भारत का मत्स्य क्षेत्र अब केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार का जोर मछली पालन को एक आधुनिक, तकनीक आधारित और अधिक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर है। इसके लिए मछलियों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कोल्ड स्टोरेज, मोबाइल फिश मार्केटिंग और डिजिटल बाजार व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस बदलाव से मछुआरों और मछली पालकों को बेहतर बाजार मिलने के साथ-साथ महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
मत्स्य क्षेत्र में वैल्यू एडिशन यानी मूल्य संवर्धन को आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। इसके तहत ताजी मछली को सीधे बेचने के बजाय उसकी सफाई, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके बाजार की मांग के अनुसार तैयार उत्पादों में बदला जाता है। रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट मछली उत्पाद, फिश पिकल, फिश पाउडर, स्मोक्ड फिश और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद इसके उदाहरण हैं। ऐसे उत्पादों की मदद से घरेलू बाजार के साथ निर्यात के अवसर भी बढ़ाए जा सकते हैं।
भारत सरकार ने वर्ष 2015 से मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से कुल ₹39,272 करोड़ का सार्वजनिक निवेश निर्धारित किया है। इसमें ब्लू रिवोल्यूशन योजना, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी पहल शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रोसेसिंग, परिवहन, भंडारण और बाजार से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करना है। सरकारी जानकारी के अनुसार, इन पहलों के माध्यम से देशभर में लगभग 74.66 लाख मछुआरों और मछली पालकों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसरों को समर्थन दिया जा रहा है।
मछली को उत्पादन केंद्र से बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत ₹3,393.85 करोड़ के निवेश से 46,500 सुविधाओं को जोड़ा गया है। इनमें मछली परिवहन वाहन, थोक एवं खुदरा मछली बाजार, फिश कियोस्क, फीड मिल, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू एडेड उद्यम इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा, देश में पांच आधुनिक स्मार्ट फिश मार्केट विकसित किए जा रहे हैं। इन बाजारों में आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यावरण अनुकूल तकनीक और बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को शामिल किया जाएगा। इन परियोजनाओं से लगभग 15,900 रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
2,195 फिशरीज FPO से छोटे मछुआरों को मिलेगा बाजार का बेहतर अवसर:
छोटे मछुआरों और मछली पालकों के सामने अक्सर उत्पादन को एकत्र करने, पूंजी जुटाने, प्रोसेसिंग और बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने की चुनौती रहती है। इन समस्याओं को कम करने के लिए सामूहिक व्यावसायिक मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, देश में 2,195 फिशरीज फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPOs) के गठन में सहयोग दिया गया है। इनके माध्यम से मछली पालक अपना उत्पादन एकत्र कर सकते हैं और सामूहिक रूप से प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग तथा मार्केटिंग गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के तहत 5,500 मत्स्य सहकारी समितियों को फिशरीज FPO के रूप में मजबूत बनाने की पहल की जा रही है।
महिलाओं के लिए फिश प्रोसेसिंग और मोबाइल मार्केटिंग में बढ़ेंगे रोजगार:
मत्स्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन से महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। विशेष रूप से मछली सुखाने, अचार बनाने, फिश पापड़, स्मोक्ड फिश, फिश पाउडर, पैकेजिंग और खुदरा बिक्री जैसे कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत पिछले पांच वर्षों में महिलाओं के लाभ के लिए ₹4,155 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹1,572 करोड़ रही है। इन परियोजनाओं से 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों को समर्थन देने का प्रावधान किया गया है।
(FAQs):
1. भारत सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के लिए कितना निवेश निर्धारित किया है?
भारत सरकार ने वर्ष 2015 से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए ₹39,272 करोड़ का सार्वजनिक निवेश निर्धारित किया है।
2. मछली पालन में वैल्यू एडिशन क्या होता है?
मछली की सफाई, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके उसे बाजार की मांग के अनुसार तैयार उत्पाद में बदलना वैल्यू एडिशन कहलाता है।
3. देश में कितने स्मार्ट फिश मार्केट विकसित किए जा रहे हैं?
देश में आधुनिक तकनीक और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से युक्त पांच स्मार्ट फिश मार्केट विकसित किए जा रहे हैं।
4. फिशरीज FPO से मछली पालकों को क्या फायदा होगा?
FPO के माध्यम से छोटे मछली पालक अपना उत्पादन एकत्र कर सकते हैं और सामूहिक रूप से प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग तथा मार्केटिंग कर बेहतर बाजार तक पहुंच बना सकते हैं।
5. मत्स्य क्षेत्र में महिलाओं के लिए कितनी परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं?
PMMSY के तहत पिछले पांच वर्षों में महिलाओं के लाभ के लिए ₹4,155 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इससे 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों को समर्थन देने का प्रावधान है।