देश में इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून की संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियों को तेज कर दिया है। संभावित कम वर्षा से फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही हैं। सरकार का कहना है कि संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी कर किसानों की आय और फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
कम वर्षा और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन करने के बाद देश के 315 जिलों को संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में रखा गया है। इनमें 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल किया गया है, जहां सिंचाई सुविधाएं काफी सीमित हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के कई जिले इस सूची में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जिला स्तर पर विशेष तैयारी और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा जिला-विशिष्ट कृषि आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं में स्थानीय जलवायु, उपलब्ध जल संसाधन, फसल पैटर्न और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक फसलों, जल प्रबंधन और अतिरिक्त आय के विकल्पों को शामिल किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर इन योजनाओं को जमीन पर लागू करने और समय-समय पर उनकी समीक्षा करने पर जोर दिया गया है।
संभावित जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। तालाब, खेत तालाब, चेकडैम, स्टॉपडैम, जलाशय और अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण विकास योजनाओं और रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रामीण रोजगार को भी मजबूती मिल सके।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की तैयारी:
सरकार ने वर्षा आधारित क्षेत्रों में फसल रणनीति बदलने पर जोर दिया है। किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों को विशेष प्राथमिकता देने की योजना है। साथ ही मिश्रित खेती और अंतरवर्तीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जोखिम कम किया जा सके और किसानों को आय के कई स्रोत मिल सकें।
बीज, उर्वरक और कृषि आदानों का पर्याप्त भंडार:
खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज भंडार भी सुरक्षित रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर पुनः बुवाई की जा सके। यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसानों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्री मिल सके।
डिजिटल सलाह और कृषि विज्ञान केंद्रों की बड़ी भूमिका:
कृषि विज्ञान केंद्रों और मौसम आधारित सलाह इकाइयों को किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को मौसम, बुवाई और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर सही निर्णय लेने में मदद करना है।
पशुधन और चारे की व्यवस्था पर भी सरकार सतर्क:
कम वर्षा की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की कमी को देखते हुए अग्रिम तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त चारे की आपूर्ति और परिवहन की व्यवस्था की जाएगी। सरकार ने चारे की कालाबाजारी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं।
PMFBY, KCC और PM-KISAN बनेंगे किसानों के तीन सुरक्षा कवच:
सरकार ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे को बढ़ाने, किसान क्रेडिट कार्ड वितरण में तेजी लाने और पीएम-किसान की सहायता राशि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि फसल बीमा, सस्ती ऋण सुविधा और प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से निपटने में महत्वपूर्ण सहयोग दे सकती है।
खाद्य सुरक्षा पर तत्काल कोई खतरा नहीं:
सरकार के अनुसार देश में खाद्यान्न भंडार की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। धान और गेहूं के पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर तत्काल कोई चिंता नहीं है। खरीफ 2026 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है और सरकार का प्रयास है कि कमजोर मानसून की स्थिति में भी उत्पादन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
किसानों को संकट से पहले सुरक्षा देने की तैयारी:
विशेषज्ञों के अनुसार, जल संरक्षण, वैकल्पिक फसलें, बीज एवं उर्वरक प्रबंधन, फसल बीमा और डिजिटल कृषि सलाह जैसी बहुस्तरीय रणनीतियां संभावित अल नीनो प्रभाव से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सरकार की यह अग्रिम तैयारी किसानों की आय, उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
FAQs:
Q1. अल नीनो क्या है और इसका प्रभाव क्या होगा?
अल नीनो एक जलवायु स्थिति है जिससे मानसून कमजोर हो सकता है और वर्षा कम हो सकती है।
Q2. कितने जिलों को प्रभावित क्षेत्र में रखा गया है?
देश के 315 जिलों को संभावित प्रभावित और 111 जिलों को उच्च संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
Q3. सरकार किसानों के लिए क्या तैयारी कर रही है?
सरकार कंटिजेंसी प्लान, जल संरक्षण, बीज-उर्वरक उपलब्धता और डिजिटल सलाह पर काम कर रही है।
Q4. कम पानी वाली कौन सी फसलें बढ़ाई जा रही हैं?
दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों को प्राथमिकता दी जा रही है।
Q5. क्या खाद्य संकट की कोई संभावना है?
नहीं, देश में पर्याप्त खाद्यान्न बफर स्टॉक उपलब्ध है जिससे कोई तत्काल खतरा नहीं है।