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खरीफ 2026 में बदला फसलों का गणित: धान, मूंग और बाजरा की बुवाई बढ़ी, सोयाबीन-कपास का रकबा घटा

खरीफ सीजन 2026 बुवाई अपडेट
खरीफ सीजन 2026 बुवाई अपडेट

देशभर में खरीफ सीजन 2026 की बुवाई धीरे-धीरे गति पकड़ रही है। जून 2026 तक कुल 119.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 1.95 लाख हेक्टेयर अधिक है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि धान, मूंग, बाजरा और मक्का जैसी फसलों का रकबा बढ़ा है, जबकि सोयाबीन और कपास की बुवाई में कमी दर्ज की गई है।

धान की बुवाई में बढ़त, किसानों का रुझान बढ़ा:

देश में धान की बुवाई 12.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.26 लाख हेक्टेयर अधिक है। अच्छी शुरुआती बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों ने धान की बुवाई तेज कर दी है। 

दलहनों में मूंग ने दिखाई तेजी:

दलहन फसलों का कुल रकबा पिछले वर्ष से बढ़ा है। मूंग की बुवाई में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस वर्ष 4.08 लाख हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष से 1.21 लाख हेक्टेयर अधिक है। अरहर की बुवाई भी स्थिर बनी हुई है, जबकि उड़द के रकबे में कमी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन फसलों की बढ़ती मांग और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं का इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

बाजरा और मक्का की ओर बढ़ा किसानों का रुझान:

श्रीअन्न और मोटे अनाजों की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजरा का रकबा लगभग 1.91 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि मक्का की बुवाई में भी 0.35 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की ओर किसानों का बढ़ता रुझान बदलते मौसम और जल संकट की चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोयाबीन और कपास की बुवाई में गिरावट:

तेलहन फसलों में मिश्रित रुझान देखने को मिला है। सोयाबीन की बुवाई में 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है, जबकि मूंगफली और सूरजमुखी का रकबा बढ़ा है। कपास की बुवाई में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इस वर्ष कपास का रकबा 17.13 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.69 लाख हेक्टेयर कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की देरी और बाजार परिस्थितियां इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकती हैं।

गन्ना और जूट की खेती बनी हुई है स्थिर:

गन्ने की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और कुल रकबा 57.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं जूट और मेस्टा फसलों का क्षेत्रफल भी पिछले वर्ष की तुलना में मामूली रूप से बढ़ा है। इन फसलों की स्थिरता से संबंधित राज्यों के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कम पानी वाली फसलों को मिल रहा बढ़ावा:

बदलते मौसम और संभावित कमजोर मानसून को देखते हुए किसानों का रुझान कम अवधि और कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की ओर बढ़ रहा है। बाजरा, मक्का, मूंग और अन्य मोटे अनाजों की बढ़ती बुवाई इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच फसल विविधीकरण किसानों के लिए जोखिम कम करने का प्रभावी उपाय बन सकता है।

खरीफ सीजन पर मानसून की रहेगी नजर:

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ सप्ताह खरीफ सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। मानसून की प्रगति, वर्षा की स्थिति और मिट्टी में नमी का स्तर फसलों के अंतिम रकबे और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। यदि वर्षा सामान्य रहती है, तो इस वर्ष खरीफ उत्पादन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। वहीं कमजोर मानसून की स्थिति में वैकल्पिक फसलों और जल प्रबंधन रणनीतियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

FAQs:

Q1. खरीफ सीजन 2026 में कुल कितनी बुवाई हुई है?
A. जून 2026 तक 119.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है।

Q2. किस फसल में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है?
A. मूंग और धान की बुवाई में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

Q3. किन फसलों में गिरावट आई है?
A. सोयाबीन और कपास की बुवाई में गिरावट देखी गई है।

Q4. क्या मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी है?
A. हां, बाजरा और मक्का की बुवाई में वृद्धि हुई है।

Q5. Khetivyapar इस रिपोर्ट में क्या कहता है?
A. Khetivyapar के अनुसार फसल विविधीकरण और कम पानी वाली फसलें किसानों के लिए लाभकारी हैं।

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