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बिहार के किसानों को बड़ी सौगात: ₹246 करोड़ से बढ़ेगा कृषि यंत्रीकरण, कृषि यंत्रों पर मिलेगा 80% तक अनुदान

बिहार कृषि योजनाएं 2026
बिहार कृषि योजनाएं 2026

बिहार के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलने जा रहे हैं। राज्य में आधुनिक खेती को बढ़ावा देने, उत्पादन लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं की घोषणा की गई है। इन पहलों का उद्देश्य खेती को तकनीक आधारित, लाभकारी और टिकाऊ बनाना है।

नौबतपुर में आयोजित ‘खेत बचाओ’ कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण, प्राकृतिक खेती और कृषि अवसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती हैं।

कृषि यंत्रीकरण को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन:

राज्य में आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 246 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके तहत कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और छोटे किसानों तक आधुनिक उपकरण पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा। योजना के अंतर्गत फार्म मशीनरी बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि ड्रोन जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे किसानों को महंगे कृषि उपकरण खरीदने की आवश्यकता कम होगी और वे कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकेंगे।

कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी:

किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी उन्नत मशीनों तक पहुंच मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मशीनों के बढ़ते उपयोग से श्रम लागत कम होगी, समय की बचत होगी और खेती की उत्पादकता में सुधार आएगा।

ड्रोन और मशीन बैंक बदलेंगे खेती का तरीका:

कृषि ड्रोन के उपयोग से फसलों की निगरानी, कीटनाशक एवं पोषक तत्वों का छिड़काव अधिक सटीक और कम लागत में किया जा सकेगा। वहीं, फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर किसानों को किराये पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराएंगे। इससे फसल अवशेष प्रबंधन, बुवाई, कटाई और अन्य कृषि कार्य अधिक कुशल तरीके से किए जा सकेंगे।

मखाना और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार:

बिहार पहले से ही मखाना, लीची और मशरूम उत्पादन में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। मखाना क्षेत्र के विकास, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और नए बाजारों तक पहुंच मिल सके।

भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं का होगा विस्तार:

फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राज्य में भंडारण और प्रसंस्करण अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा। गोदाम, थ्रेसिंग फ्लोर, दाल मिल और तेल प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इन सुविधाओं से कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

प्राकृतिक और जैविक खेती पर विशेष फोकस:

सरकार खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने पर भी जोर दे रही है। जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की गई हैं। इन पहलों से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही किसानों को टिकाऊ खेती के नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे।

FAQs:

Q1. कृषि यंत्रीकरण से किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
कृषि यंत्रीकरण से समय की बचत, श्रम लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि होगी।

Q2. कृषि यंत्रों पर कितनी सब्सिडी मिल रही है?
किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

Q3. फार्म मशीनरी बैंक क्या है?
यह एक ऐसी सुविधा है जहां किसान किराए पर आधुनिक कृषि उपकरण प्राप्त कर सकते हैं।

Q4. कृषि ड्रोन का उपयोग किस लिए होता है?
ड्रोन का उपयोग फसल निगरानी और कीटनाशक छिड़काव के लिए किया जाता है।

Q5. मखाना उत्पादों के लिए क्या नई पहल की जा रही है?
मखाना को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।

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