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रबी फसलों के लिए कृषि एडवाइजरी जारी: गेहूं, राई, मक्का और सब्जियों को लेकर किसानों के लिए जरूरी सलाह

रबी फसलों की कृषि एडवाइजरी
रबी फसलों की कृषि एडवाइजरी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने दिसंबर महीने के लिए रबी फसलों की कृषि एडवाइजरी जारी की है। इसमें गेहूं की पछेती बुआई, राई और मक्का की फसल प्रबंधन, टमाटर में लगने वाले फल छेदक कीट और सब्जियों की खेती को लेकर किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

राज्य में जहां एक ओर पछेती गेहूं की बुआई अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर अगेती रबी फसलों में सिंचाई, उर्वरक छिड़काव और अन्य कृषि कार्य जारी हैं। इसी बीच तापमान में गिरावट के साथ सर्दी भी बढ़ने लगी है, जिससे कई फसलों में ठंड और रोगों का खतरा बढ़ गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दी है।

पछेती गेहूं की बुआई समय पर करें, नहीं तो घट सकती है पैदावार:

बीएयू सबौर के कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की बुआई को लेकर किसानों को विशेष रूप से सचेत किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन किसानों ने अभी तक पछेती गेहूं की बुआई नहीं की है, वे इसे 25 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूरा कर लें। अधिकतम दो से तीन दिन की देरी भी गेहूं की उपज पर नकारात्मक असर डाल सकती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि पहली सिंचाई के बाद गेहूं की खड़ी फसल में चौड़ी और संकरी पत्ती वाले खरपतवारों की रोकथाम हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 33 ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं मेट्सल्फ्यूरान 20 ग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

राई और मक्का की फसल में इन बातों का रखें विशेष ध्यान:

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन खेतों में राई की फसल 20 से 25 दिन की हो चुकी है, वहां निकौनी और बछनी कर पौधे से पौधे की दूरी 12 से 15 सेंटीमीटर बनाए रखें। इससे पौधों को बेहतर पोषण मिलेगा और उपज में सुधार होगा।वहीं, अगात बोई गई रबी मक्का की 50 से 55 दिन की फसल में किसान 50 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की मात्रा का प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही मिट्टी चढ़ाने का कार्य शुरू करने और फसल की नियमित निगरानी करने की भी सलाह दी गई है।

टमाटर में फल छेदक कीट से रहें सतर्क:

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय टमाटर की फसल में फल छेदक कीट का प्रकोप अधिक देखने को मिल रहा है। यह कीट फल के अंदर घुसकर उसे पूरी तरह नुकसान पहुंचाता है। इसकी रोकथाम के लिए खेत में पक्षी बसेरा लगाना उपयोगी बताया गया है।

यदि कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो सबसे पहले प्रभावित फलों की तुड़ाई कर उन्हें नष्ट करें। इसके बाद स्पिनोसैड 48 ई.सी. की 1 मिलीलीटर मात्रा को 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

प्याज और लहसुन की खेती के लिए भी जरूरी सलाह: वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि प्याज की नर्सरी 50 से 55 दिन की हो चुकी है, तो यह पौध रोपाई के लिए उपयुक्त समय है। वहीं, किसान इस अवधि में लहसुन की फसल में निराई-गुड़ाई का कार्य भी शुरू कर सकते हैं, जिससे फसल की बढ़वार बेहतर होगी।

FAQs:

Q1. पछेती गेहूं की बुआई की अंतिम तारीख क्या है?
A. 25 दिसंबर तक बुआई पूरी करना जरूरी है।

Q2. गेहूं में खरपतवार नियंत्रण के लिए कौन-सी दवा उपयोग करें?
A. सल्फोसल्फ्यूरान और मेट्सल्फ्यूरान का छिड़काव करें।

Q3. रबी मक्का में नाइट्रोजन कब दें?
A. 50–55 दिन की अवस्था में 50 किग्रा/हेक्टेयर।

Q4. टमाटर में फल छेदक कीट से कैसे बचाव करें?
A.  प्रभावित फल हटाएं और स्पिनोसैड का छिड़काव करें।

Q5. प्याज की पौध रोपाई का सही समय क्या है?
A.  50–55 दिन पुरानी नर्सरी रोपाई के लिए उपयुक्त है।

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