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छोटे किसानों की बड़ी पहचान, मिशन ऑर्गेनिक से सजेगा ऑर्गेनिक व्यापार मेला, किसानों को मिलेगा नया बाजार

ऑर्गेनिक व्यापार मेला
ऑर्गेनिक व्यापार मेला

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय आगामी बायोफैक इंडिया 2025 में भाग लेगा, जो देश का सबसे बड़ा ऑर्गेनिक व्यापार मेला माना जाता है। यह आयोजन 30 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित होगा।

पूर्वोत्तर राज्यों से आएंगे 27 से अधिक एफपीओ:

इस मेले में पूर्वोत्तर क्षेत्र के 27 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPOs) अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। ये एफपीओ मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ-ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) के तहत विकसित किए गए हैं।

मसालों की खुशबू से सजेगा ऑर्गेनिक व्यापार मेला:

एफपीओ अपने जैविक और वैल्यू-एडेड उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करेंगे, जिसमें इलायची, कीवी, अनानास, अदरक, हल्दी, किंग मिर्च, चावल, मिलेट्स, मसाले, ताज़े और प्रोसेस्ड फल तथा भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पाद शामिल होंगे। यहां किसान सीधे खरीदारों, व्यापारियों और विशेषज्ञों से संवाद करेंगे।

छोटे किसानों के लिए सहारा बना "मिशन ऑर्गेनिक":

वर्ष 2015-16 में प्रारंभ किया गया मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ-ईस्टर्न रीजन  पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल है। इस मिशन का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेशन और मार्केटिंग तक का पूरा सहयोग उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत छोटे और सीमांत किसानों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। इसके तहत जैविक क्लस्टर विकसित कर उन्हें सीधे बाजार से जोड़ा जाता है, जिससे उन्हें बेहतर दाम प्राप्त हो सके और उनकी आय में स्थिरता आए।

यह मिशन न केवल किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच दिलाकर सतत एवं लाभकारी कृषि की दिशा में मजबूत आधार भी प्रदान कर रहा है।

वैश्विक मंच पर पूर्वोत्तर की पहचान: बायोफैक इंडिया 2025 में भागीदारी से न केवल पूर्वोत्तर भारत के जैविक उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान बढ़ेगी, बल्कि किसानों को नई साझेदारियां बनाने और अपनी स्थिति मजबूत करने का भी अवसर मिलेगा।

टिकाऊ और समावेशी कृषि की दिशा में कदम: इस पहल के माध्यम से भारत सरकार न केवल जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सतत, समावेशी और जलवायु-संवेदनशील कृषि की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

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