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नरवाई (पराली) जलाने के बजाय अपनाएं वैज्ञानिक तरीके! किसानों को बताए गए फसल अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल के विकल्प

नरवाई जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
नरवाई जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान

फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली नरवाई (पराली) को जलाने के बजाय उसका सही प्रबंधन करना मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला भोपाल द्वारा आदमपुर छावनी में नरवाई प्रबंधन पर एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों, कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञों, रिलायंस सीबीजी प्लांट के निदेशक और विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला में नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के साथ-साथ फसल अवशेषों को जैविक पदार्थ और उपयोगी ऊर्जा संसाधन में बदलने के वैज्ञानिक विकल्पों की जानकारी दी गई।

आदमपुर छावनी में नरवाई प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित:

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला भोपाल ने परियोजना संचालक, आत्मा (ATMA) और उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास के तत्वावधान में यह कार्यशाला आयोजित की। इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कृषि वैज्ञानिकों, सहायक संचालक कृषि अभियांत्रिकी, रिलायंस सीबीजी प्लांट के निदेशक तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल कटाई के बाद बचने वाले अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करना और नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी देना था।

नरवाई जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान:

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि खेतों में नरवाई (पराली) जलाने से मिट्टी की उर्वरता और मृदा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, फसल अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे नरवाई जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें। इससे खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और कृषि संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने में मदद मिल सकती है।

फसल अवशेषों से जैविक पदार्थ और उपयोगी संसाधन तैयार करने पर जोर:

कार्यशाला के दौरान किसानों को नरवाई के बेहतर इस्तेमाल के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी गई। इनमें फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाना, जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग करना और अन्य उपयुक्त तकनीकों के माध्यम से उनका सदुपयोग करना शामिल रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का भी एक तरीका है।

नरवाई से कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने की संभावनाएं बताईं:

कार्यशाला में रिलायंस सीबीजी प्लांट के निदेशक ने फसल अवशेषों से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार करने की संभावनाओं और इसके उपयोग के बारे में जानकारी दी। फसल अवशेषों का इस्तेमाल बायोगैस उत्पादन में करने से कृषि अपशिष्ट को उपयोगी ऊर्जा संसाधन में बदलने के अवसर मिल सकते हैं। इससे नरवाई के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने और कृषि अवशेषों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में मदद मिल सकती है।

गांव-गांव तक पहुंचाई जाएगी वैज्ञानिक नरवाई प्रबंधन की जानकारी:

कार्यशाला में कृषि विस्तार अधिकारियों से कहा गया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में किसानों को नरवाई प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में जागरूक करें। इसके साथ ही नरवाई जलाने की प्रवृत्ति रोकने के लिए प्रभावी जन-जागरूकता गतिविधियां चलाने पर जोर दिया गया। कृषि विभाग के उप संचालक ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाएं। उन्होंने कहा कि नरवाई का उचित प्रबंधन मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने, वायु प्रदूषण कम करने और कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है। फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करना टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

(FAQs):

1. नरवाई प्रबंधन क्या है?

फसल कटाई के बाद खेतों में बचे डंठल, पत्तियों और अन्य अवशेषों का उपयोगी तरीके से निपटान करना नरवाई प्रबंधन कहलाता है।

2. नरवाई जलाने से क्या नुकसान होता है?

नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के जैविक पदार्थ तथा मृदा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

3. नरवाई जलाने के बजाय क्या करना चाहिए?

किसान उपयुक्त कृषि मशीनों की मदद से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं या अन्य वैज्ञानिक प्रबंधन तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं।

4. क्या नरवाई से कंप्रेस्ड बायोगैस बनाई जा सकती है?

हां, उपयुक्त तकनीक और प्रसंस्करण के माध्यम से कुछ प्रकार के फसल अवशेषों का उपयोग कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने में किया जा सकता है।

5. नरवाई का सही प्रबंधन किसानों के लिए क्यों जरूरी है?

इससे वायु प्रदूषण कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने और फसल अवशेषों का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

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