गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना: मध्य प्रदेश में पशुपालकों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने और देशी गोवंश की उन्नत नस्लों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के अंतर्गत ‘गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी गई है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने इस संबंध में 26 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया। योजना के तहत सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। प्रथम स्थान पाने वाले पशुपालक को ₹1 लाख, दूसरे स्थान पर ₹50 हजार और तीसरे स्थान पर रहने वाले को ₹25 हजार की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार का उद्देश्य पशुपालन को किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय का बेहतर साधन बनाना है। इसी दिशा में शुरू की गई गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के माध्यम से अधिक दूध देने वाली गायों और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ देशी गोवंश की उन्नत नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके जरिए पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और गांवों को दुग्ध उत्पादन के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
पशुपालकों को मिलेंगे ₹1 लाख, ₹50 हजार और ₹25 हजार:
योजना के अंतर्गत प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिया जाएगा।
पुरस्कार विजेताओं का चयन निर्धारित मापदंडों के अनुसार किया जाएगा। योजना के प्रावधानों के मुताबिक, पुरस्कार राशि का उपयोग पूरी तरह देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए ही किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य पशुपालकों को उन्नत देशी नस्लों के पालन के लिए प्रोत्साहित करना है।
गिर, साहीवाल और मालवी सहित देशी नस्लों को मिलेगा बढ़ावा:
योजना में देशी गोवंश की उन्नत नस्लों के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी, निवाड़ी और अन्य अधिसूचित स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। देशी नस्लों के व्यवस्थित पालन और दुग्ध उत्पादन में सुधार से पशुपालकों को अपनी आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ ही राज्य में देशी पशुधन के संरक्षण और ग्रामीण स्तर पर डेयरी गतिविधियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
वर्ष 2027-28 से प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में प्रतियोगिता:
योजना के तहत दूसरे वर्ष यानी 2027-28 से 2030-31 तक प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से अधिक दूध देने वाली गायों और बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों की पहचान की जाएगी। विजेताओं को प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। योजना में यह भी लक्ष्य रखा गया है कि वृंदावन ग्रामों को दुग्ध उत्पादन तथा देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाए। प्रतियोगिता के संचालन और विजेताओं के चयन के लिए विकासखंड एवं जिला स्तर पर समितियां गठित की गई हैं।
गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के प्रमुख उद्देश्य:
इस योजना का लक्ष्य केवल अधिक दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और देशी पशुधन को बढ़ावा देना भी है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
एक परिवार से कितने लोग ले सकेंगे भाग?
योजना के प्रावधानों के अनुसार, वृंदावन ग्राम या विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में एक परिवार से केवल एक प्रतिभागी या एक गाय शामिल हो सकेगी। इससे प्रतियोगिता में अधिक परिवारों को भागीदारी का अवसर देने और निर्धारित नियमों के अनुरूप चयन प्रक्रिया संचालित करने में मदद मिलेगी।
पशुपालकों के लिए जरूरी बात: प्रतियोगिता में भाग लेने की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और स्थानीय स्तर पर लागू नियमों की जानकारी के लिए संबंधित विकासखंड के पशु चिकित्सा अधिकारी या पशुपालन एवं डेयरी विभाग से संपर्क करना उचित रहेगा।
(FAQs):
1. गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की योजना है, जिसका उद्देश्य अधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को प्रोत्साहित करना और देशी गोवंश का संरक्षण करना है।
2. गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना में प्रथम पुरस्कार कितना है?
प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को ₹1 लाख की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
3. दूसरे और तीसरे स्थान पर कितना पुरस्कार मिलेगा?
दूसरे स्थान पर ₹50,000 और तीसरे स्थान पर ₹25,000 दिए जाएंगे।
4. योजना में किन देशी गायों की नस्लों को बढ़ावा दिया जाएगा?
गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी, निवाड़ी और अन्य अधिसूचित स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा दिया जाएगा।
5. मध्य प्रदेश में प्रतियोगिताएं कब शुरू होंगी?
योजना के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2027-28 से प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।