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दालों में आत्मनिर्भरता मिशन: उत्पादन, खरीद और प्रसंस्करण में बड़े कदम

सरकारी दाल खरीद
सरकारी दाल खरीद

केंद्रीय nodal एजेंसियों जैसे राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड (NCCF) के माध्यम से दालों की खरीद और उत्पादन की प्रगति का समय-समय पर समीक्षा की जाती है। किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ये एजेंसियां पंजीकृत किसानों से उनकी पेशकश के अनुसार तुअर, उड़द और मसूर की खरीद करती हैं।

केंद्र ने मंजूर की 'दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन':

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 अक्टूबर, 2025 को 'दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन' को मंजूरी दी, जिसके लिए 2025-26 से 2030-31 तक छः वर्ष की अवधि में 11,440 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य तुअर, उड़द और मसूर सहित दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों के लिए जलवायु-प्रतिरोधी बीज उपलब्ध कराना और दलहन की खेती के लिए क्षेत्र का विस्तार करना है।
मिशन के तहत, पीएम-आशा के मूल्य समर्थन योजना (PSS) मानदंडों के अनुरूप अगले चार वर्षों के लिए NAFED और NCCF द्वारा तुअर, उड़द और मसूर की खरीद में मदद दी जाएगी।

फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना:

नई दलहन प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाइयों के निर्माण के लिए परियोजना लागत का 33% या अधिकतम 25 लाख रुपये (जो भी कम हो) तक की वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी। 2025-26 से 2030-31 की अवधि में 1000 प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

पीएमकेएसवाई के तहत अतिरिक्त पहल:

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमता सृजन एवं विस्तार (CEFPPC) के लिए 23 दलहन प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 18 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 315.88 करोड़ रुपये है, जिसमें 74.39 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता/सब्सिडी के माध्यम से 4.44 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष प्रसंस्करण क्षमता का निर्माण किया जाएगा।

FAQs:

1. दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है जिसका उद्देश्य भारत में दलहन उत्पादन बढ़ाकर देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाना है।

2. इस मिशन के लिए कितना बजट तय किया गया है?
सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्षों के लिए 11,440 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।

3. दलहन की खरीद कौन-सी एजेंसियां करती हैं?
मुख्य रूप से NAFED और NCCF के माध्यम से तुअर, उड़द और मसूर की खरीद की जाती है।

4. किसानों को इस मिशन से क्या लाभ होगा?
किसानों को MSP पर फसल बेचने का मौका, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलेंगी।

5. प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कितनी सहायता मिलेगी?
नई इकाइयों के लिए परियोजना लागत का 33% या अधिकतम 25 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता दी जाएगी।

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