केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चैाहान ने लोकसभा में कहा कि देश का कृषि क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया का “फूड बास्केट” बनाना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की कई योजनाओं को राज्य सरकार द्वारा सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। इससे वहां के गरीब किसान इन योजनाओं के लाभ से वंचित रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसानों को नुकसान होता है और जनता भविष्य में इसका जवाब देगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि देश में इस समय रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हो रहा है। भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर लगभग 357 मिलियन टन के स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में भारत ने 150 मिलियन टन से अधिक उत्पादन के साथ चीन को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही गेहूं, सरसों, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों में भी रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत को पीएल-480 योजना के तहत गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज देश के गोदाम गेहूं और चावल से भरे हुए हैं। स्थिति यह है कि सरकार को भंडारण की चिंता करनी पड़ रही है, जबकि दुनिया भारत की कृषि नीतियों और किसानों की मेहनत की सराहना कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दालों, फल और सब्जियों के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है। देश में दालों का उत्पादन लगभग 19 मिलियन टन से बढ़कर 25–26 मिलियन टन के आसपास पहुंच गया है। इसके अलावा बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक हो चुका है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं और देश में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता भी बढ़ी है।
Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती मिशन और जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत नदियों, विशेषकर Ganges River के दोनों किनारों पर लगभग 5 किलोमीटर क्षेत्र में रसायनमुक्त खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देशभर में 1 करोड़ से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित और जागरूक किया गया है तथा लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक मुक्त खेती की शुरुआत हो चुकी है। उनका कहना है कि यदि प्राकृतिक खेती सही तरीके से अपनाई जाए तो उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि कई मामलों में बढ़ भी सकता है।
स्थानीय संसाधनों पर आधारित खेती का मॉडल:
कृषि मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती में किसानों को प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि वे रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के बजाय स्थानीय संसाधनों पर आधारित पारंपरिक भारतीय पद्धतियों को अपनाएं। इस मॉडल में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने घनजीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक घोलों का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही इंटरक्रॉपिंग प्रणाली के माध्यम से एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
हरित क्रांति से भी तेज़ गति से बढ़ रहा कृषि क्षेत्र:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत का कृषि क्षेत्र हरित क्रांति के दौर से भी तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2014-15 के मुकाबले देश के खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40–42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि दलहन, तिलहन, बागवानी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी लगातार नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जिससे किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों मजबूत हो रही हैं।
भारत बनेगा दुनिया का ‘फूड बास्केट’: अंत में Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi का विज़न है कि भारत केवल अपने नागरिकों की खाद्य जरूरतें ही पूरी न करे, बल्कि “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा में भी योगदान दे। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन, मजबूत भंडारण क्षमता और बढ़ते निर्यात अवसरों के कारण भारत अब वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है और आने वाले वर्षों में देश की यह भूमिका और भी मजबूत होगी।
FAQs:
1. भारत का वर्तमान खाद्यान्न उत्पादन कितना है?
भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 357 मिलियन टन तक पहुंच चुका है।
2. चावल उत्पादन में भारत का स्थान क्या है?
भारत 150 मिलियन टन से अधिक चावल उत्पादन के साथ दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
3. प्राकृतिक खेती को सरकार कैसे बढ़ावा दे रही है?
सरकार किसानों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और रसायनमुक्त खेती के लिए प्रोत्साहन दे रही है।
4. दालों का उत्पादन कितना बढ़ा है?
दालों का उत्पादन 19 मिलियन टन से बढ़कर लगभग 25–26 मिलियन टन हो गया है।
5. भारत को “फूड बास्केट” बनाने का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य है कि भारत केवल अपने नागरिकों की जरूरत ही नहीं बल्कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा में भी योगदान दे।