भारत में चालू वित्त वर्ष के अप्रैल–जनवरी पीरियड में कच्चे कपास (कॉटन) और वेस्ट का इंपोर्ट डॉलर के हिसाब से 72% बढ़कर 1.79 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। इस बढ़त में सरकार द्वारा दी गई इंपोर्ट ड्यूटी छूट, बेहतर गुणवत्ता की जरूरत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी मुख्य कारण माने जा रहे हैं। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अनुसार, कपास वर्ष 2025–26 में कुल इंपोर्ट 50 लाख गांठों तक पहुंच सकता है।
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल–जनवरी पीरियड में भारत का कच्चे कपास और वेस्ट का इंपोर्ट पिछले साल के 1.04 अरब डॉलर से बढ़कर 1.79 अरब डॉलर हो गया। इसका मुख्य कारण मिलों और व्यापारियों द्वारा ड्यूटी में छूट का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से रिकॉर्ड खरीदारी करना है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रुपये के हिसाब से इस अवधि में इंपोर्ट 15,857 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 8,771.96 करोड़ रुपये से 81% अधिक है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर से शुरू हुए कपास वर्ष 2025–26 में जनवरी तक लगभग 35 लाख गांठें (प्रत्येक 170 किग्रा) आयात की जा चुकी हैं। अगस्त में सरकार ने शुरुआत में कॉटन को सितंबर के अंत तक इंपोर्ट ड्यूटी से छूट दी थी और इसे 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया, ताकि सप्लाई बढ़ाई जा सके और टेक्सटाइल इंडस्ट्री का दबाव कम हो। अमेरिकी टैरिफ के कारण टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर 50% अतिरिक्त बोझ पड़ा था, जिससे भारत का वैश्विक मुकाबला प्रभावित हो रहा था।
भारत में कॉटन इंपोर्ट पर सामान्यतः 11% ड्यूटी लगती है। CAI के पूर्व अध्यक्ष अतुल एस. गणात्रा ने कहा, “मूल्य के हिसाब से यह अब तक का सबसे बड़ा इंपोर्ट है।” उनका अनुमान है कि कपास वर्ष 2025–26 में कुल इंपोर्ट 50 लाख गांठों तक पहुंच जाएगा। इसमें से 35 लाख बेल पहले ही आ चुकी हैं, जबकि अगले महीनों में 32 एमएम से लंबे एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन की 45 लाख बेल आने की उम्मीद है। इसके अलावा, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत ऑस्ट्रेलिया से ड्यूटी फ्री 3 लाख बेल और अफ्रीकी देशों से कम ड्यूटी (5.5%) पर 34 लाख बेल आने की संभावना है।
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, भारत ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका जैसे देशों से कॉटन आयात करता है। इसका उद्देश्य टेक्सटाइल सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले कॉटन के साथ प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाना है।
गणात्रा ने बताया कि स्पिनिंग मिलों को इंपोर्टेड कॉटन से घरेलू कॉटन की तुलना में 23% अधिक लाभ होता है, जबकि घरेलू कॉटन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में 8–10% अधिक हैं।
FAQs:
1. इस साल कॉटन इंपोर्ट कितना बढ़ा है?
डॉलर के हिसाब से 72% बढ़कर 1.79 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।
2. कपास वर्ष 2025–26 में कुल इंपोर्ट का अनुमान कितना है?
CAI के अनुसार 50 लाख गांठों तक पहुंच सकता है।
3. सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी में क्या छूट दी है?
सरकार ने कॉटन पर लगने वाली 11% ड्यूटी को अस्थायी रूप से माफ किया था।
4. विदेशी कॉटन से मिलों को कितना फायदा है?
स्पिनिंग मिलों को इंपोर्टेड कॉटन से करीब 23% अधिक लाभ मिल रहा है।
5. टेक्सटाइल इंडस्ट्री को कैसे राहत मिली?
बढ़ी सप्लाई और ड्यूटी छूट से कच्चे माल की उपलब्धता सुधरी, जिससे लागत का दबाव कम हुआ।