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अल-नीनो वर्ष में मानसून की चाल बदली, कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश, बदलते मानसून में खेती कैसे बचाएं?

अल नीनो का खेती पर असर
अल नीनो का खेती पर असर

दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय देश के कई हिस्सों में सक्रिय बना हुआ है और आगामी कुछ दिनों में मध्य भारत, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा राजस्थान के शेष क्षेत्रों में इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 3 से 5 दिनों के दौरान कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा की स्थिति भी बनी रह सकती है। ऐसे में किसानों को केवल मानसून के आगमन पर निर्भर रहने के बजाय मौसम आधारित खेती की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

अल-नीनो क्या है?

अल-नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री जल के सामान्य से अधिक गर्म होने की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। भारत में अल-नीनो के दौरान कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश, मानसून की धीमी प्रगति, लंबे शुष्क अंतराल तथा कहीं-कहीं अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है और किसानों को मौसम के अनुसार अपनी खेती की रणनीति में बदलाव करना पड़ता है।

अल-नीनो का असर क्यों बढ़ाता है चिंता?

अल-नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जो भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकती है। इसके प्रभाव से कई बार बारिश का वितरण असमान हो जाता है। कहीं अत्यधिक वर्षा होती है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ किसानों को जोखिम प्रबंधन आधारित खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं। 

एक ही फसल पर निर्भर न रहें:

किसानों को पूरे खेत में केवल एक फसल लगाने के बजाय फसल विविधीकरण अपनाना चाहिए। खेत के अलग-अलग हिस्सों में सोयाबीन, मक्का, दालें या अन्य कम अवधि वाली फसलों का चयन किया जा सकता है। पशुपालन करने वाले किसान चारे की व्यवस्था भी पहले से करें ताकि प्रतिकूल मौसम में नुकसान कम हो।

बुवाई से पहले पर्याप्त नमी का इंतजार करें:

कई बार शुरुआती बारिश के बाद किसान जल्दबाजी में बुवाई कर देते हैं, लेकिन यदि बाद में लंबे समय तक वर्षा नहीं होती तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार 15 से 20 दिनों तक पर्याप्त वर्षा होने और खेत में उचित नमी बनने के बाद ही बुवाई करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

नमी संरक्षण से बढ़ सकती है उत्पादकता:

खेत में नमी बनाए रखना अल-नीनो वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। रिज एवं फरो पद्धति, खरपतवार नियंत्रण, समय पर निराई-गुड़ाई और जैविक अवशेषों का उपयोग मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है। एक बार की प्रभावी सिंचाई कई बार हल्की बारिश से अधिक लाभदायक साबित हो सकती है।

बीज दर और पौध संख्या पर रखें विशेष ध्यान:

कम वर्षा की संभावना वाले क्षेत्रों में प्रमाणित बीजों का उपयोग करें और बीज उपचार अवश्य करें। पौधों की उचित संख्या बनाए रखने से फसल का विकास बेहतर होता है। जहां पौध संख्या कम दिखाई दे, वहां समय रहते गैप फिलिंग कर नुकसान को कम किया जा सकता है।

खेत में जल प्रबंधन सबसे जरूरी: यदि कम बारिश हो तो खेत में नमी और पानी का संरक्षण करें, जबकि अधिक बारिश की स्थिति में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। मेड़बंदी, खेत तालाब, वर्षा जल संचयन और ड्रेनेज व्यवस्था जैसी तकनीकें बदलते मौसम में काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं: कम वर्षा वाले वर्षों में अत्यधिक नाइट्रोजन का प्रयोग फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने से फसल की सहनशीलता बढ़ती है।

वैकल्पिक फसलों की रखें तैयारी:

यदि निर्धारित समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो किसानों को कम अवधि वाली वैकल्पिक फसलों पर विचार करना चाहिए। अरहर, मूंग, उड़द, तिल, सरसों, चना तथा अन्य कम पानी वाली फसलें कई क्षेत्रों में बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।

किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह: अल-नीनो जैसे वर्षों में अधिक उत्पादन की बजाय नुकसान को कम करना अधिक महत्वपूर्ण होता है। मौसम पूर्वानुमान, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने वाले किसान बदलते मौसम की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकते हैं।

FAQs:

Q1. अल-नीनो क्या है?
उत्तर: अल-नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री जल के सामान्य से अधिक गर्म होने की प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसका असर भारतीय मानसून पर पड़ सकता है।

Q2. अल-नीनो का किसानों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: इसके कारण कम बारिश, असमान वर्षा, सूखे अंतराल और फसल उत्पादन में गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।

Q3. अल-नीनो के दौरान कौन-सी फसलें बेहतर विकल्प हैं?
उत्तर: मूंग, उड़द, अरहर, तिल, चना और अन्य कम पानी वाली फसलें बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।

Q4. अल-नीनो के समय बुवाई कब करनी चाहिए?
उत्तर: खेत में पर्याप्त नमी बनने और लगातार 15–20 दिन अच्छी वर्षा होने के बाद बुवाई करना उचित रहता है।

Q5. अल-नीनो में सबसे जरूरी कृषि सलाह क्या है?
उत्तर: मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें, जल प्रबंधन करें, फसल विविधीकरण अपनाएं और संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें।

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