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Mission Mausam: क्या है सरकार का मास्टरप्लान? अब नहीं होगी पूर्वानुमान में गलती

Mission Mausam (मिशन मौसम)
Mission Mausam (मिशन मौसम)

सरकार ने देश की मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए उन्नत तकनीक आधारित मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया है। इस पहल में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान और राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र मिलकर काम कर रहे हैं। विभिन्न स्रोतों से डेटा का एकीकृत विश्लेषण कर गंभीर मौसम घटनाओं के अधिक सटीक और समयपूर्व पूर्वानुमान संभव बनाए जा रहे हैं। इसी दिशा में “मिशन मौसम” शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य भारत को जलवायु-स्मार्ट और मौसम-तैयार राष्ट्र बनाना है।

अत्याधुनिक रडार और ‘मिथुना-एफएस’ प्रणाली से बढ़ी सटीकता:

परियोजना के तहत आधुनिक रडार और निगरानी प्रणालियाँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे भारी वर्षा, लू, चक्रवात और अन्य चरम मौसम घटनाओं का समय पर पूर्वानुमान दिया जा सके। नई “मिथुना-एफएस” प्रणाली 12 किमी वैश्विक रिज़ॉल्यूशन पर कार्य करती है और वायुमंडल, महासागर, भू-सतह व समुद्री बर्फ के संयुक्त विश्लेषण से भविष्यवाणी करती है। इसमें मानसून-चक्रवात के लिए 4 किमी क्षेत्रीय मॉडल तथा शहरी कोहरे व वायु गुणवत्ता के लिए 330 मीटर का सूक्ष्म मॉडल शामिल है। इससे वर्षा, तापमान और दृश्यता पूर्वानुमान में त्रुटियाँ कम हुई हैं और पिछले दशक में गंभीर मौसम पूर्वानुमान की सटीकता 30–40% तक बढ़ी है।

‘मौसमग्राम’ प्लेटफॉर्म से गाँव-स्तर तक जानकारी:

नागरिकों को स्थानीय स्तर पर सटीक जानकारी देने के लिए “मौसमग्राम” प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। यह सेवा 36 घंटे तक प्रति घंटे, पाँच दिनों तक तीन-घंटे अंतराल और दस दिनों तक छह-घंटे अंतराल का पूर्वानुमान प्रदान करती है। उपयोगकर्ता पिनकोड या स्थान के नाम से अपने क्षेत्र का मौसम जान सकते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम जागरूकता बढ़ी है।

एआई और मशीन लर्निंग से स्मार्ट चेतावनी प्रणाली:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग तकनीकों के उपयोग से मौसम सेवाएँ अधिक उन्नत हो रही हैं। एआई मॉडल चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने, वर्षा का सूक्ष्म विश्लेषण करने और शहरों के लिए त्वरित पूर्वानुमान तैयार करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इससे चेतावनियाँ अधिक विश्वसनीय, तेज़ और प्रभावी बन रही हैं।

किसानों के लिए कृषि-मौसम सलाह सेवा का विस्तार:

कृषि क्षेत्र के लिए यह पहल बेहद उपयोगी साबित हो रही है। किसानों को वास्तविक समय मौसम अपडेट देने हेतु ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना संचालित है, जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालय सहयोग कर रहे हैं। देश के 127 कृषि-जलवायु क्षेत्रों को कवर करने वाली 130 इकाइयाँ सप्ताह में दो बार किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग और कटाई से संबंधित सलाह देती हैं।

मल्टी-चैनल सिस्टम से लाखों किसानों तक अलर्ट:

लगभग 55 लाख किसानों तक एसएमएस, टीवी, इंटरनेट और मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम अलर्ट पहुँचाए जा रहे हैं। ‘मेघदूत’ और ‘मौसम’ ऐप से किसान स्थान-विशिष्ट जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 21 राज्यों के आईटी प्लेटफॉर्म भी इस सेवा को मजबूत बना रहे हैं।

पंचायत स्तर तक पूर्वानुमान से बढ़ी आपदा तैयारी:

हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारी और कृषि योजना दोनों को मजबूती मिली है। कुल मिलाकर उन्नत तकनीक, डेटा एकीकरण और संस्थागत समन्वय के कारण भारत की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली तेज़ी से अधिक सटीक, सुलभ और प्रभावी बन रही है, जो नागरिक सुरक्षा और किसान समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

FAQs:

1. मौसमग्राम प्लेटफॉर्म क्या है?
यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो गाँव-स्तर तक सटीक मौसम पूर्वानुमान और अलर्ट प्रदान करता है।

2. मिथुना-एफएस प्रणाली की खासियत क्या है?
यह 12 किमी वैश्विक रिज़ॉल्यूशन पर काम करती है और वायुमंडल, महासागर, भू-सतह व समुद्री बर्फ के संयुक्त डेटा का विश्लेषण करती है।

3. Khetivyapar किसानों को कैसे मदद करता है?
यह किसानों को कृषि-मौसम सलाह, बुवाई, सिंचाई और कटाई संबंधी सुझाव प्रदान करता है।

4. एआई और मशीन लर्निंग का मौसम पूर्वानुमान में क्या योगदान है?
AI मॉडल चक्रवात की तीव्रता और वर्षा का सटीक विश्लेषण कर समय पर चेतावनियाँ देने में सहायक हैं।

5. पंचायती राज मंत्रालय किस तरह मदद करता है?
यह ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराकर आपदा प्रबंधन और स्थानीय कृषि योजना को मजबूत करता है।

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