कपास बाजार में अचानक आई तेजी ने किसानों को चौंका दिया है। सीजन की शुरुआत में जहां कपास के भाव सामान्य बने हुए थे, वहीं अब कुछ ही समय में कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। बाजार में सीमित आवक, मजबूत मांग और वैश्विक कारकों के चलते कपास के दाम 8,500 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं। इस तेजी से किसानों को न केवल MSP से अधिक मूल्य मिल रहा है, बल्कि कपास एक बार फिर मुनाफे की फसल के रूप में उभरती नजर आ रही है।
सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए मध्यम धागे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,790 रुपये और लंबे धागे वाली कपास का MSP 8,100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके बावजूद अकोला जिले में निजी व्यापारी इससे अधिक दाम दे रहे हैं। कई मंडियों में किसान 8,400 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक कपास बेच रहे हैं। बेहतर भाव मिलने के कारण किसान सरकारी एजेंसी सीसीआई के बजाय निजी व्यापारियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कपास के दाम बढ़ने के पीछे कई अहम कारण हैं। इस साल कपास की बुवाई का रकबा कम रहा, जिससे बाजार में आवक भी अपेक्षा से कम है। इसके अलावा कपास के आयात पर दोबारा इंपोर्ट ड्यूटी लगने से विदेशी कपास की आपूर्ति घट गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उत्पादन कम रहने की आशंका जताई जा रही है।
कपास बीज महंगा, बाजार में तेजी का माहौल:
कपास के बीज यानी सरकी के दामों में भी तेज़ बढ़ोतरी हुई है। जहां पहले सरकी 3,000 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी, वहीं अब इसके भाव 4,000 रुपये के पार पहुंच गए हैं। सरकी के महंगे होने से कपास की कुल कीमत पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। व्यापारी भविष्य में कमी की आशंका के चलते सरकी और रूई का स्टॉक कर रहे हैं, जिससे दाम और चढ़ रहे हैं।
व्यापारियों की राय: कपास व्यापारियों का कहना है कि ब्राजील और चीन जैसे बड़े उत्पादक देशों में कपास की बुवाई कम होने की खबरें हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर कमी की आशंका बढ़ गई है। वहीं, व्यापारी राजकुमार रूंगटा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादन घटने की उम्मीद और सरकी के बढ़ते दामों का सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। अकोट मंडी के व्यापारी धीरंजन भी मानते हैं कि रूई और धागे की मांग अच्छी बनी हुई है और बाहर से आवक कम होने से भाव मजबूत हैं।
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