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₹3 लाख तक ब्याज मुक्त फसल ऋण: एमपी सरकार ने बदले नियम, किसानों को मिलेगा 12 महीने का अतिरिक्त समय

मध्य प्रदेश किसानों को शून्य ब्याज ऋण योजना
मध्य प्रदेश किसानों को शून्य ब्याज ऋण योजना

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को सस्ती और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर दिए जाने वाले अल्पकालीन फसल ऋण की नई शर्तों को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की गई है।

नई व्यवस्था के लागू होने से किसानों के लिए ऋण लेना और उसका भुगतान करना पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक हो जाएगा। सरकार का उद्देश्य खेती के लिए समय पर पूंजी उपलब्ध कराकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।

खरीफ और रबी ऋण व्यवस्था होगी सरल:

अब तक किसानों को खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग ऋण सीमाओं और भुगतान तिथियों का पालन करना पड़ता था। इससे कई बार किसानों पर समय से पहले ऋण चुकाने का दबाव बन जाता था। नई व्यवस्था के तहत दोनों फसल सीजन के लिए अलग-अलग सीमा के बजाय एक वार्षिक एकल ऋण सीमा निर्धारित की जाएगी। इस सीमा के भीतर किसानों को नकद राशि के साथ-साथ खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों के लिए भी ऋण सुविधा उपलब्ध होगी।

पहली निकासी के बाद मिलेंगे पूरे 12 महीने:

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसानों को ऋण चुकाने के लिए अधिक समय मिलेगा। वार्षिक ऋण सीमा से पहली बार राशि निकालने की तिथि से पूरे 12 महीने तक ऋण अदायगी की सुविधा दी जाएगी। इससे किसानों को फसल उत्पादन, कटाई और विपणन के बाद ऋण भुगतान करने में आसानी होगी तथा आर्थिक दबाव कम होगा।

अब समय पर ऋण चुकाने पर मिलेगा बोनस:

सरकार ने समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की है। अल्पकालीन फसल ऋण पर किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, निर्धारित अवधि के भीतर ऋण चुकाने वाले किसानों को 4 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन ब्याज अनुदान भी मिलेगा। इससे समय पर भुगतान की प्रवृत्ति बढ़ेगी और किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

₹3 लाख तक के ऋण पर नहीं देना होगा ब्याज:

योजना के तहत पात्र किसानों को 3 लाख रुपये तक के अल्पकालीन फसल ऋण पर कोई ब्याज नहीं देना होगा, बशर्ते वे समय पर ऋण का भुगतान करें। यह ब्याज मुक्त ऋण किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, कृषि यंत्रों के किराये और अन्य खेती संबंधी आवश्यकताओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराएगा। इससे खेती की लागत कम करने और कृषि निवेश बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

सहकारी समितियों के माध्यम से मिलती है सुविधा:

राज्य में यह योजना वर्ष 2012-13 से संचालित की जा रही है। इसका संचालन जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किया जाता है। योजना का उद्देश्य किसानों को सुलभ और कम लागत वाला ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें निजी साहूकारों और महंगे कर्ज स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े।

कैसे काम करती है शून्य ब्याज योजना:

हर वर्ष राज्य सरकार योजना के लिए एक आधार ब्याज दर और ऋण भुगतान की अंतिम तिथि निर्धारित करती है। केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली ब्याज सहायता को समायोजित करने के बाद शेष ब्याज राशि का वहन राज्य सरकार ब्याज अनुदान के रूप में करती है। इसी व्यवस्था के कारण किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण की सुविधा उपलब्ध हो पाती है।

लाखों किसानों को मिलेगा सीधा फायदा:

कैबिनेट के इस निर्णय से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। नई व्यवस्था से ऋण प्रक्रिया सरल होगी, भुगतान के लिए अधिक समय मिलेगा और ब्याज का बोझ भी कम होगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से किसानों को समय पर पूंजी उपलब्ध होगी, कृषि निवेश बढ़ेगा, उत्पादन में सुधार आएगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

प्रमुख बातें:

  1. ₹3 लाख तक का फसल ऋण ब्याज मुक्त
  2. पहली निकासी के बाद 12 महीने तक भुगतान की सुविधा
  3. खरीफ और रबी के लिए एकल वार्षिक ऋण सीमा
  4. समय पर भुगतान पर अतिरिक्त 4% प्रोत्साहन
  5. खेती की लागत कम करने और निवेश बढ़ाने पर जोर
  6. लाखों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

FAQs:

Q1. इस योजना में कितना फसल ऋण ब्याज मुक्त है?
A1. किसानों को ₹3 लाख तक का अल्पकालीन फसल ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा।

Q2. ऋण चुकाने के लिए कितना समय मिलेगा?
A2. पहली निकासी के बाद किसानों को पूरे 12 महीने का समय मिलेगा।

Q3. क्या खरीफ और रबी के लिए अलग ऋण सीमा होगी?
A3. नहीं, अब दोनों के लिए एकल वार्षिक ऋण सीमा होगी।

Q4. समय पर भुगतान करने पर क्या लाभ मिलेगा?
A4. किसानों को 1.25% ब्याज अनुदान और 4% अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।

Q5. यह योजना किसके माध्यम से लागू होती है?
A5. यह योजना सहकारी समितियों और जिला सहकारी बैंकों के माध्यम से लागू की जाती है।

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