेस तैयार किया। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न योजनाओं में 55 लाख किसानों को शामिल किया गया है।
झारखंड में वर्ष 2024 में GIS आधारित क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि और एग्री-स्टॉक योजना शुरू की गई। इसमें भूमि निगरानी और जलवायु जानकारी को योजना के साथ जोड़ा गया है, जिससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाने में मदद मिल रही है। वहीं चौथा बिहार कृषि रोडमैप (2023-28) पुराने रोडमैप का स्थान लेते हुए लागू किया गया है, जिसके चलते राज्य में मत्स्य और दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

FAQs:

Q1. आर्थिक समीक्षा 2025-26 में कृषि को लेकर क्या खास कहा गया है?
आर्थिक समीक्षा में राज्यों के कृषि नवाचार, डिजिटल खेती और जल प्रबंधन सुधारों को प्रमुख बताया गया है।

Q2. “सौदा पत्रक” योजना किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है?
इस योजना से किसान MSP पर सीधे डिजिटल बिक्री कर सकते हैं, जिससे भुगतान में पारदर्शिता बढ़ती है।

Q3. FRUITS प्लेटफॉर्म क्या है?
यह कर्नाटक का एक डिजिटल किसान डेटाबेस है, जो DBT, MSP और फसल सर्वेक्षण को जोड़ता है।

Q4. बिहार का चौथा कृषि रोडमैप क्यों अहम है?
यह रोडमैप मत्स्य, दुग्ध और कृषि उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है।

Q5. Khetivyapar किसानों के लिए क्यों उपयोगी है?
Khetivyapar कृषि नीतियों, बाजार अपडेट और सरकारी योजनाओं की आसान जानकारी देता है।

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