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Smart Seed Technology: ICAR-IIOR की नई पहल: बीजों को मिलेगा सुरक्षा कवच, सूखा, रोग और मौसम की मार से फसलों को मिलेगी मजबूती

स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक
स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक

कृषि क्षेत्र में बढ़ती जलवायु चुनौतियों के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR), हैदराबाद ने एक नई ‘स्मार्ट सीड कोटिंग’ तकनीक विकसित की है। यह तकनीक बीजों की गुणवत्ता बढ़ाने, बेहतर अंकुरण सुनिश्चित करने और फसलों को प्रतिकूल मौसम, कीटों तथा बीमारियों से बचाने में मदद करेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नवाचार भविष्य की जलवायु-सहिष्णु खेती को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

बीजों को मिलेगा पोषण और सुरक्षा का दोहरा लाभ:

नई तकनीक में जैव-अपघटनीय (बायोडिग्रेडेबल) बायोपॉलिमर आधारित परत का उपयोग किया गया है, जो बीजों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण तैयार करती है। यह परत लाभकारी सूक्ष्मजीवों, सूक्ष्म पोषक तत्वों, पौध वृद्धि प्रोत्साहकों और फसल सुरक्षा घटकों को सीधे बीज के आसपास पहुंचाने का कार्य करती है। इससे बीजों का अंकुरण तेज होता है, जड़ों का विकास बेहतर होता है और शुरुआती अवस्था में पौधों की वृद्धि अधिक मजबूत बनती है। साथ ही फसल को सूखा, नमी की कमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और अन्य पर्यावरणीय तनावों का सामना करने की क्षमता भी मिलती है।

प्रयोगों में मिला 30% तक अधिक उत्पादन:

किसानों के खेतों में किए गए प्रदर्शन परीक्षणों के दौरान मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों में उल्लेखनीय परिणाम देखने को मिले। कई क्षेत्रों में पारंपरिक खेती की तुलना में उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों में सोयाबीन, मक्का, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी फसलों में भी बेहतर अंकुरण, मजबूत पौध विकास और उत्पादन वृद्धि के सकारात्मक परिणाम सामने आए। कई मामलों में उत्पादकता में 12 से 37 प्रतिशत तक सुधार देखा गया।

वर्षा आधारित खेती के लिए वरदान बन सकती है तकनीक:

भारत का बड़ा कृषि क्षेत्र वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है, जहां मानसून में देरी, सूखे की स्थिति, नमी की कमी और मिट्टी की खराब गुणवत्ता जैसी समस्याएं अक्सर फसल उत्पादन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में स्मार्ट सीड तकनीक बीजों को शुरुआती चरण में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती है, जिससे फसल स्थापना मजबूत होगी और उत्पादन जोखिम कम होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीजों का प्रारंभिक विकास बेहतर हो जाए तो पूरी फसल की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

हर प्रकार की फसल में किया जा सकेगा उपयोग:

इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहुउपयोगिता है। इसे अनाज, मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, रेशेदार फसलों, चारा फसलों, सब्जियों, मसालों और बागवानी फसलों सहित विभिन्न कृषि प्रणालियों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। पारंपरिक बीज उपचार जहां केवल एक उद्देश्य पूरा करते हैं, वहीं यह तकनीक कई लाभकारी तत्वों को एक साथ बीज तक पहुंचाने में सक्षम है, जिससे किसानों को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर फोकस:

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में कृषि विकास उन तकनीकों पर निर्भर करेगा जो संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ अधिक उत्पादन देने में सक्षम हों। स्मार्ट सीड तकनीक कम लागत में अधिक लाभ देने वाली ऐसी ही एक नवाचार आधारित व्यवस्था है, जो किसानों को बेहतर पैदावार, अधिक लाभ और कम जोखिम प्रदान कर सकती है। यह तकनीक पोषक तत्वों के कुशल उपयोग, इनपुट लागत में कमी और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में भी सहायक मानी जा रही है।

देशभर में विस्तार के लिए बढ़ेगी साझेदारी:

इस तकनीक को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने के लिए ICAR-IIOR सार्वजनिक और निजी बीज संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। राज्य बीज विकास निगमों, राष्ट्रीय बीज निगम, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), बीज उद्यमियों और निजी बीज कंपनियों की मदद से इसे व्यापक स्तर पर अपनाने की योजना बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट सीड तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रसार भारत की बीज प्रणाली को मजबूत करेगा, कृषि उत्पादन बढ़ाएगा और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में किसानों की मदद करेगा। इससे देश के लाखों किसानों की आय और आजीविका में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है।

FAQs:

1. Smart Seed Technology क्या है?

यह एक उन्नत बीज कोटिंग तकनीक है जो बीजों को पोषण, सुरक्षा और बेहतर अंकुरण प्रदान करती है।

2. Smart Seed Coating Technology किसने विकसित की है?

इस तकनीक को ICAR-IIOR, हैदराबाद ने विकसित किया है।

3. इस तकनीक से किसानों को क्या लाभ होगा?

बेहतर अंकुरण, मजबूत पौध विकास, अधिक उत्पादन और मौसम संबंधी जोखिमों में कमी।

4. किन फसलों में Smart Seed Technology का उपयोग किया जा सकता है?

सोयाबीन, मूंगफली, चना, मक्का, सरसों, कपास, अरहर सहित कई फसलों में इसका उपयोग किया जा सकता है।

5. क्या Smart Seed Technology जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी?

हाँ, यह Climate Resilient Farming को बढ़ावा देकर सूखा, नमी की कमी और मौसम की अनिश्चितता के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है।

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