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डिजिटल क्रांति से सशक्त हो रही भारतीय कृषि: 8.48 करोड़ किसान आईडी, 28.5 करोड़ खेतों का सर्वे

डिजिटल कृषि भारत 2026
डिजिटल कृषि भारत 2026

देश में कृषि क्षेत्र तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए सरकार ने एग्रीस्टैक, डिजिटल फसल सर्वेक्षण, किसान आईडी, एआई आधारित परामर्श प्रणाली और ड्रोन तकनीक जैसी पहलों को मजबूत आधार दिया है। 4 फरवरी 2026 तक 8.48 करोड़ से अधिक किसान आईडी जारी किए जा चुके हैं, जबकि खरीफ 2025 में 604 जिलों में 28.5 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल सर्वेक्षण किया गया। इन पहलों के जरिए न केवल खरीद, बीमा, ऋण और आपदा राहत जैसी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी हुई हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि को अधिक सक्षम, सटीक और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। 

8.48 करोड़ किसानों को जारी हुई किसान आईडी:

एग्रीस्टैक एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) है, जिसमें कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन मुख्य डेटाबेस शामिल हैं किसान रजिस्टर, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसलों का रजिस्टर। इनका निर्माण और रखरखाव राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। यह प्रणाली किसानों की पहचान, भूमि रिकॉर्ड और फसल विवरण के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल स्रोत उपलब्ध कराती है।

किसान आईडी के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खरीद, कृषि ऋण, इनपुट वितरण और आपदा राहत जैसी योजनाओं का प्रभावी एकीकरण संभव हुआ है। 4 फरवरी 2026 तक देशभर में 8.48 करोड़ से अधिक किसान आईडी जारी की जा चुकी हैं।

खरीफ 2025 में 28.5 करोड़ खेतों का रिकॉर्ड सर्वे:

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) के माध्यम से खेत स्तर पर फसलों की जानकारी एकत्र की जा रही है, जिससे विभिन्न मौसमों में बुवाई के पैटर्न का सटीक आकलन संभव हो रहा है। इससे खरीद, उर्वरक आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिल रही है। खरीफ 2025 के दौरान यह सर्वेक्षण 604 जिलों में आयोजित किया गया, जिसमें 28.5 करोड़ से अधिक खेतों को शामिल किया गया।

एग्रीस्टैक मॉडल से मजबूत हुई कृषि व्यवस्था:

महाराष्ट्र ने एग्रीस्टैक का उपयोग योजना कार्यान्वयन, आपदा राहत, एआई आधारित सलाह और ऋण सुविधा के लिए प्रभावी रूप से किया है। खरीफ 2025 में फसल नुकसान की भरपाई के रूप में 89 लाख किसानों को 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ ने एमएसपी आधारित धान खरीद में किसान आईडी और डिजिटल फसल सर्वेक्षण को लागू किया, जिससे एक ही सीजन में 32 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला। इससे पारदर्शिता, फसल सत्यापन और भुगतान की समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

किसान ई-मित्र: एआई आधारित वॉइस चैटबॉट:

किसान ई-मित्र एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वॉइस चैटबॉट है, जिसे पीएम-किसान योजना से जुड़े सवालों के समाधान के लिए विकसित किया गया है। यह 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में यह प्रतिदिन औसतन 8,000 से अधिक प्रश्नों का उत्तर देता है और अब तक 95 लाख से अधिक प्रश्नों का समाधान कर चुका है।

राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली: जलवायु परिवर्तन से बढ़ते कीट प्रकोप से निपटने के लिए यह प्रणाली एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग करती है। इससे समय रहते कीट हमलों की पहचान संभव होती है और फसल बचाव के उपाय किए जा सकते हैं। इस प्रणाली का उपयोग 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ता कर रहे हैं। वर्तमान में यह 65 फसलों और 400 से अधिक कीटों की निगरानी कर रही है।

नमो ड्रोन दीदी योजना: सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना को स्वीकृति दी है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक के लिए 1,261 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना, उत्पादकता बढ़ाना और लागत कम करना है। साथ ही महिलाओं को ड्रोन सेवा प्रदाता बनाकर उनकी आय में वृद्धि करना भी इसका लक्ष्य है। प्रमुख उर्वरक कंपनियों ने अब तक 500 ड्रोन वितरित किए हैं। बेंगलुरु स्थित एडीआरटीसी के अध्ययन के अनुसार, ड्रोन अपनाने से एसएचजी की आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी है।

बीज प्रामाणिकता एवं समग्र सूचीकरण (साथी): ‘साथी’ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो देशभर में बीज उत्पादन, गुणवत्ता प्रमाणन, वितरण और ट्रैकिंग की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है। इसके तहत राष्ट्रीय बीज ग्रिड (NSG) स्थापित किया गया है, जो सभी बीज हितधारकों को एकीकृत डिजिटल मंच पर जोड़ता है।

डिजिटल कृषि से जुड़ी हर बड़ी अपडेट और सरकारी योजना की सटीक जानकारी के लिए Khetivyapar किसानों का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है।

FAQs:

1. एग्रीस्टैक क्या है?
एग्रीस्टैक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो किसान डेटा, भूमि रिकॉर्ड और फसल विवरण को एकीकृत करता है।

2. किसान आईडी क्यों जरूरी है?
किसान आईडी से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिलता है।

3. डिजिटल फसल सर्वेक्षण का क्या लाभ है?
यह फसल पैटर्न का सटीक डेटा देता है, जिससे खरीद और आपूर्ति बेहतर होती है।

4. नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है?
यह योजना महिला SHG को ड्रोन उपलब्ध कराकर कृषि सेवाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाती है।

5. किसान ई-मित्र कैसे मदद करता है?
यह एआई आधारित वॉइस चैटबॉट किसानों के सवालों का त्वरित समाधान देता है।

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