धान की कटाई के साथ ही देश के कई राज्यों में रबी सीजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। किसान अब गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने और बेहतर बीजों का चयन करने में जुटे हैं। अच्छी पैदावार के लिए केवल समय पर बुवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने क्षेत्र की जलवायु, सिंचाई की उपलब्धता और बुवाई के समय के अनुसार सही किस्म चुनना भी बेहद जरूरी है। गेहूं की कुछ उन्नत किस्में बेहतर उत्पादन क्षमता, अच्छी गुणवत्ता और प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता के कारण किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसी पांच किस्मों की विशेषताएं और बुवाई से जुड़ी जरूरी बातें।
गेहूं की हर किस्म की अपनी अलग विशेषता होती है। किसी किस्म को अगेती बुवाई के लिए विकसित किया गया है, तो कोई रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता या मजबूत तने के लिए पहचानी जाती है। किसान अपनी जरूरत और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के आधार पर इन किस्मों पर विचार कर सकते हैं।
DBW 303, जिसे करण वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है, गेहूं की एक उन्नत किस्म है। इसे भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने विकसित किया है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में अगेती बुवाई के लिए उपयुक्त बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी औसत उपज लगभग 32 क्विंटल प्रति एकड़ और अनुकूल परिस्थितियों में संभावित उपज करीब 39 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है। इसके दानों में लगभग 12.1 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह किस्म पीले और भूरे रतुआ जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी जानी जाती है।
WH 1270 गेहूं की अगेती किस्म है, जिसे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। यह कम अवधि में फसल तैयार होने और अपेक्षाकृत मोटे दानों के लिए पहचानी जाती है। उचित फसल प्रबंधन और अनुकूल मौसम में इसकी पैदावार लगभग 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपज क्षेत्र, मिट्टी, सिंचाई और बुवाई के समय पर निर्भर करेगी। किसानों को इसका बीज लेने से पहले अपने जिले के लिए इसकी अनुशंसित बुवाई अवधि और उपयुक्तता की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
HD 3226, जिसे पूसा यशस्वी के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त किस्म है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के हवाले से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी औसत उपज लगभग 57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके दानों में करीब 12.8 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह किस्म पीले, भूरे और काले रतुआ सहित गेहूं के कई प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है।
गेहूं की बुवाई से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान:
बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्म का चयन करने के साथ खेत की तैयारी और फसल प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
अपने क्षेत्र के अनुसार ही करें गेहूं की किस्म का चयन:
गेहूं की अधिक पैदावार के लिए केवल किसी किस्म की अधिकतम उत्पादन क्षमता के दावे पर भरोसा करना सही नहीं है। किसान यह जरूर देखें कि संबंधित किस्म उनके जिले और कृषि-जलवायु क्षेत्र के लिए अनुशंसित है या नहीं। साथ ही, बुवाई का समय, सिंचाई की उपलब्धता और प्रमुख रोगों की स्थिति को भी ध्यान में रखें। सही किस्म का चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर बुवाई से गेहूं की फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
(FAQs):
1. गेहूं की सबसे अच्छी उन्नत किस्म कौन सी है?
DBW 303, WH 1270 और HD 3226 प्रमुख उन्नत किस्में हैं। इनमें से सही किस्म का चुनाव क्षेत्र और बुवाई के समय के अनुसार करना चाहिए।
2. DBW 303 गेहूं की पैदावार कितनी होती है?
DBW 303 की औसत पैदावार लगभग 32 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। अनुकूल परिस्थितियों में यह 39 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है।
3. WH 1270 गेहूं की बुवाई कब करनी चाहिए?
यह अगेती बुवाई के लिए विकसित किस्म है। इसकी सही बुवाई अवधि के लिए स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय की सलाह लें।
4. HD 3226 गेहूं की औसत उपज कितनी है?
HD 3226 की औसत उपज लगभग 57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
5. गेहूं की बुवाई के लिए प्रति एकड़ कितना बीज चाहिए?
समय पर बुवाई के लिए लगभग 40 किलो बीज प्रति एकड़ का उल्लेख है। वास्तविक मात्रा किस्म और बुवाई की विधि के अनुसार तय करें।