अल-नीनो की आशंका, मानसून की असमान बारिश और वैश्विक बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026 के लिए खाद, बीज, सिंचाई, फसल विविधीकरण और किसानों की आय से जुड़े कई कदमों की घोषणा की है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम की चुनौती हो या प्राकृतिक आपदा, किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं।
फसलवार स्थिति में सबसे बड़ी कमी धान के क्षेत्र में दर्ज हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, धान का रकबा करीब 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है। मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्र में भी कुछ कमी दर्ज की गई। दूसरी ओर, उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर जैसी दलहनी, तिलहनी और मोटे अनाज वाली फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है।
जानकारी के अनुसार कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे के कारण करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इन क्षेत्रों में फसल नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है ताकि प्रभावित किसानों के लिए आवश्यक सहायता और राहत संबंधी कदम उठाए जा सकें।
ये भी पढ़ें: - किसानों के लिए जानिए आज का मंडी भाव, अलग-अलग मंडियों में फसलों के ताजा भाव और बाजार की नई अपडेट। खेती-किसानी से जुड़ी हर जरूरी जानकारी के लिए KhetiVyapar से जुड़े रहें।
वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंता के बीच केंद्र सरकार ने रबी सीजन के लिए उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। राज्यों ने 2026-27 के रबी सीजन के लिए DAP, यूरिया, NPK सहित करीब 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग रखी है। सरकार के अनुसार, देश में वर्तमान में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है। पिछले वर्ष रबी सीजन की शुरुआत में इसी समय यह स्टॉक करीब 122 लाख मीट्रिक टन था।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, खरीफ सीजन में प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। किसानों को फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरक की मात्रा की जानकारी दी गई। इसके परिणामस्वरूप संबंधित जिलों में उर्वरक की कुल खपत में 27 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई और देश को ₹1,400 करोड़ से अधिक की अनुमानित बचत हुई।
सूखा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय टीमें जाएंगी:
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीमों को राज्यों में भेजने की तैयारी है। कर्नाटक और महाराष्ट्र की मांग के आधार पर 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों का भौतिक निरीक्षण करेंगी। कृषि मंत्री ने स्वयं भी प्रभावित राज्यों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने की बात कही है।
MSP से नीचे कीमत जाने पर दलहन-तिलहन खरीद की व्यवस्था:
किसानों को बाजार में कीमतों में गिरावट से बचाने के लिए PM-AASHA के तहत दलहन और तिलहन की खरीद व्यवस्था को अधिक सक्रिय बनाने की बात कही गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, यदि बाजार कीमतें MSP से नीचे जाती हैं, तो केंद्र की नोडल एजेंसियां NAFED और NCCF राज्यों की खरीद प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार किए बिना सीधे मंडियों में किसानों से खरीद शुरू कर सकेंगी। इसके बाद राज्य एजेंसियां भी खरीद प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की स्थिति से बचाने के लिए खरीद तंत्र को अधिक समयबद्ध बनाना है।
राज्यों को RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत समय पर धनराशि:
केंद्र सरकार के अनुसार, राज्यों को RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत धनराशि समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहले जारी ₹4,000 करोड़ के बाद हाल ही में ₹3,000 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। इस तरह दोनों चरणों में राज्यों को ₹7,000 करोड़ से अधिक की धनराशि हस्तांतरित किए जाने की जानकारी दी गई है।
FAQs:
1. रबी सीजन 2026-27 के लिए कितना उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है?
सरकार के अनुसार देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है।
2. रबी सीजन के लिए राज्यों ने कितने उर्वरक की मांग की है?
राज्यों ने DAP, यूरिया और NPK समेत करीब 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग रखी है।
3. उर्वरक की खपत कितनी कम हुई?
सरकार के अनुसार मिट्टी परीक्षण आधारित पायलट प्रोजेक्ट वाले जिलों में उर्वरक खपत 27 प्रतिशत तक कम हुई।
4. क्या किसानों को MSP से कम भाव मिलने पर सरकारी खरीद होगी?
दलहन और तिलहन के लिए MSP आधारित खरीद व्यवस्था को सक्रिय करने पर जोर दिया गया है।
5. रबी सीजन 2026-27 में सरकार का मुख्य फोकस क्या है?
मुख्य फोकस समय पर खाद-बीज उपलब्धता, जलवायु-अनुकूल खेती, फसल विविधीकरण, वैज्ञानिक उर्वरक उपयोग और किसानों को बेहतर बाजार एवं MSP समर्थन देना है।