भारत सरकार का कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के माध्यम से जलवायु अनुकूल कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए नेशनल इनोवेशन इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर (NICRA) नामक प्रमुख परियोजना संचालित कर रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन का फसल, पशुपालन, बागवानी और मत्स्य क्षेत्र पर प्रभाव का अध्ययन किया जाता है तथा जलवायु-संवेदनशील तकनीकों का विकास और प्रचार-प्रसार किया जाता है। अब तक ICAR द्वारा कुल 2900 किस्में जारी की गई हैं, जिनमें से 2661 किस्में एक या अधिक जैविक या अजैविक दबावों के प्रति सहनशील पाई गई हैं।
सरकार बीज एवं रोपण सामग्री पर उप मिशन (SMSP) के तहत किसानों को गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बीज उत्पादन और प्रसार को बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2024-25 के दौरान SMSP की बीज योजना के अंतर्गत ₹270.90 करोड़ की राशि आवंटित की गई, जिसमें से ₹206.86 करोड़ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए गए। इनमें से ₹141.46 करोड़ की राशि बीज ग्राम कार्यक्रम के अंतर्गत दी गई है।
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि रणनीतियाँ अपनाई जा रही हैं। इसके तहत कई योजनाएं लागू की गई हैं:
इसके अलावा एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), एग्रोफॉरेस्ट्री और राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत भी जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और उत्तर पूर्व क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (MOVCDNER) के माध्यम से जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। PKVY देश के सभी राज्यों (उत्तर पूर्वी राज्यों को छोड़कर) में लागू की जा रही है, जबकि MOVCDNER विशेष रूप से उत्तर पूर्वी राज्यों में लागू है।
दोनों योजनाएं किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, प्रमाणन और विपणन तक एंड-टू-एंड सहायता प्रदान करती हैं:
पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन: यह योजना 3 वर्षों में ₹46,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है, जिसमें से ₹32,500 जैविक इनपुट्स के लिए और ₹15,000 DBT के रूप में किसानों को प्रदान किया जाता है।