देश में इस वर्ष गेहूं की खेती ने नया इतिहास रच दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार दिसंबर और जनवरी की कड़ाके की सर्दी ने गेहूं की शुरुआती बढ़वार के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान कीं। कुल बुवाई क्षेत्रफल 6.13 प्रतिशत बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो संभावित रिकॉर्ड उत्पादन का स्पष्ट संकेत दे रहा है। अनुकूल मौसम, आधुनिक बीजों का उपयोग और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों के समन्वय से इस बार गेहूं की फसल बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में गेहूं का कुल रकबा लगभग 328.4 लाख हेक्टेयर था, जो इस सीजन में बढ़कर करीब 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि किसानों का गेहूं की खेती की ओर रुझान मजबूत हुआ है। खेती के बढ़ते दायरे के साथ प्रकृति ने भी किसानों का भरपूर साथ दिया है। इस वर्ष मौसम की यही अनुकूलता देखने को मिली है। यदि आगामी दिनों में तापमान संतुलित बना रहता है और अचानक गर्मी नहीं बढ़ती, तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन में बड़ी छलांग संभव है।
गेहूं उत्पादन में मौसम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। दिसंबर 2025 में तापमान में आई गिरावट ने फसल की जड़ों को मजबूती दी और वानस्पतिक विकास को बेहतर बनाया। यदि इस अवधि में अत्यधिक गर्मी पड़ती, तो पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती थी। मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार फरवरी के दूसरे सप्ताह तक तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक रहने की संभावना है। यह तापमान दानों के भराव, चमक और वजन बढ़ाने के लिए अनुकूल माना जाता है। संतुलित मौसम के कारण इस वर्ष दानों की गुणवत्ता भी बेहतर रहने की उम्मीद है।
आज का किसान पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं है। इस सीजन में बड़ी संख्या में किसानों ने जलवायु-सहिष्णु (क्लाइमेट रेजिलिएंट) गेहूं किस्मों को अपनाया है, जो अचानक बढ़ते तापमान को सहन करने में सक्षम हैं। इससे फसल पर मौसमीय जोखिम का प्रभाव कम हुआ है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग, सूक्ष्म पोषक तत्वों का समावेश और आधुनिक सिंचाई तकनीकों जैसे ड्रिप व स्प्रिंकलर सिस्टम ने उत्पादन लागत घटाने के साथ पौधों की सेहत सुधारी है।
यदि अगले कुछ सप्ताह तक मौसम अनुकूल बना रहता है, तो वर्ष 2025-26 में देश गेहूं उत्पादन के पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है। अधिक उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होगी और देश का बफर स्टॉक भी मजबूत होगा। इसका सकारात्मक प्रभाव बाजार में आटे की कीमतों की स्थिरता पर पड़ेगा और भारत वैश्विक स्तर पर एक सशक्त खाद्य निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
FAQs:
1. इस वर्ष गेहूं का कुल रकबा कितना है?
इस सीजन में गेहूं का कुल रकबा लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर है।
2. फरवरी का तापमान क्यों महत्वपूर्ण है?
फरवरी का संतुलित तापमान दानों के भराव और गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
3. क्या इस बार रिकॉर्ड उत्पादन संभव है?
अनुकूल मौसम और बढ़ते रकबे को देखते हुए रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना मजबूत है।
4. जलवायु-सहिष्णु किस्मों का क्या लाभ है?
ये किस्में अचानक तापमान वृद्धि को सहन कर सकती हैं, जिससे फसल सुरक्षित रहती है।
5. किसानों को अधिक लाभ कैसे मिलेगा?
अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और स्थिर बाजार भाव से किसानों की आय में वृद्धि होगी।