महंगे रासायनिक और जैविक खाद पर बढ़ते खर्च से राहत पाने के लिए किसान अब तेजी से हरी खाद की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। हरी खाद न केवल मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाती है, बल्कि फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार करती है। यही कारण है कि देशभर में किसान बड़े पैमाने पर इस प्राकृतिक विकल्प को अपना रहे हैं।
वर्तमान समय में किसान रसायन-मुक्त खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। फसलों के बेहतर विकास के लिए जैविक खाद और प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ रहा है। हरी खाद (Green Manure) इसी दिशा में एक प्रभावी समाधान है, जिसमें ढैंचा, मूंग जैसी विशेष फसलों को उगाकर खेत में ही जुताई के माध्यम से मिट्टी में मिला दिया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और उसकी उर्वरक शक्ति मजबूत होती है।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) हरी खाद के बीज का किट ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। किसान एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से यह बीज किट खरीदकर सीधे अपने घर मंगवा सकते हैं। इससे न केवल खाद पर खर्च कम होता है, बल्कि उत्पादन लागत घटाकर बेहतर मुनाफा भी कमाया जा सकता है।
राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा उपलब्ध हरी खाद बीज किट में ढैंचा, ग्वार, सरसों, उड़द, भिंडी, मेथी और गेंदा शामिल हैं। इसके अलावा किसान अपनी भूमि और फसल चक्र के अनुसार अन्य उपयुक्त दलहनी फसलों का भी चयन कर सकते हैं। टिकाऊ खेती और अच्छी गुणवत्ता वाली उपज के लिए हरी खाद का उपयोग बेहद आवश्यक माना जाता है।
जो किसान हरी खाद की खेती शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए 3 किलो 800 ग्राम का बीज किट राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर फिलहाल 833 रुपये में उपलब्ध है। इस किट के माध्यम से किसान आसानी से हरी खाद की खेती कर उत्पादन बढ़ा सकते हैं।
हरी खाद के प्रमुख फायदे:
जैविक खेती में हरी खाद की भूमिका बेहद अहम है। इसके उपयोग से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है और मिट्टी के कटाव पर भी नियंत्रण रहता है। हरी खाद मिट्टी को जैविक नाइट्रोजन प्रदान करती है, जो फसलों के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है। साथ ही इससे मिट्टी में जैविक गतिविधियां बढ़ती हैं, जिससे रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है और खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिलती है।
हरी खाद की खेती कैसे करें: हरी खाद की खेती के लिए ढैंचा और ग्वार जैसी फसलें उपयुक्त मानी जाती हैं, क्योंकि ये तेजी से बढ़ती हैं और नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होती हैं। इसकी बुवाई रबी फसल की कटाई के बाद और खरीफ फसल से पहले करना सबसे अच्छा रहता है, जब खेत खाली होते हैं। खेती के लिए पहले एक बार जुताई कर खेत को समतल करें। इसके बाद बीजों की बुवाई छिटकाव या पंक्तियों में की जा सकती है। ढैंचा की खेती के लिए प्रति एकड़ लगभग 20 से 25 किलो बीज पर्याप्त होता है।
FAQs:
Q1. हरी खाद क्या है?
हरी खाद ऐसी फसलें होती हैं जिन्हें उगाकर मिट्टी में मिलाया जाता है ताकि उर्वरता बढ़े।
Q2. हरी खाद से कौन-सा पोषक तत्व मिलता है?
हरी खाद मुख्य रूप से मिट्टी को जैविक नाइट्रोजन प्रदान करती है।
Q3. हरी खाद बीज किट कहां से खरीदें?
राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट और Khetivyapar जैसे प्लेटफॉर्म से।
Q4. हरी खाद की सबसे अच्छी फसल कौन-सी है?
ढैंचा और ग्वार को सबसे अच्छा माना जाता है।
Q5. हरी खाद से किसान को क्या लाभ है?
खर्च कम होता है, पैदावार बढ़ती है और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ रहती है।