केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री ने राज्यसभा में सरकार की कृषि नीतियों पर जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान प्रशासन का लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि किसान, गांव और गरीब का समग्र विकास है। उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि जीवनदाता है और इसी दृष्टिकोण के साथ AIF, MSP, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, पीएम-कुसुम, पराली प्रबंधन और फसल विविधीकरण जैसी योजनाएँ जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
माननीय शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश से देशभर में व्यापक कृषि संरचनाएँ विकसित की गई हैं। इनमें 44,243 कस्टम हायरिंग सेंटर, 25,854 प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर, 25,565 फार्म हार्वेस्ट ऑटोमेशन यूनिट, 17,779 वेयरहाउस, 4,201 सॉर्टिंग-ग्रेडिंग यूनिट, 3,549 स्मार्ट एग्रीकल्चर सुविधाएँ और 2,827 कोल्ड स्टोरेज शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के कारण फल, सब्जी और अनाज की बर्बादी में लगभग 5% से 15% तक कमी आई है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु सहित पूरे भारत में कृषि सुधार समान रूप से लागू किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पंजाब में AIF के तहत 32,014 प्रस्ताव प्राप्त हुए, जहाँ ₹7,425.98 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹11,351.54 करोड़ की परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। इन परियोजनाओं से भंडारण, प्रसंस्करण और मशीनीकरण में वृद्धि हुई तथा प्रत्येक परियोजना से औसतन 4 से 9 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला।
MSP के विषय में मंत्री ने कहा कि सरकार उत्पादन लागत पर 50% लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य तय कर रही है। दलहन खरीद के आंकड़े बताते हुए उन्होंने कहा कि पहले एक दशक में लगभग 6 लाख मीट्रिक टन दलहन खरीदा गया था, जबकि हाल के वर्षों में यह बढ़कर लगभग 1 करोड़ 92 लाख मीट्रिक टन हो गया है। तुअर, मसूर और उड़द की 100% खरीद सुनिश्चित करने के लिए NAFED और NCCF को अधिकृत किया गया है, जबकि अन्य दलहनों की खरीद PM-AASHA योजना के तहत की जाएगी। भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में भेजा जाएगा।
मंत्री ने बताया कि देश में दलहन का क्षेत्रफल लगभग 38% होने के बावजूद उत्पादन केवल 28% था। कम उत्पादकता, पुराने बीज और जलवायु जोखिम के कारण किसान दलहन की खेती से दूर हो रहे थे। वर्ष 2016 तक भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल आयातक था, लेकिन उन्नत तकनीक, बेहतर किस्मों और नीति समर्थन से उत्पादन बढ़ा और 2021-22 में 27.30 मिलियन टन का रिकॉर्ड स्तर हासिल हुआ।
किसानों के लिए सहायता और प्रोत्साहन प्रावधान:
‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ के तहत उन्नत बीज विकास, बीज प्रतिस्थापन दर में वृद्धि, किसानों का प्रशिक्षण, क्लस्टर आधारित खेती, मुफ्त मिनी किट, प्रदर्शन प्लॉट, प्रति हेक्टेयर ₹10,000 तक अनुदान, पारदर्शी खरीद व्यवस्था तथा दाल मिल स्थापना पर ₹25 लाख तक सहायता दी जा रही है। इन पहलों का उद्देश्य उत्पादन लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
मध्य प्रदेश में बहुफसली खेती का विस्तार: उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में पहले जहाँ एक ही फसल ली जाती थी, अब कई क्षेत्रों में साल में तीन-तीन फसलें ली जा रही हैं, जिनमें मूंग प्रमुख है। सिंचाई सुविधाओं और सरकारी समर्थन के कारण गर्मी के मौसम में राज्य में लगभग 20 लाख मीट्रिक टन मूंग उत्पादन हो रहा है। किसानों को पारदर्शी खरीद और ‘भावांतर भुगतान’ जैसी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030-31 तक देश दलहन उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाए।
FAQs:
Q1: AIF का लाभ किसान कैसे ले सकते हैं?
A1: किसान Khetivyapar पर रजिस्टर होकर नजदीकी AIF परियोजनाओं और फंडिंग विकल्पों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
Q2: MSP के तहत कौन-कौन सी फसलें खरीदी जाती हैं?
A2: MSP के तहत मुख्यतः धान, गेहूँ, तुअर, मसूर, उड़द और अन्य दलहन खरीदी जाती हैं।
Q3: दलहन आत्मनिर्भरता मिशन क्या है?
A3: यह मिशन किसानों को उन्नत बीज, प्रशिक्षण, मिनी किट और अनुदान प्रदान करके उत्पादन बढ़ाने का काम करता है।
Q4: मध्य प्रदेश में बहुफसली खेती का क्या लाभ है?
A4: इससे किसान साल में तीन-तीन फसलें ले सकते हैं, जिससे उनकी आय और खाद्य सुरक्षा बढ़ती है।
Q5: Khetivyapar का उद्देश्य क्या है?
A5: Khetivyapar किसानों को कृषि योजनाओं, बाजार दरों और प्रशिक्षण की जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने में मदद करता है।