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भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA): किसानों से लेकर उद्योग तक नए अवसरों की शुरुआत

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की संयुक्त घोषणा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में की। यह समझौता भारत–EU आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, भारत के प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुक्त व्यापार समझौते से किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ:

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत ने अब तक का अपना सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) संपन्न किया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों और छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का नया खाका है। इससे भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश को बढ़ावा मिलेगा, इनोवेशन पार्टनरशिप को गति मिलेगी और वैश्विक सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी।

भारत–EU व्यापार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी:

  1. यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ा है। 
  2. वर्ष 2024-25 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार: लगभग 11.5 लाख करोड़ रुपये (करीब 136.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर) 
  3. इसमें भारत का निर्यात: 6.4 लाख करोड़ रुपये (लगभग 75.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर), आयात: 5.1 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर)
  4. वहीं, सेवा क्षेत्र में भारत–EU व्यापार 2024 में करीब 7.2 लाख करोड़ रुपये (लगभग 83.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया।

भारत–EU साझेदारी से व्यापार और निवेश के नए अवसर:

भारत और यूरोपीय संघ दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों मिलकर वैश्विक GDP का लगभग 25% हिस्सा बनाते हैं और वैश्विक व्यापार में भी बड़ा योगदान रखते हैं। ऐसे में, दो विविध लेकिन एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाओं के साथ आने से व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर खुलने की संभावना जताई जा रही है। 

99% से अधिक भारतीय निर्यात को EU में प्राथमिकता:

इस समझौते का एक बड़ा लाभ यह है कि 99% से अधिक भारतीय निर्यात को यूरोपीय संघ में प्राथमिकता आधारित प्रवेश मिलने का रास्ता साफ होगा। इससे भारत के लिए यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलेंगे और कई क्षेत्रों में तेजी से विस्तार की संभावना बनेगी।

महिलाओं, युवाओं और कारीगरों को मिलेगा फायदा:

भारत–EU FTA को MSME सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार के अनुसार यह समझौता छोटे उद्योगों के लिए नए बाजार और अवसर खोलेगा, महिलाओं, कारीगरों, युवाओं और पेशेवरों के लिए रोजगार सृजन में मदद करेगा और भारतीय व्यवसायों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) से जोड़ने में सहायक होगा

कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और जेम्स-ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को बड़ी राहत:

यह FTA खासतौर पर उन क्षेत्रों को निर्णायक बढ़त दे सकता है जो श्रम-प्रधान हैं, जैसे- कपड़ा और परिधान,चमड़ा और जूते,समुद्री उत्पाद,रत्न और आभूषण,हस्तशिल्प,इंजीनियरिंग उत्पाद,ऑटोमोबाइल शामिल है। जानकारी के अनुसार, समझौते के लागू होने पर करीब 33 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर टैरिफ में 10% तक की कटौती की जाएगी, जिससे इन सेक्टरों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी। 

भारत में हाई-एंड यूरोपीय कारों की बढ़ेगी एंट्री:

FTA के तहत ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कोटा आधारित और संतुलित उदारीकरण का प्रावधान किया गया है। इससे:

  1. यूरोपीय वाहन निर्माता भारत में उच्च मूल्य श्रेणी के मॉडल पेश कर सकेंगे
  2. भविष्य में मेक इन इंडिया और भारत से निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी
  3. भारतीय उपभोक्ताओं को हाई-टेक विकल्प और बेहतर प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा
  4. भारत में बने ऑटोमोबाइल को यूरोपीय बाजार तक पहुंचने के नए अवसर मिलेंगे

लग्जरी कार टैक्स 5 साल में 110% से घटकर 10%:

भारत ने ईयू को भी टैक्स रियायतें दी हैं-

  1. 5 साल में ईयू की कारों पर वर्तमान 110 प्रतिशत टैक्स को घटाकर फेजवाइज 10 प्रतिशत किया जाएगा। 
  2. ईयू कंपनियों जैसे रैनो, आडी, फाक्सवैगन, पोर्शे, मर्सेडीज, बीएमडब्ल्यू को भारत में बडे मौके।
  3. डील लागू होने के बाद पहले साल 16 लाख रू. से ज्यादा दाम वाली कारों पर टैक्स 30 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक कम। हर साल ढाई लाख कारों की सीमा। 
  4. ईवी वाहनों पर टैरिफ में कमी 5 साल बाद शुरू होगी। 
  5. ईयू वाइन पर 150 प्रतिशत के टैक्स को 75 प्रतिशत किया, जबकि शराब पर टैक्स 40 प्रतिशत  

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के लिए खुले नए दरवाजे:

यह समझौता भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को भी मजबूत बढ़ावा दे सकता है। चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल-सब्जियां और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसी वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से किसानों और कृषि उद्यमों के लिए नए अवसर बनेंगे, ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी, भारत की वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थिति मजबूत होगी।

संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा: सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में संवेदनशील कृषि उत्पादों और डेयरी सेक्टर को सुरक्षा दी गई है। घरेलू प्राथमिकताओं और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, सोयामील और कुछ फलों-सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विवेकपूर्ण संरक्षण बनाए रखा गया है।

नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी काम: FTA सिर्फ टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है। इसमें व्यापार को आसान बनाने के लिए कई अन्य सुधार भी शामिल हैं, जैसे नियामक सहयोग को मजबूत करना, अधिक पारदर्शिता, सीमा शुल्क प्रक्रिया को सरल बनाना, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) से जुड़े नियमों में सुधार, तकनीकी बाधाओं को कम करने के उपाय। इन कदमों से भारत और EU के बीच व्यापार में आने वाली नॉन-टैरिफ बाधाओं को भी कम करने में मदद मिलेगी।

FAQs:

Q1. India–EU FTA क्या है?
यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को आसान बनाने वाला मुक्त व्यापार समझौता है।

Q2. इससे किसानों को क्या फायदा होगा?
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को EU बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।

Q3. कौन-से सेक्टर सबसे ज्यादा लाभ में रहेंगे?
कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, जेम्स-ज्वेलरी और MSME सेक्टर।

Q4. क्या डेयरी सेक्टर को नुकसान होगा?
नहीं, डेयरी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है।

Q5. FTA से आम उपभोक्ता को क्या फायदा?
बेहतर विकल्प, प्रतिस्पर्धी कीमतें और हाई-टेक उत्पाद उपलब्ध होंगे।

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