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प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा: भोपाल आत्मा गवर्निंग बोर्ड की बैठक में ठोस निर्णय

भोपाल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
भोपाल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

आत्मा कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम, जिला भोपाल की गवर्निंग बोर्ड बैठक का आयोजन कलेक्टर श्री कौशलेंद्र सिंह के निर्देशन में एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती इला तिवारी की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में जिले में कृषि विस्तार गतिविधियों को सशक्त बनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने को लेकर अहम निर्णय लिए गए।

कृषि विस्तार और प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस:

कृषि उप संचालक एवं आत्मा गवर्निंग बोर्ड की सदस्य सचिव श्रीमती सुमन प्रसाद ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रमों में शासकीय विभागों के साथ-साथ अशासकीय संगठनों की भागीदारी बढ़ाना है। इसके अंतर्गत कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन जैसे सहायक व्यवसायों, प्राकृतिक खेती, सामूहिक प्रयासों और किसानों की क्षमता विकास पर जोर दिया गया। साथ ही महिला कृषक समूहों को संगठित कर कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने और किसानों, कृषि वैज्ञानिकों एवं विस्तार तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर सहमति बनी।

प्राकृतिक व जैविक खेती को मिलेगा प्रशिक्षण और बाजार समर्थन:

जिला पंचायत सीईओ श्रीमती इला तिवारी ने निर्देश दिए कि भोपाल जिले में प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और “एक बगिया माँ के नाम” योजना से जुड़े किसानों एवं महिलाओं को बेहतर और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र, भोपाल के वैज्ञानिकों द्वारा फील्ड स्तर पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

इसके साथ ही, मैदानी स्तर पर कृषक संगोष्ठियों का आयोजन कर जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों, किसान समूहों एवं महिला कृषकों को शहर में संचालित राग भोपाली हाट बाजार से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाई जा सके। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के निर्देश भी दिए गए।

गौशालाओं से जुड़ेंगे प्राकृतिक खेती करने वाले किसान:

बैठक में जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को गौशालाओं से जोड़ने के भी निर्देश दिए गए, जिससे उन्हें गोबर आधारित जैविक इनपुट आसानी से उपलब्ध हो सकें और खेती की लागत में कमी आए।

जिले में 10 प्राकृतिक खेती क्लस्टर गठित:

भोपाल जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 1 से 3 ग्राम पंचायतों को मिलाकर प्राकृतिक खेती क्लस्टर गठित किए गए हैं। वर्तमान में जिले में 10 क्लस्टरों के अंतर्गत 1,250 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और अनुसंधान सहयोग: किसानों को भारत सरकार के किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती अभियान के तहत प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए हैदराबाद स्थित मैनेज (MANAGE), राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र गाजियाबाद, बायो-रिसर्च सेंटर, कृषि महाविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है।

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