वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में एलपीजी की कुल खपत का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का है, इसलिए राज्य सरकार ने रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया है। पेट्रोलियम कंपनियों और रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी क्षमता के साथ एलपीजी का उत्पादन करें और घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दें, ताकि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
मध्यप्रदेश में एलपीजी की कुल खपत का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का है। इसी वजह से राज्य सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। पेट्रोलियम कंपनियों और रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ एलपीजी का उत्पादन करें और घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें।
देशभर में लगभग 19.1 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें बड़ी संख्या घरेलू उपयोगकर्ताओं की है। आपूर्ति में कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, लेकिन सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थिति की लगातार निगरानी के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम और गैस से जुड़े मामलों की समीक्षा हेतु मंत्रियों की दो कमेटियां गठित की हैं। ये कमेटियां पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कीमतों की स्थिति का आकलन करेंगी।
समय-समय पर बैठक कर आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर त्वरित निर्णय लिए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो और आम नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
संभावित गैस संकट की आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य में मंत्रियों की दो कमेटियां बनाकर गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर रखने का निर्णय लिया गया है। साथ ही एलपीजी उत्पादन कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी क्षमता से एलपीजी का उत्पादन करें और अन्य बाय-प्रोडक्ट पर ध्यान न दें। कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं से फिलहाल संयम बरतने की अपील की गई है। प्राथमिकता के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को ही कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, जबकि अन्य उपभोक्ताओं से स्थानीय प्रशासन के माध्यम से समन्वय किया जाएगा।
सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव:
एलपीजी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पहले उपभोक्ता सिलेंडर प्राप्त करने के तुरंत बाद अगला सिलेंडर बुक करा सकते थे, लेकिन अब कई गैस कंपनियों ने इस अवधि को बढ़ाकर लगभग 25 दिन कर दिया है। वहीं कुछ कंपनियों में यह समय सीमा 30 दिन तक निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गैस की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखना और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
सीएम ने की पेट्रोल-डीजल और गैस आपूर्ति की समीक्षा:
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेट्रोल-डीजल तथा रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप ने कहा कि छोटे उद्योग काफी हद तक कमर्शियल सिलेंडरों पर निर्भर हैं और यदि उन्हें नियमित आपूर्ति नहीं मिली तो परेशानी बढ़ सकती है।
बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल पेट्रोल-डीजल का लगभग 10 दिनों का और पीएनजी-सीएनजी का करीब 7 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। रोजाना आपूर्ति जारी है। हालांकि एलपीजी को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, ताकि रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए गए प्रमुख निर्देश:
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