किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के कारोबार में बीते एक साल के दौरान तेज और ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय की मदद से शुरू किए गए साप्ताहिक वेबिनार कार्यक्रम ने FPO को बड़े खरीदारों और कॉरपोरेट कंपनियों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। इसके चलते FPO का कारोबार अब बी2सी (B2C) की तुलना में बी2बी (B2B) व्यापार में तेजी से बढ़ा है।
जानकारी के अनुसार, इन वेबिनार के माध्यम से किसान प्रतिनिधि सीधे कॉरपोरेट्स से जुड़कर खरीद संबंध स्थापित कर रहे हैं। अब तक FPO द्वारा B2B एग्री ट्रेड में करीब 1,100 करोड़ रुपये का लेन-देन किया जा चुका है। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 662 करोड़ रुपये FPO ने NCDEX वायदा मंच पर अपनी उपज बेचकर अर्जित किया है।
दूसरी ओर, सरकारी प्लेटफॉर्म GeM पोर्टल और ONDC पर FPO का ऑनलाइन लेन-देन अभी भी अपेक्षाकृत कम रहा है। दोनों प्लेटफॉर्म पर कुल कारोबार लगभग 5 करोड़ रुपये के आसपास बताया गया है। वहीं, Amazon और Flipkart जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर FPO की मौजूदगी फिलहाल बहुत कम है।
केंद्र सरकार की इक्विटी ग्रांट एवं क्रेडिट गारंटी योजना के तहत गठित 10,000 FPO में से 1,131 FPO का वार्षिक कारोबार 1 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, FPO के सकारात्मक प्रदर्शन से उत्साहित होकर सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में ‘करोड़पति’ FPO की संख्या बढ़ाकर कम से कम 5,000 करने का लक्ष्य तय किया है।
पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले स्थित न्यू एग्रीवर्स FPO के प्रबंध निदेशक बिप्रोज्योति भौमिक के अनुसार, उनके कुल कारोबार में 70% हिस्सा B2B का है, जबकि 30% बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अपनी वेबसाइट के जरिए होती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उनका कारोबार 5 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की उम्मीद है, जो 2024-25 में 3 करोड़ रुपये था।
करीब 2,600 किसान शेयरधारकों वाला यह FPO मुख्य रूप से मशरूम, शहद, बाजरा सहित कई गुणवत्ता वाले उत्पादों का कारोबार करता है। FPO प्रतिनिधियों का मानना है कि निर्यात की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए सरकार द्वारा आवश्यक प्रमाणन और सपोर्ट मिलना जरूरी है।
ONDC पर 6,000 FPO, लेकिन Amazon-Flipkart पर बेहद कम:
सूत्रों के अनुसार, ONDC पर करीब 6,000 FPO रजिस्टर्ड हैं, जिन्होंने पिछले 10 महीनों में लगभग 1.25 करोड़ रुपये की बिक्री की है। वहीं Flipkart पर केवल 37 और Amazon पर सिर्फ 6 FPO ही रजिस्टर्ड हैं।
ज्यादा कमीशन बना बड़ी चुनौती: कश्मीर स्थित एक FPO प्रतिनिधि ने बताया कि बड़े प्लेटफॉर्म पर कमीशन काफी ज्यादा है। ब्रांडिंग कमजोर होने के कारण वे 30-40% कमीशन नहीं दे सकते और अलग से MRP प्रिंटिंग जैसी शर्तें भी पूरी करना कठिन होता है। ONDC पर वे डिलीवरी के लिए इंडिया पोस्ट का उपयोग कर रहे हैं।
वेबिनार से बढ़ी सरकारी और निजी खरीद: साप्ताहिक वेबिनार शुरू होने के बाद सरकार ने FPO द्वारा किए गए कारोबार का आकलन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, FPO ने NCCF को 205 करोड़ और नाफेड को 111 करोड़ रुपये की बिक्री की है, जो मुख्यतः गेहूं-धान की आधिकारिक खरीद से जुड़ी रही। निजी कंपनियों में मदर डेयरी (1.62 करोड़), फार्मार्ट (80 करोड़), ओलाम इंडिया (32 करोड़) और किसान से (7.5 करोड़ रुपये) की खरीद दर्ज की गई है।
FAQs:
Q1. FPO का B2B कारोबार क्यों तेजी से बढ़ रहा है?
सरकारी वेबिनार, कॉरपोरेट कनेक्ट और NCDEX जैसे प्लेटफॉर्म से सीधे बिक्री के कारण।
Q2. FPO ने अब तक कितना B2B कारोबार किया है?
करीब 1,100 करोड़ रुपये का लेन-देन किया जा चुका है।
Q3. ONDC और GeM पर FPO का कारोबार कम क्यों है?
लॉजिस्टिक्स, ब्रांडिंग और सीमित डिजिटल एक्सपोजर मुख्य कारण हैं।
Q4. सरकार का FPO को लेकर नया लक्ष्य क्या है?
अगले वित्तीय वर्ष में 5,000 करोड़पति FPO बनाना।
Q5. Khetivyapar FPO के लिए कैसे मददगार है?
Khetivyapar B2B एग्री ट्रेड, खरीदार कनेक्ट और बाजार जानकारी उपलब्ध कराता है।